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UP Election Result: नाहीद हसन जीते तो संगीत सोम को मिली हार, जानें

UP Election Results : बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे कुणाल यादव, अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि त्रिपाठी जैसे उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाती दिखाई दे रही है। राज्य में राजा भैया, संगीत सोम, धन्नंजय सिंह और रमाकांत यादव समेत कई बाहुबली नेता चुनाव लड़े हैं। राजा भैया को जहां जीत मिली, तो वहीं संगीत सोम को हार का सामना करना पड़ा। आइए जानते हैं यूपी के किस बाहुबली नेता को जीत मिली और किसे हार का सामना करना पड़ा।

राजा भैया (कुंडा) – प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने लगातार सातवीं बार जीत दर्ज की। वह यहां से पिछले छह चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतते रहे, इस बार वह अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। सपा ने यहां से गुलशन यादव और भाजपा ने सिंधुजा मिश्रा को अपना उम्मीदवार बनाया था। राजा भैया ने 30 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 99 , 261 वोट मिले।

संगीत सोम (सरधना)- पश्चिमी यूपी में भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम को हार का सामना करना पड़ा। सपा के अतुल प्रधान ने उन्हें 18 हजार से अधिक वोटों से हराया। 2017 में सपा प्रत्याशी अतुल प्रधान ने संगीत सोम ने हराया था।

अब्बास अंसारी (मऊ)- बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने मऊ सदर से जीत दर्ज की है। यह मुख्तार की परंपरागत सीट है। लगभग तीन दशक से यह सीट उनके पास है। अब्बास सुभासपा की टिकट पर चुनाव लड़े थे। साल 2107 में बसपा की टिकट घोसी सीट से मैदान में उतरे अब्बास को हार का सामना करना पड़ा था।

नाहिद हसन (कैराना)- गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल में बंद नाहिद हसन को शामली जिले के कैराना सीट से जीत मिली। भाजपा प्रत्याशी और बाबू हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को 25 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।

विजय मिश्रा (ज्ञानपुर)- भदोही के ज्ञानपुर विधानसभा सीट से विधायक विजय मिश्रा को हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उनका पांचवीं बार सदन तक पहुंचने का सपना टूट गया। इस सीट पर निषाद पार्टी के उम्मीदवार विपुल दुबे ने हराया। साल 2017 में विजय निषाद पार्टी से ही चुनाव जीते थे।

विनय शंकर तिवारी (चिल्लूपार)- गोरखपुर जिले की चिल्लूपार सीट से सपा नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे और निवर्तमान विधायक विनय शंकर तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के राजेश त्रपाठी से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हरिशंकर तिवारी इस सीट से काफी समय तक विधायक रहे।

रमाकांत यादव (फूलपुर पवई)- आजमगढ़ जिले की फूलपुर-पवई विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रमाकांत यादव ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के राम सूरत को लगभग 25 हजार वोटों से हराया। रमाकांत का इस सीट पर काफी दबदबा है। पिछले विधानसभा चुनाव में उनके बेटे अरुण कुमार यादव ने भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता था। इस बार रमाकांत यादव की सपा में वापसी हो गई और वह खुद इस सीट से मैदान में उतरे।

अमनमणि त्रिपाठी (नौतनवा)- नौतनवा विधानसभा सीट से बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि त्रिपाठी को हार का सामना करना पड़ा। वह बसपा की टिकट पर मैदान में उतरे थे। वह तीसरे नंबर पर रहे। साल 2107 में वह निर्दल प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे थे और जीत हासिल की थी।

धनंजय सिंह (मलहनी)- जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से मल्हनी विधानसभा सीट प्रत्‍याशी व बाहुबली नेता धनंजय सिंह को हार का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी के लकी यादव ने उन्हें हराया। धनंजय का इस सीट पर काफी प्रभाव रहा है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। साल 2012 में उनकी पत्‍नी जागृति सिंह यहां से हार गई थीं।

अभय सिंह (गोसाईगंज)- अयोध्‍या जिले की गोसाईगंज सीट से सपा के बाहुबली नेता अभय सिंह ने भाजपा प्रत्याशी और बाहुबली खब्‍बू तिवारी की पत्‍नी आरती तिवारी को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया। साल 2017 में भाजपा के इंद्रप्रताप उर्फ खब्‍बू तिवारी ने उन्हें हराया था।

नीलम करवरिया (मेजा ) – उदयभान करवरिया की पत्नी नीलम करवरिया को मेजा विधानसभा सीट से सपा के प्रत्याशी संदीप पटेल ने करीबी अंतर से हरा दिया। उदयभान, जवाहर पंडित हत्याकांड में सजा काट रहे हैं। वह यहां से निवर्तमान विधायक हैं।

कुणाल यादव (सहसवान)- बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे कुणाल यादव बदायूं की सहसवान सीट से मैदान में थे। वह राष्ट्रीय परिवर्तन दल की टिकट पर मैदान में उतरे थे। वह कुछ खास नहीं कर सके और चौथे नंबर पर रहे।

अजय राय (पिंडरा)- वाराणसी के पिंडरा सीट से कांग्रेस के बाहुबली नेता अजय राय को हार का सामना करना पड़ा। साल 2017 में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा के डॉ. अवधेश सिंह ने उन्हें हराया।

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