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Swami Vivekananda Jayanti: पढ़ाई के साथ ही स्पोर्ट्स, जिमनास्टिक और संगीत में भी रुचि लेते थे विवेकानंद, जानें उनके बारे में खास बातें

Swami Vivekananda Jayanti: शिकागो की विश्व धर्म संसद में साल 1893 में विवेकानंद ने जो भाषण दिया था, उसकी वजह से वह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए थे।

National Youth Day 2022: महान दार्शनिक और देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद की आज जयंती है। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था। उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

शिकागो की विश्व धर्म संसद में साल 1893 में विवेकानंद ने जो भाषण दिया था, उसकी वजह से वह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए थे। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत ‘मेरे अमेरिकी बहनों और भाइयों’ से की थी।

इस धर्म संसद में उन्होंने पूरी दुनिया को भारत की संस्कृति से परिचित करवाया था। इस धर्म सम्मेलन में दुनियाभर के धार्मिक नेता मौजूद थे।

कैसा था शुरुआती जीवन और कहां तक पाई शिक्षा

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वह शुरू से ही आध्यात्मिक थे। जब वह 25 साल के हुए तो उन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से प्रभावित होकर संन्यास ले लिया था। इसके बाद उनका नाम विवेकानंद पड़ा।

विवेकानंद बंगाली परिवार से थे। उनके पिता विश्वनाथ दत्त अटॉर्नी थे और समाज में काफी प्रभावशाली व्यक्ति थे। उनकी मां भुवनेश्वरी देवी काफी आध्यात्मिक थीं, उन्हीं का सबसे ज्यादा असर विवेकानंद पर पड़ा।

साल 1871 में विवेकानंद जब 8 साल के थे, तब उनका दाखिला ईश्वरचंद्र विद्यासागर इंस्टीट्यूट में हुआ, बाद में वह कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज चले गए। वह दर्शन, विज्ञान, कला समेत तमाम विषयों में काफी रुचि रखते थे।

पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें संगीत का भी शौक था। वह स्पोर्ट्स, जिमनास्टिक, रेसलिंग और बॉडी बिल्डिंग में भी रुचि लेते थे।

4 जुलाई 1902 को बेलूर मठ, हावड़ा में 39 साल की अल्पआयु में विवेकानंद का निधन हो गया था। उनके बारे में कहा जाता है कि जब वह काशी में थे, उसी समय उनको ये आभास हो गया था कि अब मृत्यु निकट है। इसके पहले भी वह पांच बार काशी गए थे, लेकिन उन्हें अपनी मृत्यु का आभास इस आखिरी यात्रा में हुआ।

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