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SC on Forceful Conversion: जबरन धर्मांतरण पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में देना होगा जवाब

Supreme court: देश में हो रहे जबरन धर्मांतरण को सुप्रीम कोर्ट ने देश के लिए खतरा बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा ऐसे मामलों पर केंद्र को देना होगा जवाब।

Forcefully Conversion: देश में हो रहे जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की टिप्पणी आई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लालच, धोखा, बल और प्रलोभनो के दम पर किए गए धर्मांतरण की घटनाओं को रोका जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये देश की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं। सोमवार (14 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर इस प्रथा को नहीं रोका गया तो यह नागरिकों के विवेक की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के लिए भी कई तरह से खतरा पैदा करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को इस तरह के जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए आगे आना होगा।

इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण किया जा रहा है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ऐसे में सरकार क्या कर रही है? कोर्ट ने कहा राज्य सरकारों के पास कानून होते हैं, केंद्र सरकार को भी ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करना चाहिए। बेंच ने केंद्र सरकार से क्रमवार विवरण मांगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले को लेकर हलफनामा दायर करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 28 नवंबर को सुनवाई करेगा।

जबरन धर्मांतरण भारतीय संविधान की अनुच्छेद 14,21 और 25 का उल्लंघन है

सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई की थी जिसमें इस बात की मांग की गई थी कि छल, बल, दंभ, पाखंड लालच, धमकी सहित कई अन्य तरीकों से देश में तेजी से धर्मांतरण किया जा रहा है जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने जबरन धर्म परिवर्तन पर चिंता जाहिर करते हुए कहा, ‘जबरन धर्मांतरण राष्ट्र के हित के खिलाफ है। देश में अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन की इजाजत है लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन की अनुमति नहीं है।’

22 नवंबर को सॉलिसिटर जनरल दायर करेंगे हलफनामा

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने धर्मांतरण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देश के कुछ राज्यों ने इन मामलों में कानून बनाए हैं। आगामी 22 नवंबर को हम इस पर हलफनामाा दायर करेंगे और कोर्ट को बताएंगे कि राज्य सरकारों ने धर्मांतरण को लेकर क्या-क्या कदम उठाए हैं। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर को कानून मंत्रालय और केंद्रीय गृहमंत्रालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में धर्मांतरण मुद्दे पर जवाब मांगा था। बेंच के सामने याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि देश में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण करवाया जा रहा है। इस गतिविधि को नियंत्रित करने के लिए भारतीय दंड संहिता में प्रावधान कड़े किए जाए।

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