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NDA Meeting: भाजपा और जेजेपी में संबंध मधुर नहीं, लेकिन बैठक में पहुंचे दुष्यंत चौटाला, जानिये क्या है वजह

पिछले कुछ महीनों से हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) और जननायक जनता पार्टी (JJP) के बीच पहले जैसा मधुर संबंध नहीं दिख रहा है। इससे ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों का गठबंधन शायद अगले लोकसभा चुनाव में न रहे। हालांकि मंगलवार को एनडीए की बैठक में जननायक जनता पार्टी (JJP) को बुलाया गया था।

दुष्यंत चौटाला ने कहा, “गठबंधन को लेकर दोनों दलों का नेतृत्व चर्चा करेंगे”

इससे एक दिन पहले सोमवार को जेजेपी के मुखिया और हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूं। हमने एक स्थिर सरकार देने के लिए गठबंधन किया है। गठबंधन आगे कैसे बढ़ेगी इसको लेकर दोनों दलों का नेतृत्व चर्चा करेंगे। सीटों का बंटवारा भविष्य का एक मुद्दा होगा। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हैं।”

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बोले- गठबंधन पर अभी बोलना जल्दबाजी होगी

दिसंबर 2022 में चौटाला ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था, “2019 में जब हम गठबंधन किये थे तब यह तय हुआ था। मैं हमेशा इसको कहा है।” लेकिन भाजपा बहुत उत्सुक नहीं लग रही थी, खास तौर पर पार्टी के अंदर ही एक वर्ग विरोध कर रहा था। उसमें केंद्रीय मंत्री चौधरी बिरेंदर सिंह भी शामिल थे। इस साल अप्रैल में हरियाणा भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा था: “हम अगले चुनाव में गठबंधन में रहेंगे या नहीं यह एक रणनीतिक विषय है। अभी इसके बारे में कुछ कहना बहुत जल्दबाजी होगी।”

भाजपा नेताओं ने कहा कि जेजेपी की योजना आने तक पार्टी इंतजार कर रही है। 2020 में जेजेपी ने 10 सीटें जीती थीं। 2020-21 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए आंदोलन के दौरान किसान जेजेपी से उम्मीद कर रहे थे कि वह उनके समर्थन में खड़े हों और बीजेपी से गठजोड़ खत्म कर दे।

चौटाला शिरोमणि अकाली दल (SAD) की केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के दबाव में थे, जिन्होंने 2020 मोदी सरकार से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उनकी पार्टी लंबे समय से एनडीए में थी। दुष्यंत चौटाला के खिलाफ किसानों के कई बार विरोध के बाद भी जेजेपी ने हरियाणा में गठबंधन का हिस्सा बना रहा।

अब गठबंधन के नेता कह रहे हैं कि जेजेपी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले सरकार को समर्थन वापस नहीं लेने का साफ संकेत भेजा है। बिना इस बात की चिंता किये कि उसका कोर वोट बैंक खतरे में पड़ सकता है। वे कहते हैं कि दुष्यंत जाट चेहरे के महत्व को भी जोड़ते हैं। यह प्रस्ताव उस समय आया है जब मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली बीजेपी-जेजेजी सरकार के खिलाफ हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा अभियान चला रहे हैं।

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