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N.D.A. ने दिल्ली तो I.N.D.I.A ने बेंगलुरु में दिखाया दम, दोनों गुटों से दूर रहे ये बड़े क्षेत्रीय दल

Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 के लिहाज से मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। क्योंकि सभी निगाहें विपक्षी गठबंधन और एनडीए की बैठकों पर थीं। 2024 के राजनीतिक समीकरण के हिसाब से दोनों ने आज एक नई उभरती हुई तस्वीर पेश की। बेंगलुरु में विपक्षी गठबंधन की हुई बैठक में कुल 26 दल शामिल हुए। विपक्षी दलों का यह गठबंधन एक नया नाम INDIA लेकर सामने आया यानी अब विपक्षी दलों के गठबंधन को UPA नहीं इंडिया के नाम से जाना जाएगा। इसी के साथ यूपीए नाम आज से खत्म हो गया। विपक्षी गठबंधन की बेंगलुरु में यह दूसरी बैठक थी। इसी को देखते हुए एनडीए ने भी अपना दम दिखाया। एनडीए की इस बैठक में कुल 38 दल शामिल हुए। जिसमें से पूर्वोत्तर में भाजपा की सहयोगी पार्टियां हैं।

इसके लिहाज से समझा जा सकता है कि 64 पार्टियां INDIA और NDA की छत्रछाया में हैं, लेकिन कुछ प्रमुख दल ऐसे हैं जो या तो अपने राज्यों में चल रही राजनीति, अन्य दलों के साथ अपने समीकरण या फिर तटस्थ दिखने की वजह से दूर रहे हैं। उनमें प्रमुख पार्टियां के नाम इस प्रकार हैं।

जनता दल (सेक्युलर) (Janata Dal (Secular)

कर्नाटक की JD(S) पहले कांग्रेस और भाजपा के साथ गठबंधन का हिस्सा रही है, लेकिन मंगलवार को यह तस्वीर में कहीं नहीं थी। वैचारिक रूप से जद (एस) खुद को कांग्रेस और वाम दलों करीब मानी जाती है। पार्टी को मुसलमानों का भी समर्थन प्राप्त है और माना जाता है कि उसका भाजपा के साथ कोई तालमेल नहीं है।

शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal)

भाजपा द्वारा अपने पाले में लाने की अफवाहों के बावजूद शिरोमणि अकाली एनडीए की बैठक में नहीं थी। उसने विपक्ष की बैठक का हिस्सा भी नहीं बनने का फैसला किया था। पार्टी सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि शिरोमणि अकाली दल विपक्ष की बैठक से दूर रह रहा है, क्योंकि वह पंजाब में अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वियों – आम आदमी पार्टी (आप) या कांग्रेस के साथ मंच साझा नहीं करना चाहता है। बीजेपी ने कहा है कि वह 2024 में पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। अकाली दल ने भी सार्वजनिक तौर पर किसी भी गठबंधन से इनकार किया है।

बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party)

मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी कभी भी एनडीए का हिस्सा नहीं रही हैं। यहां तक की वो भाजपा की आलोचना करती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह विपक्ष के पक्ष में है। जब से विपक्ष को एकजुट करने के प्रयास शुरू हुए हैं, बसपा ने कहा है कि वह किसी भी पक्ष का हिस्सा नहीं बनने जा रही है। उसे कोई निमंत्रण नहीं मिला है।

बीजू जनता दल (Biju Janata Dal)

बीजेडी के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रवक्ता प्रसन्ना आचार्य ने कहा, ‘बीजेडी के लिए जो 25 वर्षों से ओडिशा में सत्ता में है, “समान दूरी” और “तटस्थता” महत्वपूर्ण हैं।’ उन्होंने कहा कि एक क्षेत्रीय पार्टी होने के नाते हमारी अपनी नीतियां हैं। अधिकांश समय हमारी नीतियां ओडिशा के हितों द्वारा निर्देशित होती हैं। संसद में और बाहर हम मुद्दा पर समर्थन देते हैं।

भारत राष्ट्र समिति (Bharat Rashtra Samithi)

विपक्ष की बैठक में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव या केसीआर के नेतृत्व वाले बीआरएस की अनुपस्थिति आश्चर्य की बात नहीं है। तेलंगाना में इस साल चुनाव होने हैं और कांग्रेस इसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पहले स्पष्ट कर दिया था कि केसीआर बैठक का हिस्सा नहीं होंगे, उन्होंने उन पर भाजपा की “बी टीम” होने का आरोप लगाया था। वहीं केसीआर ने स्वयं भाजपा की केंद्रीय नीतियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और उस पर संघवाद को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

वाईएसआरसीपी (YSRCP)

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआरसीपी ने राज्य स्तर पर भाजपा से कुछ दूरी बनाए रखी है, हालांकि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के साथ उसके संबंध सौहार्दपूर्ण बने हुए हैं। भाजपा की नीतियों को इसका समर्थन शायद यह संकेत दे सकता है कि वह एनडीए के पक्ष में होगी, लेकिन ऐसा नहीं लगता है। जहां तक विपक्ष की बैठक का सवाल है। जगन के लिए सबसे बड़ी मुसीबत कांग्रेस है। उन्होंने नवंबर 2010 में पार्टी छोड़ दी थी, क्योंकि उनके पिता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी की मृत्यु के बाद पार्टी ने उन्हें सीएम पद देने से इनकार कर दिया था।

इंडियन नेशनल लोकदल (Indian National Lok Dal)

इनेलो 1998 से 2004 तक एनडीए का सदस्य था। यह 2009 में फिर से एनडीए में शामिल हो गया, लेकिन अपने गृह क्षेत्र हरियाणा से लोकसभा में कोई सीट नहीं जीत सका। मंगलवार को, इनेलो की शाखा और राज्य सरकार में भाजपा की सहयोगी जननायक जनता पार्टी, एनडीए की बैठक में उपस्थित दलों में से थी। दूसरी ओर, इनेलो का दावा है कि वह हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ “तीसरा मोर्चा” बनाने की कोशिश कर रही है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen)

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम दोनों बैठकों से अनुपस्थित रही। ओवैसी पार्टी के अकेले सांसद हैं और तेलंगाना विधानसभा में उनके सात विधायक हैं। पार्टी पहले भी बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साध चुकी है, जबकि कांग्रेस अब एआईएमआईएम को भाजपा की बी पार्टी कहती रहती है।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (All India United Democratic Front)

एआईयूडीएफ के लिए एनडीए की बैठक का निमंत्रण कभी भी नहीं हो सकता है, क्योंकि असम में बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी भाजपा और उसकी नीतियों की बड़ी आलोचक है। हालांकि, विपक्ष की बैठक में AIUDF को भी आमंत्रित नहीं किया गया था।
इस साल की शुरुआत में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एआईयूडीएफ नेता बदरुद्दीन अजमल को ‘भाजपा का मुखपत्र’ बताते हुए उनकी निंदा करते हुए कहा था कि उनका यूपीए से कोई लेना-देना नहीं है।

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