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DLF का 2,025 तो अडानी की 5,069 करोड़ की बोली, क्यों लगाया दोगुना बिड?

गौतम अडानी (Gautam Adani) एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी धारावी का कायाकल्प करने जा रहे हैं। अडानी की कंपनी को धारावी री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का ठेका मिला है। बहुत कम लोग जानते हैं कि अडानी का बचपन भी चॉल में बीता है। स्कूल ड्रॉपआउट गौतम अडानी का परिवार कभी अहमदाबाद के पोल इलाके की एक चॉल में रहा करता था। तब परिवार में आर्थिक तंगी भी थी। बाद में जब 70 के दशक में अडानी हीरे का कारोबार करने के इरादे से मुंबई आए तब धारावी ने ही उन्हें सहारा दिया था।

धारावी से 50 साल पुराना नाता

गौतम अडानी लिखते हैं कि धारावी से मेरा रिश्ता 50 साल से भी पुराना है। दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती कही जाने वाली धारावी से मेरा पहला वास्ता 70 के दशक के अंत में तब पड़ा जब देश के तमाम युवाओं की तरह मैंने भी जीवन में कुछ कर गुजरने का सपना लिए मुंबई में कदम रखा। यह सपना हीरों के कारोबार में कुछ बड़ा कर दिखाने का था। आपाधापी के उस दौर में मैंने देखा कि धारावी में लोगों की भीड़ घोर अमानवीय और प्रतिकूल परिस्थितियों में रहने को मजबूर है।

गौतम अडानी कहते हैं कि धारावी की इस हकीकत ने मुझे हमेशा प्रेरित और परेशान दोनों किया। धारावी का दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती कहलाना हमारे लिए लज्जा का विषय है। यह विचार मेरे दिमाग में तब-तब हथौड़े की तरह बजता था, जब -जब मैं विमान से मुंबई एयरपोट पर उतर रहा होता था।

देश प्रगित के नए मुकाम हासिल करता रहेगा और धारावी में हालात बद से बदतर होते रहेंगे? यहां के लाखों परिवार क्या ऐसा ही मुश्किल जीवन जीने के लिए मजबूर रहेंगे? ऐसे तमाम सवालों का जब जवाब देने का जब समय आया तो मैंने बिना किसी संकोच कदम बढ़ा लिया। सरकार ने धारावी के कायाकल्प को लेकर जैसे प्लान बनाया, मैंने ज्यादा बोली लगाकर इस परियोजना को हासिल किया।

आपको बता दें कि गौतम अडानी की कंपनी ने धारावी प्रोजेक्ट के लिए 5,069 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। अडानी की बोली दूसरे नंबर पर रहने वाली DLF की बिड से दोगुनी थी। डीएलएफ की बोली 2,025 करोड़ की थी।

क्यों अनूठा है धारावी प्रोजेक्ट?

धारावी री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े शहरी पुनर्वास और पुनरुद्धार प्रोजेक्ट में से एक है। इसमें लगभग दस लाख लोगों का पुनर्वास किया जाना है। दस लाख तो दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों की आबादी तक नहीं होती। दूसरा यह कि इस दौरान न सिर्फ आवासीय इकाइयों बल्कि विभिन्न आकार और पैमानों के अलग-अलग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का पुनर्वास भी होगा। तीसरा, प्रोजेक्ट का लक्ष्य व्यापक और समग्र विकास का है, क्योंकि इसमें पात्र और अपात्र दोनों तरह के निवासियों की आवास और पुनर्वास की जरूरतें पूरी की जाएंगी।

बकौल गौतम अडानी, अभी धारावी की गलियों में घुसते ही नाक पर रूमाल रखना पड़ता है, लेकिन री-डेवलपमेंट के बाद यह सब अतीत का हिस्सा बन जाएगा। गैस, पानी, बिजली, साफ-सफाई और जल निकासी, स्वास्थ्य देखभाल और मनोरंजन की सुविधाएं तो होंगी ही। धारावी वासियों के लिए विश्व स्तरीय अस्पताल और स्कूल दोनों की व्यवस्था भी करेंगे।

पहले रहने की वैकल्पिक व्यस्था करेंगे

गौतम अडानी कहते हैं कि धारावी के लोगों को उनके पुराने घरों से तभी स्थानांतरित किया जाएगा, जब उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली जाएगी। री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की एक और खास बात यह है इसमें अपात्र किरायेदारों के पुनर्वास की भी व्यवस्था है। साथ ही धारावी के लोगों को नौकरी के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा, जिसमें युवाओं और महिलाओं पर मुख्य फोकस होगा।

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