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Bengal में दीदी की मुश्किलें बढ़ाएगी ISF! विधानसभा चुनाव में मिली थी सिर्फ 1 सीट, पंचायत में कर दिया कमाल

Atri Mitra

तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने बंगाल पंचायत चुनाव में बड़ी जीत हासिल की लेकिन उसके लिए इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) एक मुसीबत बनकर उभर रहा है। ISF का गठन 2021 विधानसभा चुनाव से पहले हुआ था लेकिन पंचायत चुनावों में इसके प्रदर्शन से टीएमसी काफी चिंतित है। दक्षिण 24 परगना जिले के अलावा उत्तर 24 परगना, हावड़ा और अन्य आसपास के जिलों में भी ISF ने अच्छा प्रदर्शन किया।

राज्य चुनाव आयोग ने अभी तक अंतिम आंकड़े नहीं जारी किए हैं। लेकिन आईएसएफ नेताओं का दावा है कि पश्चिम बंगाल में उनके द्वारा लड़े गए पहले पंचायत चुनावों में उन्होंने 1,300 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए और राज्य भर में सीटें हासिल कीं। नामांकन शुरू होने के ठीक बाद भांगर में दोनों दलों (TMC और ISF) के कार्यकर्ताओं के बीच देखी गई हिंसक झड़पें भी टीएमसी की चिंता को भी दर्शाती हैं। गुरुवार तक भांगर में हिंसा में मरने वालों की संख्या छह थी।

टीएमसी ने हमेशा से पश्चिम बंगाल में मुसलमानों को एक ठोस समर्थन आधार के रूप में देखा है। कोलकाता के उपनगर न्यू टाउन और राजारहाट से 20 किमी दूर स्थित भांगर एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल के मुसलमानों और दलितों को ‘सामाजिक न्याय’ देने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित फुरफुरा शरीफ के मौलवी पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने ISF का गठन किया था।

अब्बास सिद्दीकी के नेतृत्व में आईएसएफ ने अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं उनके अलावा उनके युवा भाई नौशाद पार्टी के एकमात्र विधायक हैं। भांगर के नतीजों ने फिर से क्षेत्र में टीएमसी की कमजोर होती स्थिति को दिखाया। टीएमसी ने पहली बार भांगर में उपस्थिति दर्ज की जब 2006 के विधानसभा चुनावों में अराबुल इस्लाम ने इस सीट से जीत हासिल की थी। लेकिन फिर 2011 में टीएमसी ने पहली बार सरकार बनाई लेकिन भांगर उन सीटों में से एक था जो वह हार गई थी। 2016 में टीएमसी ने अब्दुर रज्जाक मोल्ला को मैदान में उतारकर जीत हासिल की, जो वाम मोर्चा सरकार में मंत्री थे।

लेकिन 2021 में टीएमसी ने पूर्व सीपीआई (एम) नेता डॉ रेजाउल करीम को टिकट दिया, जिन्होंने 2019 में बीरभूम से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इसके बाद अब्दुर रज्जाक मोल्ला के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। लेकिन करीम आईएसएफ के नौशाद सिद्दीकी से हार गए।

टीएमसी सरकार भी 2013 से इस क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के विरोध में संघर्ष कर रही है। राज्य सरकार द्वारा पावर ग्रिड परियोजना के लिए 13 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के बाद यह आंदोलन शुरू हुआ। 2016 में ग्रामीणों ने सड़कें रोक दीं और पुलिस के साथ झड़प हुई, जिसमें दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। पुलिस ने गोलीबारी करने से इनकार किया और ‘बाहरी लोगों’ को दोषी ठहराया। इसके बाद सरकार ने परियोजना शुरू करने के लिए अगस्त 2018 में ग्रामीणों के साथ एक समझौता भी किया लेकिन फिर भी गुस्सा बना हुआ है।

आईएसएफ ने जोमी जिबिका बास्तुतांत्रो ओ पोरिबेश रक्षा समिति को शामिल करते हुए इसका फायदा उठाया। भूमि अधिग्रहण के विरोध में गठित पैनल पंचायत चुनाव में वाम दलों के साथ उसके सहयोगियों में से एक था।

एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए स्वीकार किया कि जो लोग भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लड़े थे वे अब (भांगर में) आईएसएफ के साथ हैं। लगभग सभी सीपीआई (एम) सदस्य भी अब आईएसएफ के साथ हैं। एक के बाद एक हमारे खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और कई क्षेत्रों में मुस्लिम वोट पूरी तरह से आईएसएफ में चला गया है। भांगर के कई गांवों में अब हमारे पास पैर रखने की जगह भी नहीं है।

टीएमसी और आईएसएफ के बीच तनाव आखिरी बार पिछले साल जनवरी में सामने आया था, जब उनके कार्यकर्ता कोलकाता की सड़कों पर भिड़ गए थे। आईएसएफ ने कथित तौर पर अराबुल इस्लाम के नेतृत्व में टीएमसी के लोगों द्वारा अपने कार्यकर्ताओं पर किए गए हमलों का विरोध किया था। झड़प में कम से कम आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे जबकि नौशाद सिद्दीकी और उनके 17 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया था। 42 दिन बाद ही नौशाद को जमानत मिली थी। इसके बाद टीएमसी ने विधायक शौकत मोल्ला को भेजकर स्थिति नियंत्रण करने की कोशिश की हालांकि पार्टी को सीमित सफलता ही मिली थी।

हाल के पंचायत चुनावों के दौरान आईएसएफ, सीपीआई (एम) और जोमी जिबिका बस्तुतांत्रो ओ पोरिबेश रक्षा समिति ने दावा किया कि उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोक दिया गया था। भांगर- I ब्लॉक में ISF एक भी सीट के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सका। इसके विपरीत भांगर- II में उसने 218 में से 132 ग्राम पंचायत सीटों पर उम्मीदवार उतारे और तीनों सहयोगियों ने मिलकर 68 सीटें जीतीं, जिसमे आईएसएफ ने केवल 43 सीटें जीतीं। जबकि टीएमसी ने 63 सीटें जीतीं।

अब्बास के भाई नौशाद ने दावा किया कि टीएमसी का आतंक नहीं होता तो आईएसएफ ने भांगर I और II दोनों ब्लॉकों में अधिकांश ग्राम पंचायत सीटें जीत ली होतीं। अराबुल इस्लाम ने कहा कि आईएसएफ अराजकता की ताकत है। उन्होंने भांगर के साथ-साथ दक्षिण और उत्तर 24 परगना में कई जगहों पर आतंक मचाया। लोगों ने चुनाव में ऐसी ताकतों को खारिज कर दिया।

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