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25 बिल राज्यसभा में पेंडिंग, एक 31 साल से अटका:इन्हें छोड़कर 25 बिल मानसूत्र सत्र में ही आए, 23 पास हो गए

नई दिल्ली33 मिनट पहले

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इस साल मानसून सेशन में 25 बिल पेश किए गए थे, जिनमें से 20 विधेयक लोकसभा और 5 बिल राज्यसभा में पेश किए गए। - Dainik Bhaskar

इस साल मानसून सेशन में 25 बिल पेश किए गए थे, जिनमें से 20 विधेयक लोकसभा और 5 बिल राज्यसभा में पेश किए गए।

राज्यसभा में 25 बिल पेंडिंग हैं। इनमें से एक बिल 31 साल से अटका पड़ा है। राज्यसभा ने गुरुवार को अपना बुलेटिन जारी कर यह जानकारी दी। उसमें बताया गया कि इन बिलों को छोड़कर 23 विधेयक ऐसे हैं, जो इसी साल (2023) मानसून सत्र में पेश किए गए और पास भी हुए। मानसून सेशन में 25 बिल पेश किए गए थे, जिनमें से 20 विधेयक लोकसभा और 5 बिल राज्यसभा में पेश किए गए।

सत्र खत्म (11 अगस्त) होने के बाद संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा था- इस सत्र में संसद के दोनों सदनों से 23 विधेयक पारित हुए। ये काफी अहम विधेयक थे, लेकिन लगातार प्रयासों और आग्रह के बावजूद विपक्ष ने अपने राजनीतिक कारणों की वजह से चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।

1992 का जो बिल अटका, वो बहुत खास है
संविधान (79वां) संशोधन बिल 1992 अगर पास होता तो दो बच्चे वाले ही पंचायत चुनाव लड़ पाते। इसके अलावा, दिल्ली रेंट (अमेंडमेंट) बिल 1997 से राज्यसभा में अटका हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2005 में सपा नेता अखिलेश यादव ने संविधान (79वां) संशोधन बिल को लेकर सवाल किया था। तब सरकार ने कहा था कि ये बिल संसद में राजनीतिक पार्टियों के बीच आम सहमति न बन पाने के कारण पेंडिंग पड़ा है।

जानें, कौन सा बिल कब से पेंडिंग…

2013 के 7 बिल पेंडिंग
2013 में UPA सरकार के लाए 7 बिल अभी तक पेंडिंग पड़े हैं। इनमें द बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स रिलेटेड लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2013, द एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंजेज (कंपल्सरी नोटिफिकेशन ऑफ वैकेंसीज) अमेंडमेंट बिल 2013, द राजस्थान लेजिस्लेटिव काउंसिल बिल 2013, द रजिस्ट्रेशन (अमेंडमेंट) बिल 2013 और द दिल्ली रेंट (रिपील) बिल 2013 शामिल हैं।

इसके अलावा द असम लेजिस्लेटिव काउंसिल बिल 2013, द रीएडजस्टमेंट ऑफ रिप्रेजेंटेशन ऑफ शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स इन पार्लियामेंट्री एंड असेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसी (थर्ड बिल) 2013 भी राज्यसभा में अटके हैं।

9 बिल 2014 के बाद से पेंडिंग
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से 8 बिल राज्यसभा में पेंडिंग हैं। इसमें द कॉन्स्टिटूशन (शेडयूल्ड ट्राइब्स) ऑर्डर (अमेंडमेंट) बिल 2019, द कॉन्स्टिट्यूशन (125 अमेंडमेंट) बिल 2019, द रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज ऑफ नॉन रेसिडेंट इंडियन बिल 2019, द इंटर-स्टेट रिवर वाटर डिस्प्यूट्स (अमेंडमेंट) बिल 2019 और द पेस्टीसाइड मैनेजमेंट बिल 2020 शामिल हैं।

वहीं, इसी साल मनमोहन सरकार द वक्फ प्रॉपर्टीज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्युपेंट्स) बिल 2014 लाई थी, जो पास नहीं हुआ था। इसके साथ ही कुछ बिल ऐसे हैं, जो सरकार ने 2023 में ही पेश किए हैं। इसमें द रिपीलिंग एंड अमेंडिंग बिल 2023, द पोस्ट ऑफिस बिल 2023 और द चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर्स (अपॉइंटमेंट, कंडीशंस ऑफ सर्विसेज एंड टर्म ऑफ ऑफिस) बिल 2023 शामिल हैं।

म्युनिसिपैलिटी (एक्सटेंशन टू द शेड्यूल्ड एरियाज) बिल 2001 भी पेंडिंग
म्युनिसिपैलिटी (एक्सटेंशन टू द शेड्यूल्ड एरियाज) बिल 2001, द सीड्स बिल 2004, द इंडियन मेडिसिन एंड होमियोपैथी फार्मेसी बिल 2005, द टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (अमेंडमेंट) बिल 2008, द माइंस (अमेंडमेंट) बिल 2011, द इंटर-स्टेट माइग्रेंट वर्कमैन (रेगुलेशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विसेज) अमेंडमेंट बिल 2011 और तमिलनाडु लेजिस्लेटिव काउंसिल (रिपील) बिल 2012 भी राज्यसभा में पेंडिंग हैं।

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