POLITICS

सुप्रीम कोर्ट का डेटा एक क्लिक में जरूरी:पोर्टल पर मामलों से जुड़ी जानकारी अपलोड होगी; सीजेआई बोले

नई दिल्ली3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को बताया कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट एनजेडीजी से जुड़ जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मामलों की जानकारी इस पर अपलोड की जाएगी। - दैनिक भास्कर

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को बताया कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट एनजेडीजी से जुड़ जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मामलों की जानकारी इस पर अपलोड की जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को कहा कि बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट को नेशनल ज्यूडिशियल डाटा बॅक (एनजेडीजी) से जोड़ा जाएगा। इसके बाद रियल टाइम में सुप्रीम कोर्ट का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध हो गया। सीजेआई ने आज की सुनवाई शुरू होने की घोषणा सुप्रीम कोर्ट में की।

उन्होंने कहा- आज का दिन ऐतिहासिक है। एनजेडीजी एक अनोखा मंच है, जिसे नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) और सुप्रीम कोर्ट की इन-हाउस टीम ने विकसित किया है। एनजेडीजी पर डेटा अपलोड होने के बाद ज्यूडिशियल सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने बताया कि अब आप केवल एक क्लिक पर सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों और उनके रहस्यों से संबंधित जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा आंतकी रजिस्टर्ड-अराजिस्टर्ड मामले और कोरम के तय किये गये मामलों की संख्या भी जान-मानी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई चंद्रचूड़ के वकील की पूर्व टिप्पणी की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई चंद्रचूड़ के वकील की पूर्व टिप्पणी की।

नेशनल ज्यूडिशियल डेटा नियोक्ता (एनजेडीजी) क्या है
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा टॉक्स (एनजेडीजी) एक ऑनलाइन पोर्टल है, जिसपर 18,735 आम कोर्ट, लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश, जजमेंट और मामलों की जानकारी अपलोड की जाती है। इसे ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया था।

देश के सभी उच्च न्यायालय का डेटा एनजेडीजी पर उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट को एनजेडीजी से नहीं जोड़ा गया था। हालाँकि, जल्द ही इस पोर्टल पर सुप्रीम कोर्ट का डेटा भी मिलना शुरू हो गया।

ये खबर भी पढ़ें…

कोर्ट सुप्रीम बोला- मीडिया ट्रायल को लेकर डेमोक्रेट निर्मित सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को मीडिया ट्रायल को लेकर निकोलाई ऑर्केस्ट्रा को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 3 महीने की इनसाइड मीडिया ब्रीफिंग पर ड्राफ्ट बनाने को कहा। इसके साथ ही सभी राज्यों के पुलिस महानिरीक्षक (डीजीपी) को भी एक महीने के अंदर इस मामले में गृह मंत्रालय ने सुझाव के निर्देश दिए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

न्यायालय सर्वोच्च बोला- वाल्गर पोस्ट के लिए सजा मिलनी जरूरी

कोर्ट सुप्रीमो ने सोशल मीडिया पर अभद्र और चावला पोस्ट को लेकर एक याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने कहा कि सोशल मीडिया पर नकल पोस्ट करने वालों को सजा मिलनी जरूरी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Back to top button