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संजय गांधी से राहुल गांधी तक… जानिए अमेठी से नेहरू-गांधी परिवार के रिश्ते का इतिहास

The Gandhis and Amethi: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नए प्रमुख अजय राय ने शुक्रवार (18 अगस्त) को कहा कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) 2024 का लोकसभा चुनाव अमेठी से लड़ेंगे। पिछले आम चुनाव में राहुल गांधी यह सीट भाजपा नेता स्मृति ईरानी (Smriti Irani) से हार गए थे।

अमेठी का गठन 1967 में हुआ था और तब से ही यह कांग्रेस का गढ़ रहा है। पिछले चार वर्षों, 1970 के दशक के कुछ समय और 1990 के दशक के शुरुआत को छोड़ दें तो इस निर्वाचन क्षेत्र से हमेशा या तो नेहरू-गांधी परिवार का सदस्य या उनका कोई वफादार जीता है। यहां हम अमेठी और नेहरू-गांधी परिवार के बीच दशकों पुराने रिश्ते पर बारीकी से नजर डालेंगे।

संजय गांधी (1980-81)

संजय गांधी अमेठी लोकसभा से चुनाव लड़ने वाले गांधी-नेहरू परिवार के पहले सदस्य थे। आपातकाल समाप्त होने के तुरंत बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में संजय अमेठी से लड़े थे। लेकिन जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए उनके द्वारा चलाए गए जबरन नसबंदी कार्यक्रम के कारण उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। अमेठी ने अपने संक्षिप्त इतिहास में पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी नेता को वोट दिया थी। उस चुनाव में जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह की जीत हुई थी।

कांग्रेस के इस दिग्गज नेता को आखिरकार 1980 के लोकसभा चुनाव में जीत का स्वाद मिला और वह अमेठी से सांसद बने। लेकिन 1981 में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। बतौर अमेठी सांसद उनका कार्यकाल छोटा रहा।

राजीव गांधी (1981-1991)

संजय की मृत्यु राजीव गांधी के सक्रिय राजनीति में प्रवेश का प्रतीक थी। 4 मई, 1981 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में इंदिरा गांधी ने अपने छोटे बेटे का नाम अमेठी से उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित किया। बैठक में मौजूद सभी कांग्रेस सदस्यों ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद राजीव ने अमेठी से अपनी उम्मीदवारी दाखिल की।

राजीव ने उपचुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की। उन्होंने लोकदल उम्मीदवार शरद यादव को 2 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया। राजीव ने 17 अगस्त 1981 को अमेठी से सांसद के रूप में शपथ ली। इसके बाद  राजीव ने 1984, 1989 और 1991 में भी अमेठी से जीत दर्ज कर लगभग एक दशक तक सीट अपने पास रखी।

साल 1991 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम द्वारा राजीव गांधी की हत्या किए जाने के बाद, एक बार फिर अमेठी में उपचुनाव हुआ। कांग्रेस के सतीश शर्मा को जीत मिली। 1996 के चुनाव में उन्होंने अपनी जीत को दोहराया।

दो साल बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा के संजय सिंह ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। उस समय भाजपा ने यूपी की 85 लोकसभा सीटों में से 57 सीटें जीत ली थीं।

सोनिया गांधी (1999-2004)

1999 में अमेठी की जनता एक बार फिर नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य को वोट दिया, जब राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी इस निर्वाचन क्षेत्र से लड़ीं। लेकिन वह उसी सीट से दोबारा चुनाव में खड़ी नहीं हुईं। 2004 के लोकसभा चुनाव में सोनिया खुद राय बरेली से लड़ीं और राहुल गांधी ने अमेठी से पर्चा भरा।

राहुल गांधी (2004-2019)

राहुल अपने पहले ही प्रयास में अमेठी से जीतने में कामयाब हुए और 2009 में 3.70 लाख वोटों के भारी अंतर से फिर से चुने गए। 2014 में उन्होंने भी उन्होंने जीत हासिल की, लेकिन इस बार उनकी प्रतिद्वंद्वी स्मृति ईरानी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। आखिरकार 2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने राहुल को हरा दिया और वह दो दशकों से अधिक समय में अमेठी जीतने वाली दूसरी भाजपा नेता बन गईं। रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरानी की जीत निर्वाचन क्षेत्र के लगातार दौरे और 2014 की हार के बाद से कांग्रेस पार्टी की लगातार हार का परिणाम थी।

कांग्रेस पार्टी को अब उम्मीद है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल वापस आएंगे। इसमें विशेष रूप से राहुल की हालिया भारत जोड़ो यात्रा और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली जीत के प्रभाव की उम्मीद जताई जा रही है।

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