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शिंदे सरकार में मंत्री बनते ही शरद पवार के घर क्यों चले गए अजित?

शिंदे सरकार में वित्त मंत्री बनते ही अजित पवार ने अचानक से एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की है। शरद पवार से उनके निवास पर ही ये मुलाकात हुई है। महाराष्ट्र की सियासत में जिस तरह का सियासी खेला हुआ है, उसके बाद इस मुलाकात ने चर्चाओं के बाजार को गर्म कर दिया है। वैसे अब इस मीटिंग का असल कारण भी सामने आ गया है।

शरद पवार से मिलने क्यों गए अजित?

असल में शरद पवार की पत्नी प्रतिभा पवार का शुक्रवार को ब्रीच कैंडी अस्पताल में हाथ का ऑपरेशन हुआ। उस ऑपरेशन के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि अपनी चाची का हालचाल लेने के लिए ही अजित गए हैं। वहां पर उनकी शरद पवार से बातचीत भी संभव है। यानी कि राजनीतिक गलियारों में जरूर मुलाकात को सियासी चश्मे से देखा जा रहा है, लेकिन अजित गुट इसे सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट तक सीमित रखना चाहता है।

अजित के वित्त मंत्री बनते ही शिंदे गुट परेशान

जानकारी के लिए बता दें कि शुक्रवार को शिंदे सरकार में अजित पवार को वित्त मंत्रालय सौंप दिया गया। ये वो मंत्रालय है जिस पर नजर शिंदे गुट के विधायकों की भी थी। बताया जा रहा है कि उद्धव से कई शिवसैनिकों का नाता भी इसी वजह से टूटा था क्योंकि महा विकास अघाड़ी सरकार में अजित के वित्त मंत्री रहते हुए सही तरह से फंड नहीं मिलते थे, कई विकास कार्य रुक गए थे। इन्हीं तर्कों के आधार पर मांग की गई थी कि शिंदे सरकार में अजित को वित्त मंत्रालय ना दिया जाए। लेकिन अब इसे सियासी प्रेशर कहा जाए या कुछ और, शिंदे गुट के विधायकों की मांग को नहीं माना गया है।

औरंगाबाद वेस्ट के विधायक संजय शिरासत का कहना है कि उद्धव सरकार के दौरान शिवसेना के विधायकों को मिलने वाला फंड 50 करोड़ रुपये आसपास था तो राकांपा के विधायक 700-800 करोड़ रुपये तक झटक ले जाते थे। फाइनेंस मिनिस्टर अजित थे तो वो मनमाने फैसले लेते थे।

बीजेपी कैसे करेगी बैलेंस?

संदीपन भूमरे का कहना है कि उद्धव ठाकरे के खिलाफ एकनाथ शिंदे कभी नहीं थे। वो अजित पवार का विरोध करते थे। उनका कहना था कि अजित पवार जिस तरह से विधायकों को फंड दे रहे हैं उससे शिवसेना कमजोर हो जाएगी। वो MVA से बाहर आए थे तो केवल NCP की वजह से।

अब ये प्रतिक्रियाएं बताने के लिए काफी हैं कि शिंदे गुट में सबकुछ ठीक नहीं है। खबरें पहले भी थीं, लेकिन अजित के वित्त मंत्री बनते ही कई चीजें साफ हो गई हैं। अब आने वाले दिनों में बीजेपी किस तरह से स्थिति बैलेंस करती है, सीएम एकनाथ शिंदे कैसे आगे बढ़ते हैं, इस पर सभी की नजर रहने वाली है।

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