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विदेशों से आने वाले पैसे के बारे में दैनिक आधार पर सूचना देने को एनईएफटी, आरटीजीएस में बदलाव

विदेशों से आने वाले पैसे के बारे में दैनिक आधार पर सूचना देने को एनईएफटी, आरटीजीएस में बदलाव

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम से जुड़े लेन-देन को लेकर एनईएफटी और आरटीजीएस प्रणालियों में जरूरी बदलाव किए. गृह मंत्रालय के भारतीय स्टेट बैंक से विदेशों से भेजे जाने वाले पैसे समेत विदेशी चंदा देने वालों के बारे में दैनिक आधार पर रिपोर्ट देने के लिये कहे जाने के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है.

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विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत विदेशी चंदा एसबीआई की नयी दिल्ली मुख्य शाखा के एफसीआरए खाते में ही आना चाहिए. विदेशी बैंकों से एफसीआरए खाते में योगदान स्विफ्ट (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस) और भारतीय बैंकों से एनईएफटी (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) और आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के जरिये भेजा जाता है.

आरबीआई ने एक परिपत्र में कहा कि गृह मंत्रालय (एमएचए) की मौजूदा आवश्यकताओं के संदर्भ में दानकर्ता के नाम, पते, मूल देश, राशि, मुद्रा और प्रेषण के उद्देश्य समेत सभी विवरण इस तरह के लेनदेन में दर्ज किए जाने आवश्यक हैं. एसबीआई को दैनिक आधार पर इसके बारे में जानकारी गृह मंत्रालय को देनी है.

केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘…एनईएफटी और अरटीजीएस प्रणालियों में जरूरी बदलाव किये गये हैं.” निर्देश 15 मार्च, 2023 से प्रभाव में आ गये हैं.

आरबीआई ने बैंकों से एनईएफटी और आरटीजीएस प्रणाली के माध्यम से एसबीआई को विदेशी दान भेजते समय अपेक्षित विवरण प्राप्त करने के लिये आवश्यक परिवर्तन करने को कहा है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से, एफसीआरए से संबंधित नियमों को कड़ा किया गया है. इसके तहत कानून के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करने को लेकर लगभग 2,000 गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के एफसीआरए पंजीकरण भी रद्द किये गए हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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