POLITICS

‘लोकसभा में जीरो पर आउट होगी बसपा’:5 करोड़ नहीं दिए इसलिए निकाला; बहनजी के हाथ के वजन के नीचे दबा हूं…मसूद के 5 बड़े बयान

सहारनपुर6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
पश्चिम यूपी के नेता इमरान मसूद को मंगलवार को बसपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने पार्टी पर कई आरोप लगाए हैं। - Dainik Bhaskar

पश्चिम यूपी के नेता इमरान मसूद को मंगलवार को बसपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने पार्टी पर कई आरोप लगाए हैं।

न तड़पने की इजाजत है, न फरियाद की, घुटकर मर जाऊं ये मर्जी है मेरे सय्याद की…ये लाइनें पश्चिमी यूपी के फायर ब्रांड नेता इमरान मसूद ने बसपा से बाहर निकाले जाने के बाद कहीं। दैनिक भास्कर से बातचीत में इमरान ने कहा, ”बसपा मुझसे 5 करोड़ रुपए की डिमांड कर रही थी। लेकिन, मेरे पास इतने रुपए नहीं हैं। मैंने देने से इनकार किया तो मुझे पार्टी से निकाल दिया।”

इमरान ने कहा, ”मैं पार्टी के वोट बैंक से नहीं, अपने दम पर चुनाव लड़ता हूं। योद्धा कभी दबता नहीं है और हम योद्धा हैं। हमने विपरीत परिस्थतियों में हमेशा लड़ा है। हार के डर से मैं कभी घर नहीं बैठता हूं। मैं तो निकाय चुनाव में पार्टी को 8 हजार से डेढ़ लाख वोट पर ले गया। उसके बाद भी बसपा समझ नहीं पा रही है।”

  • आइए, सबसे पहले इमरान मसूद के 5 बड़े बयान पढ़ते हैं, जो उन्होंने पार्टी से निकाले जाने के बाद कहे…
बसपा से निकाले जाने के बाद मंगलवार को इमरान मसूद कुछ इस अंदाज में बैठे नजर आए।

बसपा से निकाले जाने के बाद मंगलवार को इमरान मसूद कुछ इस अंदाज में बैठे नजर आए।

1. किताबों के नाम पर बसपा मांग रही 5 करोड़
इमरान ने कहा, ”बसपा ने जिन किताबों का जिक्र लेटर में किया है, वह पैसों की किताब है। मेरे से 5 करोड़ रुपए मांगे जा रहे हैं। मेरे पास पैसा नहीं है। मैं तो जनता का आदमी हूं। मैं जमीन पर उतरकर काम करता हूं। मेरा कोई काम-धंधा नहीं है। किसान आदमी हूं। काश्तकार आदमी की जितनी हैसियत होगी, वह उतनी मदद करेगा। यह अनुशासनहीनता है, तो मैंने की है। मेरी हैसियत नहीं है। मेरे में दम नहीं है। योद्धा कभी दबता नहीं है और हम योद्धा हैं। हमने विपरीत परिस्थितियों में हमेशा लड़ा है। हार के डर से मैं कभी घर पर नहीं बैठता हूं।”

2. पार्टी को 8 हजार वोट से डेढ़ लाख पर ले गया
इमरान ने कहा, ”जब मैं पार्टी में आया था, तब बसपा को विधानसभा चुनाव में 8 हजार वोट मिले थे। 32 हजार वोटों से देहात विधानसभा सीट से सपा का कैंडिडेट चुनाव जीता था। जब निकाय चुनाव हुआ, तो मैंने पार्टी के वोट बैंक में वृद्धि की। डेढ़ लाख से ऊपर वोट बैंक पर मैं पार्टी को ले गया और मुझसे क्या चाहते हैं?

उन्होंने कहा, ”उसके बाद भी बसपा समझ नहीं पा रही है। बहनजी बड़ी नेता हैं। जैसे उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा है, मैं उस वजन में इतना दबा हुआ हूं कि उनके लिए जीवन में एक शब्द भी नहीं बोल सकता हूं।”

3. जीरो पर आउट होगी बसपा
इमरान मसूद ने कहा, ”मैं तो मिशन को जोड़ने के लिए आया था। जो बाबा साहब ने शुरू करके और मान्यवर काशीराम ने जिसे पोषने का काम किया। यदि बसपा गठबंधन के साथ नहीं जाती है, तो 2024 के चुनाव में जीरो पर आउट होगी, यह साफ दिखाई दे रहा है। मैंने जीरो पर आउट होने से बचाने के लिए यह बात कही। लेकिन, आज संविधान खतरे में हैं। हम सबको साथ मिलकर लड़ना चाहिए। लेकिन, मेरी बात को ऊपर अनुशासनहीनता माना गया।”

यह फोटो 10 महीने पुरानी है। जब इमरान मसूद बसपा में शामिल होने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने उनके घर दिल्ली गए थे।

यह फोटो 10 महीने पुरानी है। जब इमरान मसूद बसपा में शामिल होने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने उनके घर दिल्ली गए थे।

4. बसपा को सच्चाई पसंद नहीं..मैं क्या करूं?
इमरान मसूद बोले, ”मैं जहां रहूंगा, वहां सच ही कहूंगा। पार्टी के लिए काम किया। लेकिन, बसपा को सच्चाई पसंद नहीं है तो मैं क्या सकता हूं? मेरा अपना वोट है। लेकिन, बसपा का वोट मात्र 8 हजार था। मैंने अपने वोट के ऊपर राजनीति की है। मुझे लोगों ने आजाद उम्मीदवार भी जिताया है। मुझे चुनाव लड़ने के लिए रहमो-करम की जरूरत नहीं। मैं तो चुनाव लड़ लूंगा। हम राजनीति में हैं। हमारी भी महत्वाकांक्षाएं हैं। हमारे पास पैसा नहीं है, तो क्या हमें आप लात मारकर बाहर कर देंगे?

5. पार्टी हो या नहीं, 2024 में लड़ूंगा चुनाव
इमरान ने कहा, ”पार्टी हो या ना हो, लेकिन मेरे समर्थक चाहते हैं कि चुनाव लड़ा जाए तो चुनाव लड़ा जाएगा। 2024 चुनाव को लेकर पूरी तैयारी है, लेकिन यह फैसला मेरे साथी ही लेंगे। मीटिंग बुलाई जाएगी। मुझे तो यह भी नहीं पता लग पाया है कि मेरी गलती क्या है? मैंने तो पार्टी और मिशन मूवमेंट को बढ़ाने की बात की। मैं जहां-जहां गया, वहां-वहां वोटों की वृद्धि हुई है। उसके बाद पार्टी से बाहर निकाल रहे हैं, यह मेरी समझ से बाहर है। मेरी औकात नहीं है कि मैं 5 करोड़ रुपए दे दूं।”

  • अब इमरान मसूद को पार्टी से निकाले जाने की वजह पढ़िए…
यह फोटो 2022 विधानसभा चुनाव से पहले की है। जब कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुए थे।

यह फोटो 2022 विधानसभा चुनाव से पहले की है। जब कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुए थे।

पहली वजह- लोकसभा टिकट के लिए बना रहे थे दबाव
दरअसल, निकाय चुनाव में हार और INDIA गठबंधन बनने के बाद से इमरान लगातार 2024 लोकसभा चुनाव के लिए टिकट का दबाव पार्टी पर बना रहे थे। जिसके बाद से वह पार्टी विरोधी बयानबाजी कर रहे थे। निकाय चुनाव हारने के बाद से ही वह पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। लेकिन, उनके समर्थक पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होकर बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान की मुखालफत करते दिखाई दिए।

राजनीतिक जानकारों की मानें, तो इमरान मसूद अपने समर्थकों के सहारे दबाव बनाकर टिकट पाना चाहते थे। जिस कारण बेहट में भी बसपा सांसद के खिलाफ नारेबाजी कराई। वहीं दो दिन पहले यूपी प्रभारी शमशुद्दीन राइन एक कार्यक्रम में आए थे तो वहां भी उनके समर्थकों ने पार्टी के खिलाफ चल कर नारेबाजी की है।

दूसरी वजह- राहुल गांधी की खुलकर की थी तारीफ
चर्चा है कि इमरान को अंदाजा है कि इस बार लोकसभा चुनाव में उनको टिकट नहीं मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस में जाने का मन बनाया है। इसलिए उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तारीफों के पुल बांधना शुरू कर दिए। पूर्व विधायक इमरान मसूद ने एक न्यू चैनल को बयान दिया था।

इसमें कहा था, ”पूरे देश में राहुल गांधी एक ऐसे नेता हैं, जो बेखौफ होकर जनता के पक्ष में बोलते हैं। मैंने प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के साथ काम किया है। दोनों ही बेहतरीन इंसान हैं।” इमरान मसूद के निष्कासित होने की खबर आते ही कांग्रेस के बड़े नेता उन्हें भुनाने की कोशिश में लगे हैं। कई बार कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णन ने भी फोन पर उनसे बात की।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ इमरान मसूद की फोटो।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ इमरान मसूद की फोटो।

बसपा बोली- पार्टी विरोधी गतिविधियों में पाए गए दोषी
बसपा ने इमरान मसूद को निष्कासन का लेटर जारी करते हुए लिखा, ”पूर्व विधायक इमरान मसूद बसपा में अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की रिपोर्ट विभिन्न सूत्रों से छानबीन करने के बाद दी गई। जिस कारण इन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया गया है। जबकि इनको पार्टी में अनुशासनहीनता अपनाने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के बारे में कई बार चेतावनी भी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद भी इनकी कार्य शैली में कोई सुधार नहीं आया है, जिसकी वजह से आज इनको बसपा से निष्कासित कर दिया गया है।”

पहली बार किसी पार्टी ने इमरान को निकाला
इमरान मसूद ने कई पार्टियों को कपड़ों की तरह बदला है। कांग्रेस, सपा में कई बार उलट-फेर करते रहे। पहली बार हाथी के महावत बने थे। वह दावा करते हैं कि उनके कारण पार्टी का वोट बैंक बढ़ा। अब तक इमरान ने ज्यादातर पार्टियां खुद ही छोड़ी थी। लेकिन बसपा को झटका देने से पहले ही पार्टी ने उन्हें झटका दे दिया। अचानक से हुई कार्रवाई के बाद इमरान कुछ बौखलाए हुए हैं।

अब मसूद का राजनीति प्रभाव पढ़िए…

यह फोटो 2022 विधानसभा चुनाव की है। जब इमरान मसूद सपा नेता आशु मलिक के साथ चुनाव प्रचार कर रहे थे।

यह फोटो 2022 विधानसभा चुनाव की है। जब इमरान मसूद सपा नेता आशु मलिक के साथ चुनाव प्रचार कर रहे थे।

पश्चिमी यूपी के 7 जिलों में इमरान मसूद का प्रभाव
पश्चिमी यूपी मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। यहां मुरादाबाद और संभल में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 47.12% है। बिजनौर में 43.03%, सहारनपुर में 41.95%, मुजफ्फरनगर में 41.95%, शामली में 41.03% और अमरोहा में 40.78% मुसलमान वोटर्स हैं। इसके अलावा पांच ऐसे जिले हैं, जहां मुस्लिम वोटर्स की आबादी 30 से 40% और 12 जिलों में 20 से 30% हैं। 15 ऐसे जिले हैं, जहां मुस्लिम वोटर्स निर्णायक स्थिति में हैं। इसके अलावा पश्चिमी यूपी में दलित वोटर्स की संख्या भी 20 से 30% है।’ इन जिलों में इमरान मसूद का काफी प्रभाव माना जाता है।

जिले के क्या रहेंगे समीकरण?
इमरान मसूद भले ही मुस्लिम समाज के बड़े नेता माने जाते हों। लेकिन, उनकी राजनीतिक विरासत खतरे में दिखाई दे रही है। सहारनपुर में 41.95% मुसलमान हैं, जिनको वह अपना वोट बैंक समझते हैं। लेकिन बसपा सांसद हाजी फजलुर्रहमान, सपा विधायक आशु मलिक और उमर अली खान ने मुस्लिम वोट बैंक में पहले ही सेंधमारी कर रखी है। ऐसे में कहीं न कहीं इमरान के मुस्लिम वोटर बंट सकते हैं। वहीं, दलित-मुस्लिम गठजोड़ का चेहरा बनाकर बसपा में इमरान मसूद को लाने वाली पार्टी कहीं न कहीं हाशिए पर खड़ी दिखाई दे सकती है।

अब जानिए कौन हैं इमरान मसूद?

इमरान मसूद ने दैनिक भास्कर से बातचीत कर पार्टी से निकाले जाने की वजह बताई।

इमरान मसूद ने दैनिक भास्कर से बातचीत कर पार्टी से निकाले जाने की वजह बताई।

पूर्व केंद्रीय मंत्री के भतीजे हैं इमरान
पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रसीद मसूद के भतीजे पूर्व विधायक इमरान मसूद का नाम वेस्ट यूपी के कद्दावर नेताओं में गिना जाता है। वह 2007 का विधानसभा, 2014 का लोकसभा और 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, 2007 को छोड़कर हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

वह 2007 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मुजफ्फराबाद (वर्तमान में बेहट) सीट से पहली और आखिरी बार विधायक चुने गए थे। उस वक्त इमरान मसूद ने सपा के मंत्री जगदीश राणा को हराया था। इमरान सहारनपुर में नगरपालिका अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

2014 में उन्होंने कांग्रेस से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। जिसमें वह 4 लाख से अधिक वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। उसके बाद 2019 में इमरान मसूद ने फिर लोकसभा में कांग्रेस के ही टिकट पर चुनाव लड़ा। उसमें भी उन्हें सवा दो लाख वोट मिले। सियासी हवा का रुख भांपने में माहिर माने जाने वाले इमरान मसूद ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जनवरी 2022 को कांग्रेस को छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था। लेकिन, विधानसभा चुनाव के बाद सपा से दाल नहीं गली तो उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया।

गठबंधन में भी बढ़ सकती है इमरान की मुसीबत
बसपा के टिकट पर उन्होंने अपनी समधन खतीजा मसूद को चुनाव लड़ाया, लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा। हार के बाद से साफ हो गया था कि बसपा 2024 लोकसभा चुनाव में इमरान को टिकट देने के मूड में नहीं थी। ऐसे में बसपा के मूड को इमरान ने भांप लिया और उनका रुख दोबारा से कांग्रेस की ओर हो गया। इसके बाद से वह कांग्रेस के गुणगान गाने लगे।

वैसे तो इमरान मसूद किसी भी पार्टी में शामिल न होने की बात कह रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं के संपर्क में वह लगातार अभी भी है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन के टिकट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन गठबंधन में कांग्रेस ही नहीं, बल्कि सपा और अन्य दल हैं। जो इमरान को कहीं न कहीं नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो वह निर्दलीय चुनाव भी लड़ सकते हैं।

बिना जूतों के मायावती के कक्ष में पहुंचकर इमरान मसूद ने आशीर्वाद लिया था।

बिना जूतों के मायावती के कक्ष में पहुंचकर इमरान मसूद ने आशीर्वाद लिया था।

जूते गेट पर निकालकर बहनजी के पास पहुंचे थे इमरान
बसपा जॉइन करने के लिए इमरान मसूद अपने समधी शाजान मसूद और दामाद शायान मसूद और अपने समर्थकों के साथ 18 अक्टूबर, 2022 को लखनऊ पहुंचे थे। 19 अक्टूबर को बसपा सुप्रीमो मायावती से उनकी भेंट हुई। बिना जूतों के मायावती के कक्ष में पहुंचकर इमरान मसूद ने आशीर्वाद लिया।

लेकिन, जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था, तब भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक शशि बाला पुंडीर का भी एक बयान आया था। जिसमें उन्होंने भस्मासुर जैसा हाथ कहा था। उन्होंने कहा था, मायावती सिर पर हाथ रखकर सब खींच लेती हैं।

इमरान 10 महीने रहे हाथी के महावत
निकाय चुनाव से पहले इमरान मसूद 2022 के विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही जनवरी में कांग्रेस छोड़कर पहले सपा के सारथी बने थे, लेकिन 9 माह के भीतर ही उनका पार्टी से मोह भंग हो गया और उन्होंने सपा को अलविदा कह दिया। वह हाथी के महावत बन गए। लेकिन 10 माह भी वह हाथी के महावत भी नहीं बनकर रह सके।

यह भी पढ़ें-

बसपा ने इमरान मसूद को पार्टी से निकाला:बोले-सच बोलना अगर अनुशासनहीनता है तो मंजूर है; भाई नौमान मसूद को भी किया बाहर

बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को इमरान मसूद को पार्टी से बाहर कर दिया है। उन पर अनुशासनहीनता करने का आरोप है। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने कहा, “अगर सच बोलना अनुशासनहीनता है तो मंजूर है।” इसके बाद देर रात बसपा ने इमरान मसूद के भाई नौमान मसूद को भी निष्कासित कर दिया। नौमान बसपा के टिकट पर गंगोह विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें

Back to top button