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रेलवे बोर्ड ने समझाया कैसे हुआ हादसा:खड़ी मालगाड़ी से टकराई थी कोरामंडल एक्सप्रेस, बोगियां उछलकर तीसरे ट्रैक पर गिरीं; इनसे बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट भिड़ी

ट्रेन की ओवरस्पीड ओडिशा हादसे की वजह नहीं:केवल एक ट्रेन का एक्सीडेंट हुआ, रेलवे ने समझाई हादसे की क्रोनोलॉजी

बालासोर2 महीने पहले

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रेलवे बोर्ड ने बताया कि तीन ट्रेन नहीं बल्कि सिर्फ एक ट्रेन कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई है। - Dainik Bhaskar

रेलवे बोर्ड ने बताया कि तीन ट्रेन नहीं बल्कि सिर्फ एक ट्रेन कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई है।

2 जून की शाम को ओडिशा के बालासोर में ट्रेन हादसा कैसे हुआ? इस सवाल का जवाब रेलवे बोर्ड ने डिटेल में दिया है। बोर्ड ने बताया कि तीन ट्रेन नहीं बल्कि सिर्फ एक ट्रेन कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई है। कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रैक पर खड़ी मालगाड़ी से टकराई, फिर बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट कोरोमंडल की बोगियों में भिड़ गई।

जहां हादसा हुआ, उस लाइन पर रफ्तार की सीमा 130 KM प्रति घंटा है और दोनों ट्रेन तय स्पीड में ही चल रही थीं। हादसा सिग्नलिंग में आई परेशानी के कारण हुआ है। हादसे में 275 लोगों की मौत हुई है और 1000 से ज्यादा लोग घायल हैं।

5 पॉइंट में जानिए रेलवे ने हादसे पर क्या बताया…

1. कैसे हुआ हादसा
2 जून की शाम शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस चेन्नई से हावड़ा जा रही थी। वहीं, बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस हावड़ा से आ रही थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस को लूप लाइन पर ग्रीन सिग्नल मिला, जिस पर मालगाड़ी खड़ी थी। इसके बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस मालगाड़ी से टकरा गई। मालगाड़ी में लोहा लदा था, इसीलिए वह हादसे का धक्का झेल गई।

उधर, मालगाड़ी से टकराने के बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे तीसरे ट्रैक पर जा गिरे। इसके बाद उसी ट्रैक पर आ रही बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस कोरोमंडल की बोगियों से टकरा गई।

2. दोनों ट्रेन ओवरस्पीड नहीं थीं
कोरोमंडल एक्सप्रेस 128 KM प्रति घंटे की रफ्तार से जा रही थी। दूसरी ट्रेन बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस 126 KM प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। इस लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार की सीमा 130 KM प्रति घंटा है, इसलिए दोनों में से कोई भी ट्रेन ओवरस्पीडिंग में नहीं थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस को हरी झंडी मिली थी। ग्रीन सिग्नल का मतलब ड्राइवर (लोको पायलट) को बताना होता है कि आगे का रास्ता साफ है और वह अपनी अनुमत अधिकतम गति के साथ आगे जा सकता है।

रविवार दोपहर तक 100 शवों की शिनाख्त के लिए कोई नहीं पहुंचा था, इसके बाद इन शवों को भुवनेश्वर भेज दिया गया।

रविवार दोपहर तक 100 शवों की शिनाख्त के लिए कोई नहीं पहुंचा था, इसके बाद इन शवों को भुवनेश्वर भेज दिया गया।

3. सिग्नलिंग में आई परेशानी हादसे की वजह
बोर्ड ने बताया कि अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक सिग्नलिंग में आई परेशानी के कारण ये हादसा हुआ। इस मामले पर अभी ज्यादा कुछ कहना जल्दबाजी होगी। जांच के बाद ही डिटेल सामने आएगी, उसके बाद ही दावे के साथ कुछ कहा जा सकेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव की वजह से एक्सीडेंट हुआ।

4. सिर्फ एक ट्रेन हादसे का शिकार हुई
रेलवे बोर्ड की सदस्य जया वर्मा सिन्हा ने जोर देते हुए कहा कि सिर्फ एक ही ट्रेन (कोरोमंडल एक्सप्रेस) दुर्घटना का शिकार हुई है, ना कि तीन ट्रेन। जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है। हादसा बालासोर बहनागा बाजार स्टेशन के पास हुआ। यह चार लाइन स्टेशन है, जिसमें बीच में दो मुख्य लाइनें और आसपास दो लूप लाइनें हैं। लूप लाइनों पर मालगाड़ियां खड़ी होती हैं।

हादसे में जान गंवाने वालों की तस्वीरें जारी की गई हैं, जिससे लोग शव की पहचान कर सकें।

हादसे में जान गंवाने वालों की तस्वीरें जारी की गई हैं, जिससे लोग शव की पहचान कर सकें।

5. सिग्नल फेल होने की दो वजह हो सकती हैं
रेलवे बोर्ड के प्रिंसिपल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर संदीप माथुर ने बताया कि लूप लाइन पर ट्रेन को ले जाने के लिए एक पॉइंट होता है। उसे ऑपरेट करना होता है, जिससे यह तय किया जाता है कि ट्रेन सीधी जाएगी या लूप लाइन पर जाएगी।

वहीं, सिग्नल इस तरीके से इंटरलॉक होते हैं कि जिससे पता चल जाए कि आगे की लाइन बिजी नहीं है और ट्रेन लूप लाइन पर जा रही है। ट्रेन को सुरक्षित तरीके से ट्रैक पर ले जाने के लिए यह बेहद अहम होता है। सिग्नलिंग की दिक्कत तब आती है, जब रेलवे की जानकारी के बिना ट्रैक पर कोई काम करता है। इससे कई बार केबल कट जाने से सिग्नल फेल होने की संभावना रहती है। वहीं, दूसरा कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है।

लोगों की मदद के लिए नंबर जारी किया
रेलवे बोर्ड ने कहा कि हमारा हेल्पलाइन नंबर 139 उपलब्ध है। यह कोई कॉल सेंटर नंबर नहीं है, हमारे सीनियर अधिकारी लोगों के फोन कॉल का जवाब दे रहे हैं। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। घायल या मृतक के परिवार के सदस्य हमें फोन कर सकते हैं। हम फोन करने वाले शख्स को उसके परिवार के सदस्य (जो ट्रेन में सवार था) से मिलने में मदद करेंगे।

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