POLITICS

राहुल का द‍िल ठीक जगह पर, लेक‍िन है एक द‍िक्‍कत…

कांग्रेस में इंद‍िरा, राजीव और सोन‍िया गांधी के नेतृत्‍व में क्‍या अंतर रहा, इस सवाल का जवाब मनमोहन स‍िंह के नेतृत्‍व वाली UPA सरकार में कानून मंत्री रहे (Law Minister) अश्विनी कुमार (Ashwani Kumar) ने द‍िया है। कुमार इंद‍िरा गांधी के जमाने में (साल 1976) में गुरदासपुर ज‍िला कांग्रेस के नेता बने थे और उन्‍होंने राजीव व सोन‍िया गांधी के नेतृत्‍व में कांग्रेस में अहम पदों पर काम क‍िया। फरवरी, 2022 में उन्‍होंने कांग्रेस (Congress) से इस्तीफा दे दिया था।

जनसत्ता डॉट कॉम के चैट शो ‘बेबाक’ में अश्विनी कुमार ने नेहरू-गांधी परिवार के इन शीर्ष नेताओं से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे जनसत्ता डॉट कॉम के संपादक विजय कुमार झा के सवालों का जवाब देते हुए कुमार ने बताया कि इंदिरा गांधी की सबसे बड़ी खूबी थी क‍ि वह देश का नब्ज पहचानती थीं, राजीव गांधी में लोगों को सम्‍मोह‍ित कर लेने की खास‍ियत थी और सोन‍िया गांधी दृढ़ न‍िश्‍चय लेने वाली मह‍िला हैं जो पर्दे के पीछे रह कर पार्टी को मजबूत करने में व‍िश्‍वास रखती हैं। राहुल गांधी के बारे में उनकी राय थी क‍ि उनका व‍िजन आदर्शों से भरा है, लेक‍िन इसे जनता तक पहुंचाने में वह सफल नहीं हो पा रहे।

किस तरह देश का नब्ज़ पकड़ती थीं इंदिरा गांधी?

इंदिरा गांधी को कद्दावर नेता बताते हुए अश्विनी कुमार कहते हैं- पंडित जी (जवाहरलाल नेहरू) के बाद इंदिरा गांधी से बड़ा कोई नेता कांग्रेस पार्टी में हुआ नहीं। उनका स्वभाव बहुत स्पष्ट था। वह जिस तरह लोगों की नब्ज़ को समझती थीं। वह बहुत कम लोग समझ सके हैं। उसका कारण यह था कि वह हर रोज दफ्तर जाने से पहले सुबह आठ से नौ बजे तक कम से कम 200-300 लोगों से मिलती थीं। इसमें आम लोग होते थे, पार्टी के बड़े और छोटे नेता होते थे, वकील, व्यापारी, डॉक्टर आदि भी होते थे। इससे उन्हें देश की नब्ज़ पता चलती थी।

जिस वक्त उन्होंने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया, उस वक्त उन्होंने समझ लिया था कि देश में लोगों के बीच यह अहसास है कि गरीबी से लड़ाई कैसे हो। इसलिए उन्होंने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया, बैकों का राष्ट्रीयकरण किया, यह सब उनके फ़लसफ़ा का हिस्सा था। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इंदिरा जी फ्रीडम स्ट्रगल और मॉडर्न कांग्रेस के बीच की एक कड़ी थीं।

उन्होंने अपने पिता को एक कद्दावर नेता के तौर पर देखा था। लेकिन जब वह राजनीति में आईं, तो उन्हें सिंडिकेट (कांग्रेस के ओल्डगार्ड्स) से लड़ाई करनी पड़ी। फिर लोगों में वह इतनी लोकप्रिय हुईं कि उनकी बात पर ही कांग्रेस चलती थी। उन्होंने कितने वर्षों तक कांग्रेस को अपने कंधों पर चलाया।

पूरा इंटरव्यू-

‘राजीव गांधी लोगों को मोह लेते थे’

राजीव गांधी के बारे में अश्विनी कुमार कहते हैं- राजीव गांधी ने बहुत दुखद परिस्थितियों (इंदिरा गांधी की हत्या के बाद) में कांग्रेस की कमान संभाली। लेकिन लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया, बहुत सम्मान दिया। राजीव गांधी का कमाल यह था कि अगर कोई उनसे एक बार मिल लेता था तो उनका भक्त और दोस्त बन जाता था। वह बहुत सरल स्वभाव के थे। मैंने उनमें गुस्सा कभी देखा ही नहीं। उनको मिलने से ही दिल खुश हो जाता था।

राजीव के जमाने को याद करते हुए अश्‍व‍िनी कुमार ने बताया- वह बहुत रैशनल स्पीच देते थे। तब हम बहुत जूनियर हुआ करते थे। लेकिन उनके करीबियों को सुझाव दिया करते थे कि वह राजीव गांधी को इमोशनल स्पीच देने के लिए कहें। तब हमें जवाब मिलता था कि वह बहुत साइंटिफिक माइंडसेट के व्यक्ति हैं, वो रैशनल बात ही करेंगे।

सोनिया गांधी न‍िर्णय लेकर अटल रहने वाली मह‍िला

अश्विनी कुमार ने बताया कि उन्होंने सबसे ज्‍यादा नजदीक से सोनिया गांधी के साथ ही काम किया है। कांग्रेस के लिए सोनिया गांधी की सोच को बताते हुए कुमार कहते हैं- उन्होंने हमेशा खुद को पीछे रखकर कांग्रेस को आगे बढ़ाने की कोशिश की। कभी भी उनका मन प्रधानमंत्री बनने का नहीं था। जब वह कोई फैसला कर लेती थीं, फिर किसी प्रेशर में आकर उसे बदलती नहीं थीं। यह उनकी खूबी रही है। सोनिया गांधी में एक सेंस ऑफ लॉयल्टी थी। अगर आप उनसे कभी अपने परिवार की बात करें, या कोई पर्सनल बात बताएं तो वह बहुत नरमी से सुनती थीं और समझती थीं।

पिछले दिनों उन्होंने खुद को पीछे करने फैसला किया। उनका मानना है कि अब नई जनरेशन को आगे आना चाहिए। इस फैसले का नुकसान भी हुआ और फायदा भी हुआ है।

राजीव और राहुल गांधी में अंतर?

इस सवाल के जवाब में अश्विनी कुमार ने कहा- राजीव गांधी और राहुल गांधी में बहुत ज्यादा फर्क है। राहुल गांधी का हृदय ठीक जगह पर है। वह आदर्शवादी हैं। उनका मानना है कि सत्ता में आने के लिए चाहे मुझे तीस साल लड़ना पड़े, मैं संघर्ष करूंगा। यह ठीक बात भी है। लेकिन वह अपनी बात लोगों तक कैसे पहुंचाएंगे, यह उन्हें देखना है। लेकिन राजीव गांधी में जो दोस्त बनाने की शक्ति थी, वह अजीब ही थी। राजीव में लोगों को मोह लेने की एक खास क्षमता थी।

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