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मोदी सरकार ने अपना प्रचार करने में 5 सालों में खर्चे 3700 करोड़ रुपये से ज्यादा

Anurag Thakur in Rajya Sabha: अनुराग ठाकुर ने एक लिखित जवाब में इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच सालों के दौरान केंद्र सरकार का विज्ञापन औ प्रचार पर खर्च नहीं बढ़ा है।

Modi Government Expense on Advertisement: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने पिछले पांच सालों के दौरान विज्ञापन (Advertisement) पर 3,723 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। राज्य सभा (Rajya Sabha) में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर (IB Minister Anurag Thakur) ने एक लिखित जवाब (Written) में इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच सालों के दौरान केंद्र सरकार (Centeral Government) का विज्ञापन औ प्रचार पर खर्च नहीं बढ़ा है। केंद्र सरकार के दिए गए आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में विज्ञापन पर 1220.89 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं इसके अगले साल 1,106.88 करोड़ रुपये खर्च हुए।

Anurag Thakur ने दिया केंद्र सरकार के खर्च का ब्योरा

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आगे बताया कि साल 2019-20 में सरकार ने 627.67 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए। वहीं साल 2020-21 में मोदी सरकार ने विज्ञापनों पर 349.09 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बाद साल 2021-22 में 264.78 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने विज्ञापनों पर खर्च किए गए। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में नौ दिसंबर तक केंद्र सरकार ने विज्ञापनों पर 154.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

बिहार में जहरीली शराब (Denatured Alcohol) को लेकर BJP सांसदों का हंगामा

उच्च सदन में बिहार में जहरीली शराब को लेकर हुई मौतों को लेकर बीजेपी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। बीजेपी सांसदों ने इसे सामूहिक हत्या (Massacre) करार दिया। इस घटना के पीछे बीजेपी सांसदों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है। बीजेपी सांसदों ने इस मामले पर केंद्र से तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। बीजेपी सांसदों के हंगामे की वजह से उच्च सदन महज 40 मिनट में 3 बार स्थगित किया गया।

अरुणाचल प्रदेश के तवांग (Tawang ) में चीनी सैनिकों की झड़प का मुद्दा गूंजा

वहीं इसके पहले राज्यसभा में अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर (Tawang Sector) में चीनी सैनिकों के साथ भारतीय जवानों (Indian Army) की झड़प के मामले पर जमकर हंगामा हुआ था। विपक्षी नेताओं ने सदन में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी। आपको बता दें कि इसके पहले इस मांग पर केंद्र द्वारा चर्चा न होने पर बुधवार (14 दिसंबर) को सदन से विपक्षी दल के सदस्यों ने वाकआउट कर दिया था।

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