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मॉब लिंचिंग पूर्वाग्रह को एक समानता की मांग:SC ने याचिका स्वीकार की; दावेदार बोले

नई दिल्ली2 दिन पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने क्राइम और मॉब लिंचिंग से नफरत की और सभी पूर्वाग्रहों को एक ही नज़र में रखते हुए एक याचिका दायर की। ये याचिका ‘इंडियन मुस्लिम फॉर प्रोग्रेस एंड रिफॉर्म्स’ (IMPAR) भड़का रही थी, जिसे कोर्ट ने शुक्रवार को स्वीकार कर लिया। इस मामले में सुनवाई 8 हफ्ते बाद होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सेंटर, स्टेट और स्कोर स्वतंत्र प्रदेशों की दावेदारी से इस याचिका पर जवाब मांगा है।

धर्म के आधार पर दिया जाता है अज्ञानी: याचिकाकर्ता
याचिका में कहा गया है कि राज्य देने के मामले में भेदभावपूर्ण और मनमाना रवैया अपनाते हैं। अन्य सभी को उनके धर्म के नजरिए से देखा गया। कई मामलों में जब पीड़ित दूसरे धर्मों से थे तो बुलडोजर गया। वहीं, अल्पसंख्यक समुदायों की धारणाएं काफी हद तक तुलना की गईं।

पिछले साल 28 जून को टेलर कन्हैया लाल साहू के दो लोगों ने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मर्डर कर दिया था।  उसने मर्डर का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाला था।

पिछले साल 28 जून को टेलर कन्हैया लाल साहू के दो लोगों ने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मर्डर कर दिया था। उसने मर्डर का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाला था।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि टूटने में कन्हैया लाल की हत्या हुई थी। इसे क्राइम माना गया। इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री ने पीड़ित के परिवार वालों से मुलाकात की थी और 51 लाख रुपये दिए थे। एक ही साथ पीड़ित के दो बेटों को सरकारी नौकरी भी मिल गई।

उरद्र, 17 फरवरी को एक कार में अल्पसंख्यक समुदाय के दो लोगों की जली हुई बॉडीज मिली थी। इस मामले में सरकार ने सिर्फ 5 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। ये लेख 14 और 15 का उल्लंघन है।

यूनिफॉर्म कंपनियां बनाने की मांग करती हैं
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील जावेद शेख ने सर्वोच्च न्यायालय से राज्यों को एक यूनिफॉर्म कंपनियों को लेने के निर्देश देने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के हिसाब से योजनाएं बनाई हैं, लेकिन इनमें कोई समानता नहीं है। वहीं, कई राज्यों ने अभी तक ऐसी कोई योजना नहीं बनाई है।

जब भीड़ मिलकर किसी की हत्या करती है तो उसे मॉब लिंचिंग कहा जाता है।

जब भीड़ मिलकर किसी की हत्या करती है तो उसे मॉब लिंचिंग कहा जाता है।

4 हफ्ते के अंदर जवाब देना होगा
जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की निर्णय ने उभरने से कहा कि वे 4 सप्ताह के भीतर हलफानामा दिखा रहे हैं कि वे भीड़ को लिंचिंग करने के लिए राहत देने की योजना बनाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के तहसीन पूनावाला मामले में ऐसी योजना बनाने का निर्देश दिया था।

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