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मणिपुर हिंसा की एक वजह अवैध प्रवासियों की लगातार होती एंट्री, लेकिन सरकार ने क्या कदम उठाया?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने 29 मई को मणिपुर का दौरा किया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को सभी ‘अवैध आप्रवासियों’ की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी किए। इसके बाद मणिपुर में जिला आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को केंद्रीय अधिकारियों की मदद से म्यांमार के अप्रवासियों का बायोमेट्रिक डेटा इकठ्ठा करने का निर्देश दिया गया।

NCRB की टीम ने इंफाल का किया दौरा

कुछ दिन पहले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की एक टीम आखिरकार इम्फाल पहुंची और सजीवा जेल में रखे गए अप्रवासियों के डाटा इकठ्ठा किये। अधिकारियों ने कहा है कि अगले चरण में आंतरिक क्षेत्रों में अप्रवासियों की पहचान करना शामिल होगा और डेटा कलेक्शन 30 सितंबर तक पूरा किया जाएगा।

कुछ दिन पहले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक टीम आखिरकार इम्फाल पहुंची, और राजधानी शहर के सजीवा जेल में रखे गए अप्रवासियों के दस्तावेजीकरण में स्थानीय अधिकारियों की सहायता की। अधिकारियों ने कहा है कि अगले चरण में आंतरिक क्षेत्रों में अप्रवासियों की पहचान करना शामिल होगा, डेटा का संग्रह 30 सितंबर तक पूरा किया जाएगा।

यह प्रक्रिया आदिवासी क्षेत्रों में कैसे की जाएगी, जहां वर्तमान में सरकारी सिस्टम के प्रति अत्यधिक अविश्वास है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। मणिपुर में हिंसा पर केंद्र काफी हद तक चुप है। हालांकि राज्य की भाजपा सरकार ने कथित तौर पर कुकियों की मदद से मणिपुर में प्रवेश करने वाले ‘अवैध प्रवासियों’ को मौजूदा हिंसा का एक कारण बताया है।

म्यांमार से अप्रवासियों का आना बड़ा मुद्दा

म्यांमार से अप्रवासियों का आना (जहां दो साल पहले एक सैन्य कार्रवाई के बाद से पलायन देखा) मणिपुर में कोई नया मुद्दा नहीं है। न ही मैतेई समुदाय इन अवैध अप्रवासियों (विशेषकर कुकी) को आश्रय देते हैं। हालांकि 3 मई को मणिपुर में हिंसा भड़कने से पहले, न तो राज्य और न ही केंद्र ने इस मुद्दे के समाधान के लिए कभी गंभीर कदम उठाए। घुसपैठ के वर्षों के आरोपों के बावजूद आप्रवासियों की पहचान करने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया गया।

यह प्रक्रिया आदिवासी क्षेत्रों में कैसे की जाएगी, जहां वर्तमान में राज्य मशीनरी के प्रति अत्यधिक अविश्वास है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। मणिपुर में हिंसा पर केंद्र काफी हद तक चुप है, अवैध प्रवासियों के संबंध में उसके निर्देशों से एक बात स्पष्ट हो जाती है: जहां तक ​​राज्य में “आमदमी” का सवाल है, राज्य और केंद्र सरकारें एक ही पृष्ठ पर हैं। राज्य की भाजपा सरकार ने कथित तौर पर कुकियों की मदद से मणिपुर में प्रवेश करने वाले “अवैध प्रवासियों की लहर” को मौजूदा हिंसा का एक कारण बताया है।

वहीं इसकी तुलना पड़ोसी मिज़ोरम से करें तो यह एक ऐसा राज्य है जिसके लोगों का म्यांमार के कुकी-चिन लोगों के साथ घनिष्ठ जातीय संबंध भी है। 1960 के दशक में राज्य में उग्रवाद के चरम पर रहने के दौरान कई मिज़ो लोग म्यांमार चले गए। पिछले कुछ वर्षों में म्यांमार में अशांति फैलने के दौरान सीमा पार से लोग शरण लेने के लिए राज्य में प्रवेश करते हैं और स्थिति सामान्य होने पर ही वापस लौटते हैं।

अवैध अप्रवासियों का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं

मणिपुर में राज्य सरकार के ‘हजारों अवैध अप्रवासियों’ के दावे के बावजूद इनकी कोई संख्या उपलब्ध नहीं है। मई में राज्य मानवाधिकार आयोग ने नोट किया कि चुराचांदपुर जिले के एक हिरासत केंद्र में म्यांमार के 35 नागरिकों को रखा गया था, जिन्हें दोषी ठहराया गया था और उनकी हिरासत अवधि से काफी पहले जेल में रखा गया था। आयोग ने मणिपुर के अधिकारियों को इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाने का निर्देश दिया, लेकिन इस पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

मणिपुर में अवैध आप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई में समस्या पिछले साल से स्पष्ट हो गई है जब राज्य सरकार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में अतिक्रमणकारियों को हटाने की प्रक्रिया के तहत अभियान शुरू किया था। इस साल की शुरुआत में जब यह अभियान चुराचांदपुर के गांवों में पहुंचा, तो राज्य के अधिकारियों और लोगों के बीच गतिरोध उत्पन्न हो गया, जिसके कारण तनाव शुरू हुआ। इसे मौजूदा हिंसा के लिए भी जिम्मेदार माना गया है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि ये क्षेत्र कुकी-ज़ोमी प्रभुत्व वाले थे।

मैतेई बहुल भूमि (राज्य के कुल क्षेत्रफल का 10%) पहाड़ों के बीच में स्थित है, जिस पर आदिवासी समुदायों (शेष 90%) का कब्जा है। बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए राज्य में इनर लाइन परमिट के कार्यान्वयन की मैतेई की मांग को मोदी प्रशासन ने 2019 में पूरा किया। इसके खिलाफ चुराचांदपुर की कुकी-ज़ोमी जनजातियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ झड़पों में नौ मौतें हुईं। इस साल मार्च में राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर गौर करने के लिए एक कैबिनेट समिति का भी गठन किया, जिसने दावा किया कि हिंसा शुरू होने तक 2,500 अवैध अप्रवासियों की पहचान की गई थी।

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