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मणिपुर में जारी हिंसा के बीच बड़ा उलटफेर, बीरेन सरकार से कुकी पीपुल्स अलायंस ने वापस लिया समर्थन

Manipur Violence: मणिपुर में जारी हिंसा के बीच रविवार को एनडीए सहयोगी कुकी पीपुल्स एलायंस (केपीए) ने मणिपुर में एन बीरेन सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। मणिपुर विधानसभा में कुकी पीपुल्स अलायंस के दो विधायक हैं। मणिपुर विधानसभा में भाजपा के 32 सदस्य हैं, जबकि उसे पांच एनपीएफ विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। विपक्षी विधायकों में एनपीपी के सात, कांग्रेस के पांच और जदयू के छह विधायक शामिल हैं। केपीए का सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर निकलने का निर्णय ऐसे समय में आया है जब पूरा राज्य हिंसा की चपेट में है।

केपीए के अध्यक्ष तोंगमांग हाओकिप हैं। उनकी पार्टी कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) 18 मार्च, 2022 को मणिपुर में सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपना समर्थन दिया था। उन्होंने उस वक्त अपने दो नवनिर्वाचित विधायकों किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग और चिनलुनथांग के साथ मणिपुर के राज्यपाल ला गणेशन को अपना समर्थन पत्र सौंपा था। हैंगशिंग कांगपोकपी जिले के सैकुल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि चिनलुनथांग चुराचांदपुर जिले के सिंघाट निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे।

दो सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने किया था केपीए का गठन

केपीए की स्थापना मणिपुर में कुकी जनजाति के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो सेवानिवृत्त नौकरशाहों एक प्रैक्टिसिंग डॉक्टर और एक वकील द्वारा की गई थी। राज्य में हुए विधानसभा चुनावों से कुछ हफ्ते पहले, साल 2022 के जनवरी महीने में चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा इसे एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी गई थी। पार्टी ने केवल दो उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। जिनमें से दोनों ने जीत दर्ज की थी। केपीए की जीत को मणिपुर के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में देखा जाता है, जहां आदिवासी आकांक्षाएं प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

राज्य में तीन महीने बाद बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र ने शनिवार को राज्य में 900 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को भेजा है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी की 10 और कंपनियां (900 जवान) को मणिपुर भेजा है। वे शनिवार रात राज्य की राजधानी इंफाल पहुंचे। इन्हें पूर्वोत्तर राज्य के कई जिलों में तैनात किया जा रहा है।

वहीं राज्य में महिलाओं को नग्न करके घुमाने के मामले में पुलिस-प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने उस क्षेत्र के थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जहां 4 मई को भीड़ द्वारा दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की घटना हुई थी। अधिकारियों ने रविवार इस बात की जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि 19 जुलाई को घटना का वीडियो सामने आया था। इस घटना के तुरंत बाद मणिपुर पुलिस ने थौबल जिले के नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी और चार अन्य पुलिस कर्मियों को निलंबित करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई तुरंत की गई और बहुसंख्यक समुदाय (मैतई) के कुछ वर्गों द्वारा उनकी बहाली के लिए रोजाना विरोध प्रदर्शन के बावजूद इसे वापस नहीं लिया गया।

तीन महीने से जल रहा मणिपुर

मणिपुर में हिंसा की शुरुआत करीब 3 महीने पहले मई में हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक हिंसा में 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों से ज्यादा लोग घायल हैं। 60000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। हिंसा में सैकड़ों गांव तबाह हो चुके हैं। मणिपुर में संघर्ष कोई नई बात नहीं है। मैतेई, कुकी और नागा समुदाय के लड़ाके दशकों से एक-दूसरे से जमीन से लेकर धार्मिक मुद्दों पर लड़ते रहे हैं। इन तीनों समुदाय का भारतीय सेना के साथ भी संघर्ष हो चुका है। लेकिन मौजूदा हिंसा सिर्फ और सिर्फ दो समुदाय, मैतेई और कुकी के बीच की है। वहीं मणिपुर की आबादी करीबन 33 लाख है। जिसमें से 64.6 फीसदी लोग मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। जबकि 35.40 फीसदी आबादी कुकी, नागा और दूसरी जनजातियों की है। राज्‍य में 34 जनजात‍ियां रहती हैं।

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