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बीजेपी के इस नेता ने भी बेची है चाय, बांटते थे अखबार; आज अमित शाह की बदौलत भाजपा में है बड़ी हैसियत

केशव प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। इससे पहले परिवार का खर्च उठाने के लिए चाय और अखबार तक बेचा करते थे।

विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संभाल रहे हैं। इससे पहले सियासी गलियारों में बीजेपी के सीएम उम्मीदवार को लेकर चर्चा थी, लेकिन हाल ही में अमित शाह ने साफ कर दिया कि अगर यूपी में बीजेपी की सरकार बनती है तो सीएम योगी ही बनेंगे। लखनऊ में एक रैली के दौरान अमित शाह ने कहा था, अगर 2024 में नरेंद्र मोदी को पीएम बनाना है तो योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाइए।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से चुनाव को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने दो टूक कहा कि इस बार बीजेपी फूल के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। जबकि पहले माना जा रहा था कि चुनाव में बीजेपी का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ करेंगे। केशव प्रसाद मौर्य इससे पहले भी सीएम उम्मीदवार को लेकर कई ऐसे बयान दे चुके हैं, जिसकी खूब चर्चा भी हुई थी। आज भले ही केशव प्रसाद मौर्य को राजनीति का मंझा हुआ खिलाड़ी माना जाता है, लेकिन उन्होंने राजनीति में कदम रखने से पहले चाय और अखबार तक बेची थी।

बेची थी चाय: केशव प्रसाद मौर्य बचपन में अपने पिता की दुकान पर चाय बेचा करते थे। एक समय ऐसा भी आया था कि घर का खर्च चाय की दुकान से पूरा नहीं हो पाता था तो उन्होंने सब्जी और अखबार बांटना भी शुरू कर दिया था। कौशांबी जिले के सिराथू गांव के गरीब परिवार में जन्मे केशव प्रसाद मौर्य के जीवन में बदलाव राम मंदिर आंदोलन के बाद आया। इस दौरान वह आरएसएस के सक्रिय स्वंयसेवक थे और राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) जॉइन कर ली। यहां से वह राम मंदिर आंदोलन के साथ जुड़ गए और उनकी मुलाकात वीएचपी के प्रमुख अशोक सिंघल से हुई।

दो चुनाव हारे: केशव प्रसाद मौर्य की काबिलियत को देखते हुए उन्हें कई आंदोलनों का नेतृत्व सौंपा गया और उन्होंने अपना काम पूरी ईमानदारी से भी किया। अशोक सिंघल के कहने के बाद बाद में वह सक्रिय राजनीति में आ गए और साल 2004 में उन्हें इलाहाबाद पश्चिम से चुनाव लड़वाया गया। यहां से दो बार चुनाव लड़ने के बाद भी वह नहीं जीत सके। साल 2012 में सिराथू से चुनाव जीतकर वह विधानसभा पहुंचे और साल 2014 में उन्हें फूलपुर से लोकसभा टिकट मिल गया। फूलपुर से शानदार जीत हासिल कर वह लोकसभा पहुंचे।

अमित शाह के कहने के बाद केशव प्रसाद मौर्य को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी गई और पिछड़ों के चेहरे के रूप में उभरते मौर्य को साल 2016 में यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। साल 2017 के चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत हुई और पार्टी सरकार बनाने में सफल हुई। यही वजह थी कि इसके बाद उन्हें बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के चुनाव में पार्टी ने कई अहम जिम्मेदारी दी।

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