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‘फ्लाइंग किस’ मामले में हेमा मालिनी ने ईरानी का नहीं दिया था साथ, कहा

भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने सदन से बाहर निकलते समय राहुल गांधी के “फ्लाइंग किस” के खिलाफ भाजपा की कई महिला सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित विरोध पत्र पर सिग्नेचर करने से इनकार कर दिया। हस्ताक्षरित विरोध पत्र का अभियान स्मृति ईरानी ने शुरू किया था। मालिनी ने कहा कि उन्होंने राहुल का आपत्तिजनक इशारा नहीं देखा है। भाजपा पहले से ही मालिनी के इस बात से नाराज है कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में एकतरफा घोषणा कर दी है कि वह या तो मथुरा से चुनाव लड़ेंगी या फिर नहीं लड़ेंगी।

शाह ने बड़बोले सांसद को याद दिलाया ‘इंडिया शाइनिंग’

जिस तेजी से कांग्रेस और आप सीटों के बंटवारे पर समझौता हो रहा है, उससे भाजपा परेशान है। अमित शाह ने राजस्थान के एक वरिष्ठ सांसद पर तंज कसा, जिन्होंने हाल में कहा था कि भाजपा ने 2019 में 303 सीटें जीती थीं और इसलिए भले ही कुछ नुकसान हो, फिर भी हम 2024 में जीत जाएंगे।

शाह ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 2004 में “इंडिया शाइनिंग” अभियान का नेतृत्व करने वाले प्रमोद महाजन के ऐसे ही हास्यास्पद बयान पार्टी के पतन का कारण बने। सतर्क गृह मंत्री कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हाल ही में एक टीवी चैनल के लिए कराए गए सर्वेक्षण में एनडीए को 318 सीटें और ‘इंडिया’ को केवल 175 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई थी, लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनावों के लिए कराए गए सर्वेक्षण के परिणाम एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।

कांग्रेस-आप में बन रही है सहमति

कांग्रेस-आप के बीच सहमति तब बनी जब आप नेता अरविंद केजरीवाल ने सीधे सोनिया गांधी से बात की और आगाह किया कि अगर उन्होंने गठबंधन नहीं किया तो दोनों पार्टियों को 21 सीटें खोने का खतरा है। वह दिल्ली के सात, पंजाब के 13 और चंडीगढ़ के एक संसदीय क्षेत्र का जिक्र कर रहे थे। चूंकि सीट-बंटवारे को लेकर जूनियर नेताओं के बीच बातचीत नहीं हो रही थी, इसलिए केजरीवाल ने सुझाव दिया कि केवल शीर्ष नेताओं को ही सीट-बंटवारे पर चर्चा करनी चाहिए। कांग्रेस हरियाणा और गुजरात में भी आप को क्रमश: एक सीट दे सकती है।

राहुल गांधी ने एक फिर कांग्रेस को शर्मिंदा किया

संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस को शर्मिंदा होना पड़ा क्योंकि राहुल गांधी ने अपने कार्यालय सहित सभी को अंधेरे में रखा कि वह प्रस्ताव पर कब बोलेंगे। पार्टी ने सुबह 11.55 बजे लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया – प्रस्ताव दोपहर 12 बजे शुरू होना था – तय हुआ था कि राहुल बहस में पहले वक्ता होंगे। हालांकि, राहुल ने अचानक गौरव गोगोई से प्रस्ताव शुरू करने के लिए कहा।

अपनी शर्मिंदगी को छुपाने के लिए वरिष्ठ कांग्रेसियों ने राहुल की गैर-मौजूदगी के लिए कई स्पष्टीकरण दिए – खराब स्वास्थ्य से लेकर यह दावा करने तक कि वह केवल तभी बोलना चाहते थे जब तीसरे दिन पीएम उपस्थित होंगे। बहस के दूसरे दिन राहुल ने अपना भाषण देकर एक बार फिर अपनी पार्टी के सदस्यों को बैकफुट पर ला दिया। जब राहुल गांधी ने बोला तब नरेंद्र मोदी संसद में मौजूद नहीं थे। राहुल ने अपने लिए तैयार किए गए तथ्यों, आंकड़ों और बुलेट प्वाइंट्स के हिसाब से बोलने के बजाय तात्कालिक रूप से बोलने का विकल्प चुना।

शिंदे सेना ने भाजपा को दिखाया आईना!

आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अविश्वास मत में बीजेपी सरकार का समर्थन किया, लेकिन एक चेतावनी भरे संदेश के साथ। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने वैचारिक मतभेदों के बावजूद संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमेशा केंद्र सरकार का समर्थन किया है। लेकिन अगर बीजेपी 2024 में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के साथ गठबंधन पर विचार कर रही है, तो यह भविष्य में हमारे बीच जंग का कारण बनेगा।

आंध्र से 25 सांसद चुने जाते हैं। भाजपा को यह एहसास है कि राज्य में गठबंधन पर एक गलत निर्णय 2024 में केंद्र में सत्ता बरकरार रखने पर असर डाल सकता है। आंध्र में भाजपा अकेले बहुत मजबूत नहीं है। टीडीपी के साथ गठबंधन के फैसले को भाजपा ने जनवरी तक के लिए टाल दिया है।

शिंदे सेना ने उन दो सांसदों को अविश्वास मत पर नहीं उतारा जिनके नाम लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए थे। केवल सीएम के बेटे श्रीकांत शिंदे ने बात रखी। भाजपा ने जब इस बदलाव का कारण पूछा तो श्रीकांत ने स्पष्ट रूप से जवाब दिया कि उनकी पार्टी भी भाजपा की तरह अपनी बात पर कायम न रहने के उदाहरण को फॉलो कर रही है।

भाजपा के इस कदम से सुषमा स्वराज थीं हैरान

पत्रकार निधि शर्मा की नई किताब, ‘शी द लीडर: वीमेन इन इंडियन पॉलिटिक्स’ महिला राजनेताओं के बारे में अनकही कहानियां पेश करती है। उदाहरण के लिए, सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज इस लोकप्रिय धारणा की पुष्टि करती हैं कि उनकी मां को तब गहरा सदमा लगा था जब उन्हें 2019 में बिना किसी पूर्व चेतावनी के मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। शपथ ग्रहण के लिए जब वह राष्ट्रपति भवन पहुंचीं, तब भी स्वराज को उम्मीद थी।

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