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‘पुलिस को चुल्लूभर पानी में डूब मरना चाहिए, अगर मैं वहां होता तो लोग जनरल डायर को भूल जाते’

Manipur Violence: मणिपुर में कुकी समुदाय की दो महिलाओं को नग्न घुमाने और उनके साथ यौन उत्पीड़न करने का वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में आक्रोश है। इस हैवानियत ने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने उस जिले के डीएम, एसपी और राज्य के मुख्यमंत्री पर जमकर हमला बोला है।

पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने ‘आज तक’ से बात करते हुए कहा कि इस मामले में अभी तक कठोरतम कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पूरे पुलिस प्रशासन को चुल्लूभर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए। सिंह ने कहा कि जिन पुलिस कर्मियों के सामने हिंसा का यह तांडव हो रहा था, उनको आखिरी गोली तक हिंसा का सामना करना चाहिए था। साथ ही उनको यह दावा करना चाहिए था कि या तो हिंसा करने वाले रहेंगे या फिर हम रहेंगे, लेकिन पुलिस पूरे तांडव को नंपुसक बनी देखती रही। सिंह ने सवाल किया कि आपकी बहन या बेटी के साथ यह होता तो आप क्या करते?

विक्रम सिंह ने कहा, ‘अगर मैं वहां होता तो लोग जनरल डायर को भूल जाते। दरिंदगी करने वाले किसी महिला की तरफ आंख उठाकर देखने के काबिल नहीं रहते। सिंह ने कहा कि आतताइयों को जिंदा या मूर्दा लाना चाहिए था। पुलिस इसलिए नहीं है कि वह मूकदर्शक बनी रहे। अगर पुलिस ने दो महीने बाद एफआईआर की है तो इसकी क्या वजह रही। साथ ही कहा कि पुलिस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

पूर्व डीजीपी ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि उस जिले के डीएम-एसएसपी को बर्खास्त क्यों नहीं किया गया। विक्रम सिंह ने कहा कि पुलिस को तब तक बलप्रयोग करना चाहिए था, जब तक बलवाई भाग खड़े नहीं होते। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इसमें जरूर कोई न कोई मूकसहमति है। इस घटना के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

मणिपुर में 4 मई को हिंसा की आग भड़की थी। इस हिंसा में अब तक करीब 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग पलायन कर चुके हैं। हालांकि, जारी हिंसा के बीच में पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्य का दौरा किया था। इसके बाद उन्होंने मणिपुर के नेताओं से सर्वदलीय बैठक की थी, लेकिन अभी तक हिंसा का कोई समाधान नहीं निकाला जा सका।

मणिपुर में विवाद की जड़ क्या है?

मणिपुर में तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नागा और कुकी। कुकी और नागा आदिवासी समुदाय हैं। यह लोग करीब 90 फीसदी पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। राज्य में इनकी आबादी 40 फीसदी है। जबकि मैतेई समुदाय की राज्य में आबादी 53 फीसदी है। यह घाटी के मैदानी इलाकों में सिर्फ 10 फीसदी भाग निवास करते हैं। मैतेई समुदाय की मांग है कि 1949 से पहले उन्हें जनजाति माना जाता था। कुकी समुदाय मैतेई को जनजाति घोषित करने की कोशिश का विरोध कर रहा है, क्योंकि राज्य की 60 में से 40 सीटें मैतेई समुदाय के इलाकों से ही आती हैं। जहां मैतेई समुदाय की संख्या अधिक है। अगर इन्हें जनजाति का दर्जा मिला तो कुकी समुदाय को सरकारी नौकरी में मौके कम मिलेंगे।

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