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पंजाब में BJP नेता पर फ्रॉड की FIR:​​​​​​​मनप्रीत बादल ने वित्तमंत्री रहते रसूख से प्लॉट खरीदे; फर्जी नक्शा-बोली कराई, 2018 से थी साजिश

बठिंडा25 मिनट पहले

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पंजाब के CM भगवंत मान ने अपनी राजनीतिक पारी मनप्रीत बादल के साथ ही शुरू की थी, लेकिन बाद में वे AAP में चले गए और मनप्रीत कांग्रेस में शामिल हो गए। - Dainik Bhaskar

पंजाब के CM भगवंत मान ने अपनी राजनीतिक पारी मनप्रीत बादल के साथ ही शुरू की थी, लेकिन बाद में वे AAP में चले गए और मनप्रीत कांग्रेस में शामिल हो गए।

पंजाब में विजिलेंस ब्यूरो ने भाजपा नेता मनप्रीत बादल पर केस दर्ज कर लिया है। मनप्रीत बादल पर बठिंडा में प्लॉटों की खरीद-फरोख्त में फ्रॉड का आरोप है। मनप्रीत बादल पिछली अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकार में वित्तमंत्री थे। इसी दौरान यह का यह मामला है।

खास बात यह भी है कि पंजाब के CM भगवंत मान ने अपना राजनीतिक करियर मनप्रीत बादल की पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (PPP) से किया था। हालांकि बाद में मान आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए। वहीं मनप्रीत कांग्रेस में आ गए।

हालांकि पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सत्ता में नहीं आई तो मनप्रीत बादल अब भाजपा में शामिल हो गए। खास बात यह भी है कि उन पर केस दर्ज करवाने वाले पूर्व MLA सरूप चंद सिंगला भी भाजपा के ही नेता हैं। जो अकाली दल छोड़कर BJP में आए थे।

मनप्रीत बादल के अलावा उनके करीबी राजीव कुमार, विकास अरोड़ा, अमनदीप सिंह और बठिंडा डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) सुपरिटेंडेंट पंकज कालिया और ADC डेवलपमेंट बिक्रमजीत सिंह शेरगिल पर केस दर्ज किया गया है। इस मामले में कारोबारी विकास अरोड़ा और राजीव के अलावा शराब ठेके पर काम करने वाले अमनदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मनप्रीत बादल ने इस मामले में बठिंडा कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी है। जिसकी सुनवाई 26 सितंबर को होनी है।

मनप्रीत बादल पर दर्ज FIR की पूरी कहानी

वित्तमंत्री की वजह से अफसरों पर था प्रभाव
पूर्व MLA सरूप चंद सिंगला की शिकायत के बाद विजिलेंस ने इस केस की जांच की। जांच रिपोर्ट के मुताबिक मनप्रीत बादल 2018 और 2021 में राज्य के वित्त मंत्री थे। उनका बठिंडा डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) के लोकल अफसरों पर काफी राजनीतिक दबाव और प्रभाव था।

2018 से ही रची जा रही थी साजिश
साल 2018 से ही माडल टाउन फेज वन बठिंडा में टीवी टावर के नजदीक प्लाट को खरीदने के लिए साजिश रची जा रही थी। जिसके चलते पुडा के अफसरों-कर्मचारियों ने इन प्लाटों के अपने तौर पर जाली नंबर लगाए। फिर 2018 में ही ई-ऑक्शन के जरिए इवेंट क्रिएट करके बोली करवाना दिखाया गया।

बोली सिर्फ दिखावे के लिए कराई गई
मगर, ऑनलाइन ई-ऑक्शन पोर्टल पर बोली करवाते समय नक्शा अपलोड नहीं किया गया। प्लाटों की लोकेशन पता न लगने की वजह से किसी बोलीदाता ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। जिस वजह से ये जगह नहीं बिकी।

इससे साबित होता है कि बोली सिर्फ दिखावा करने के लिए कराई गई थी। 2018 में बोली करवाते समय 29 हजार 900 रुपए स्क्वायर मीटर रेट फिक्स किया गया था। साल 2021 के दौरान भी इसी रेट पर बोली कराई गई। इसका कारण यह बताया गया कि 2018 में कराई बोली में इन प्लाटों की बिक्री नहीं हुई।

मनप्रीत ने खरीदने थे प्लाट, 2 लोगों से कराई बोली
मनप्रीत बादल ने अपने पद का रसूख दिखाते हुए BDA के अफसरों-कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर 2021 में 17 सितंबर 2021 से 27 सितंबर 2021 तक कराई बोली में ई-ऑक्शन पोर्टल पर अपलोड नक्शे में प्लाटों की जगह कॉमर्शियल दिखाई गई। इनमें प्लाट के नंबर भी दर्ज नहीं किए गए।

जो प्लाट नंबर 725C (560 वर्ग गज) और 726 (1 हजार वर्ग गज) मनप्रीत बादल ने खरीदने थे, उनके बारे में सिर्फ राजीव कुमार, विकास अरोड़ा और अमनदीप सिंह को ही पता था। जिस कारण बोली के आखिरी दिन 27 सितंबर 2021 को उक्त तीनों ने एडवोकेट संजीव कुमार के जरिए बोली कराई।

मनप्रीत के विश्वासपात्रों के नाम पर हुई बोली
संजीव कुमार ने उक्त तीनों के लिए बोली लगाई। बोली लगाते समय दफ्तर के कंप्यूटर का इस्तेमाल किया गया। तीनों व्यक्तियों की बोली एक ही IP एड्रेस से लगी हुई थी। मनप्रीत बादल के विश्वासपात्र राजीव कुमार पुत्र सुभाष कुमार निवासी बठिंडा के नाम पर प्लाट 725-C और विकास अरोड़ा पुत्र मदन लाल निवासी बठिंडा के नाम पर प्लाट नंबर 726 की बोली एक ही रेट 30,348.5 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से हुई।

गैरकानूनी रूप से हुए इकरारनामे
जिसके बाद सिर्फ 100-100 रुपए के अष्टाम पर 4 अक्टूबर 2021 को मनप्रीत बादल ने उक्त व्यक्तियों के साथ प्लाट खरीदने के संबंध में इकरारनामा किए। जिसमें बतौर गवाह जसविंदर सिंह पुत्र हरदेव सिंह निवासी बाहोयात्री, बठिंडा और सुखमिंदर सिंह पुत्र किक्कर सिंह निवासी गांव मान मुक्तसर को रखा गया। इकरारनामे भी गैरकानूनी रूप से मिलीभगत कर किए गए थे।

इकरारनामे से पहले खरीद लिए अष्टाम
जांच रिपोर्ट के मुताबिक 4 अक्टूबर 2021 को भले ही इकरारनामे किए गए हों, लेकिन इसके लिए अष्टाम पहले ही 30 सितंबर 2021 को खरीद लिए गए थे। जबकि अलॉटमेंट लेटर बाद में 8 अक्टूबर 2021 को राजीव कुमार और विकास अरोड़ा के नाम पर जारी किए। इसी तरह अर्नेस्ट मनी भी मनप्रीत बादल के खाते से बोलीदाताओं के खाते के जरिए जमा करना भी आपसी मिलीभगत साबित करती है।

प्लॉटों के तथ्य छुपाए, मनप्रीत से भराए पैसे
प्लाट नंबर 725 के 2 कॉर्नर और प्लॉट के साइज के तथ्य भी बोली के समय छुपाए गए। उसके 41 लाख रुपए अलॉटमेंट लेटर जारी होने के बाद मनप्रीत बादल से भराए गए। मॉडल टाउन फेज वन में 1 हजार गज के प्लाट नंबर 726 की बोली 11 अप्रैल 2022 से 21 अप्रैल 2022 के बीच कराई गई।

इसकी रिजर्व कीमत 28,800 रखी गई थी। इसमें काफी लोगों ने हिस्सा लिया था। इसकी बोली 35 हजार 280 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से टूटी। करीब 6 महीने बाद प्लाट नंबर 727 शिकायत में दर्ज प्लाट नंबर 725C और 726 की कीमत से 5 हजार रुपए प्रति स्क्वायर मीटर महंगा बिका। इससे सरकार को 725C में 23.41 लाख और 726 में 41.80 लाख का घाटा हुआ।

असली लोकेशन पता न चले इसलिए जाली नक्शा अपलोड किया
इसके अलावा मॉडल टाउन फेज 2 में रिहायशी प्लाटों की बोली भी इन दोनों प्लाटों के साथ की गई। फेज टू की बोली में नक्शा सही अपलोड हुआ, लेकिन फेज वन में जाली नक्शा अपलोड किया गया। यह सब मिलीभगत से हुआ ताकि लोगों को प्लाट की असली लोकेशन का पता न चले और वह बोली में भाग न ले सकें।

सरकार को 65 लाख का नुकसान हुआ
मनप्रीत बादल ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए प्लाट लगभग रिजर्व कीमत पर ही अपने चहेतों के माध्यम से BDA अधिकारियों से मिलीभगत कर खरीद लिए। जिससे सरकार को 65 लाख का नुकसान हुआ। बोली करवाने से पहले बिक्रमजीत सिंह शेरगिल और पंकज कालिया सुपरिटेंडेंट ने मिलीभगत कर प्रबंधक अफसर बलविंदर कौर की जानकारी के बिना उनके डिजिटल सिग्नेचर से बोली अपलोड कर दी गई।

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