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पंजाब, महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा विदेश यात्रा छात्र: अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया पहली पसंद, 2025 तक संख्या 20 लाख पहुंच का अनुमान

नई दिल्लीएक घंटा पहले

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ग्लोबल एजुकेशन कॉन्फिडेंस में बियॉन्ड्स बेड एंड स्मालैनिकज-इंडियन डोर मोबिलिटी 2023 रिपोर्ट में रिसर्च करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2025 तक बीस लाख तक पहुंचने का अनुमान है।  - दैनिक भास्कर

ग्लोबल एजुकेशन कॉन्फिडेंस में बियॉन्ड्स बेड एंड स्मालैनिकज-इंडियन डोर मोबिलिटी 2023 रिपोर्ट में रिसर्च करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2025 तक बीस लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

हायर एजुकेशन को भारतीय अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। हालाँकि पिछले कुछ प्राचीन से भारतीय छात्र जर्मनी, किर्गिस्तान, आयरलैंड, सिंगापुर, रूस और फ्रांस भी शामिल हैं।

यह खुलासा रिपोर्ट बियॉन्ड बेड्स एंड स्मालिनज-टेलर इंडियन मोबिलिटी 2023 से हुई है। रिपोर्ट में दिल्ली में शुक्रवार (27 अक्टूबर) को ग्लोबल एजुकेशन कॉन्सेप्ट लॉन्च किया गया।

हायर एजुकेशन के लिए भारतीय छात्र अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले पहले नंबर पर हैं।

हायर एजुकेशन के लिए भारतीय छात्र अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले पहले नंबर पर हैं।

पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र
रिपोर्ट के अनुसार विदेश में हैयर एजुकेशन के लिए जाने वालों में पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र के अनुयायियों की संख्या सबसे अधिक है। विदेश जाने वालों में पंजाब से 12.5%, आंध्र प्रदेश-तेलंगाना से 12.5%, महाराष्ट्र से 12.5%, गुजरात से 8%, दिल्ली/एनसीआर से 8%, तमिलनाडु से 8%, कर्नाटक से 6% और बाकी 33% अन्य राज्यों से रहे।

2025 तक संख्या 20 लाख पहुंच का अनुमान
रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2019 में करीब 10 लाख 90 हजार भारतीय छात्रों ने विदेश में पढ़ाई की। इस आंकड़े में 2022 में 7 प्रतिशत का आकलन किया गया, जो लगभग 13 लाख 24 हजार छात्रों तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार यदि 15 प्रतिशत समूह की अभी तक पहुंच बनी हुई है, तो 2025 में आलेख में पढ़ें वाले भारतीय छात्रों की संख्या 20 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

विदेशी शिक्षा पर खर्च 7 हजार करोड़ डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2019 में भारतीय छात्रों ने विदेश में शिक्षा संस्थान पर 37 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए। 2022 डॉलर में 9% की बढ़ोतरी हुई और यह 47 अरब तक पहुंच गया। यदि यह क्षेत्र 14 प्रतिशत की स्थिर दर से बढ़ रहा है, तो भारतीय छात्रों का विदेशी शिक्षा पर खर्च 2025 तक 7 हजार करोड़ डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

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