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नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर रोग होने पर क्या करें और क्या न करें? नजरअंदाज करने से बढ़ सकती है मुश्किल

नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर रोग होने पर क्या करें और क्या न करें? नजरअंदाज करने से बढ़ सकती है मुश्किल

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग लिवर में सूजन की वजह से होता है.

नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) एक ऐसी स्थिति है जो मेटाबोलिक सिंड्रोम से जुड़ी हो सकती है. इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल और ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल मिलकर एनएएफएलडी में योगदान कर सकते हैं.

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नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग (एनएएफएलडी) किसी भी उम्र में हो सकता है. हालांकि, ये 40 और 50 की उम्र के लोगों में आम है. यह रोग लिवर में सूजन की वजह से होता है, जो आगे चलकर घाव का रूप ले सकता है. गंभीर मामलों में नॉन-अल्कोहल फैटी लीवर रोग से लिवर फेलियर और लिवर सिरोसिस हो सकता है. शराब पीने वालों में फैटी लीवर रोग विकसित होने का खतरा ज्यादा होता है. एनएएफएलडी एक ऐसी स्थिति है जिसका मेटाबोलिक सिंड्रोम से गहरा संबंध हो सकता है.

नॉन-अल्कोहल फैटी लीवर रोग को कैसे रोकें? | How To Prevent Non-alcoholic Fatty Liver Disease?

एक हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट नॉन-अल्कोहल फैटी लिवर रोग को रोकने में मदद करता है. आइडियली आपको ऐसे फूड्स खाने चाहिए जो सूजन को कम करते हैं और आपके शरीर के लिए इंसुलिन का उपयोग करना आसान बनाते हैं और स्थिति को उलटने में मदद कर सकते हैं.

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1. पत्तेदार साग: पत्तेदार साग को शामिल करने से फैटी लीवर को रोका जा सकता है. अध्ययनों से पता चला है कि ब्रोकोली को अपनी डाइट में शामिल करने से लीवर में फैट को रोका जा सकता है. अन्य पत्तेदार सब्जियां जैसे केल, पालक और ब्रसेल्स स्प्राउट्स फैटी लीवर को दूर रखने में मदद कर सकते हैं.

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Photo Credit: iStock

2. अपनी डाइट में सही प्रकार के फैट को शामिल करें: ग्लूकोज एक प्रकार की शुगर, एनर्जी के लिए कोशिकाओं द्वारा उपयोग की जाती है. इंसुलिन एक हार्मोन है जो पचे हुए भोजन से ग्लूकोज को कोशिकाओं में पहुंचाने में मदद करता है. फैटी लीवर रोग से पीड़ित लोग अक्सर इंसुलिन रिजिस्टेंस होते हैं, एक ऐसी स्थिति जिसमें इंसुलिन अच्छी तरह से काम नहीं करता है. कुछ फैट इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. इनमें अच्छे प्रकार के फैट जैसे ओमेगा -3 फैटी एसिड और एवोकाडो, ऑलिव ऑयल और नट्स जैसे मोनोअनसैचुरेटेड फैट शामिल हैं. फैटी लीवर रोग को रोकने के लिए डीप फ्राइड और प्रोसेस्ड फूड्स में मौजूद फैट से बचना चाहिए.

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3. लहसुन: अपने वजन घटाने और ब्लड प्रेशर को कम करने वाले गुणों के कारण, लहसुन फैटी लीवर रोग को रोकने में भी सहायक हो सकता है. अपनी डाइट में लहसुन को शामिल करने से एनएएफएलडी वाले लोगों में फैट कम हो सकती है.

4. सही प्रकार के कार्ब्स खाएं: रिफाइंड कार्ब्स से बचना चाहिए. फैटी लिवर को रोकने के लिए शुगरी फूड्स, मिठाइयां, पैक्ड फलों के रस, सॉस, पास्ता आदि से बचना चाहिए. आप साबुत गेहूं, बीन्स और दाल जैसे फाइबर वाली चीजें खा सकते हैं.

5. ग्रीन टी: ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो वजन कम करने में मदद कर सकते हैं और फैटी लीवर को भी दूर रख सकते हैं. वजन घटाने से लेकर कोलेस्ट्रॉल कम करने तक, ग्रीन टी के कई फायदे हैं जिन्हें आप मिस नहीं कर सकते.

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6. अपने पोषक तत्वों के सेवन पर नजर रखें: विटामिन डी का लो लेवल फैटी लीवर रोग ज्यादा गंभीर हो सकता है. सूरज की रोशनी में लगभग 10 मिनट बिताने के अलावा, आप कुछ विटामिन डी के लिए अपनी डाइट में डेयरी प्रोडक्ट्स को भी शामिल कर सकते हैं. पोटेशियम का लो लेवल भी एनएएफएलडी का कारण बन सकता है. सार्डिन, साल्मन और कॉड, केला, शकरकंद और एवोकैडो जैसी फिश पोटेशियम के अच्छे स्रोत हैं.

7. शराब से बचें: फैटी लीवर को दूर रखने का सबसे अच्छा तरीका शराब के सेवन से बचना है. इसके सेवन से हर हाल में बचना चाहिए.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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