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निठारी कांड में जांच के लूपहोल्स:CBI की वे 15 खामियां जिनकी वजह से बरी हो गए पंढेर और कोली

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नई दिल्ली2 घंटे पहलेलेखक: पवन कुमार

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दिसंबर 2006 में उजागर हुए सनसनीखेज निठारी हत्याकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। नोएडा के करीब निठारी गांव के पास सेक्टर 31 में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी नंबर डी-5 के पीछे बहने वाले नाले से पुलिस को कई नरकंकाल मिले थे।

ये कंकाल बच्चों और लड़कियों के थे। इस घटना के बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया गया था। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। कई महीनों तक मामले को लेकर अनेक किस्से-कहानियां आती रहीं। यहां कि आरोपियों पर ‘नरभक्षी’ होने तक के आरोप भी लगे।

सीबीआई ने निठारी कांड में 16 मामले दर्ज किए थे। इनमें घटना के केंद्र में रहे नोएडा स्थित बंगले (नंबर डी-5) के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ दो मुकदमों में ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि उसके नौकर सुरेंद्र कोली को 14 मामलों में फांसी की सजा मिली थी।

पुलिस तो पुलिस, सीबीआई ने भी जांच में कितनी ढिलाई बरती, यह इलाहाबाद हाईकोर्ट के सोमवार (16 अक्टूबर) के फैसले ने साबित कर दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की तमाम खामियों का विस्तार से जिक्र करते हुए न सिर्फ सीबीआई को आड़े हाथ लिया, बल्कि सुरेंद्र कोली को 12 केसों में दी गई फांसी की सजा और मोनिंदर पंढेर को 2 मामलों में दी गई फांसी की सजा को रद्द कर उन्हें संदेह का लाभ देकर मामलों से बरी कर दिया। सीबीआई ने अपनी जांच में जो लूपहोल्स बरते, उनका विश्लेषण इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से किया जा सकता है।

आइए जानते हैं कि सीबीआई ने जांच में कौन-कौन सी खामियां छोड़ दीं, जिससे आरोपी बरी हो गए…

1. सीबीआई का पूरा मामला पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी सुरेंद्र कोली के कबूलनामे पर आधारित था। इस मामले में सीबीआई ने आरोपी की गिरफ्तारी, संबंधित सबूतों की बरामदगी और कबूलनामे के पहलुओं की सीजर मेमो व इन्क्वेस्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए कानून के बुनियादी मानदंडों का पालन नहीं किया।

2. जब जांच एजेंसी ने सरेआम सुबह 9 बजे के करीब सबसे पहले सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया तो उस समय सड़क पर काफी भीड़ थी। गिरफ्तारी के समय एक तय कानूनी प्रक्रिया होती है कि गिरफ्तारी कानूनी ढंग से की गई है, इसके लिए सार्वजनिक गवाह मौके पर बनाया जाता है। मगर जांच एजेंसी ने सड़क पर मौजूद लोगों में से किसी को गवाह बनाने की जहमत नहीं उठाई।

3. मामले की शुरुआती जांच नोएडा के डीएसपी दिनेश यादव ने की थी। इस रैंक के अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि उसे गिरफ्तारी, पूछताछ और इकबालिया बयान व सबूत जुटाने इत्यादि की तय कानूनी प्रक्रिया की जानकारी होगी।

मगर इस मामले में तय कानूनी प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई थी। उन्होंने न पंचनामा तैयार कराया और न ही कोई सार्वजनिक गवाह बनाया। जबकि उनसे छोटी रैंक के सब इंस्पेक्टर छोटेलाल को बेसिक प्रक्रिया की जानकारी थी। उन्होंने उसी प्रक्रिया अनुरूप सबूत गढ़ने की कोशिश की। यह जांच एजेंसी की जांच में सबसे बड़ी खामी थी।

नोएडा के गांव निठारी की इसी कोठी में मोनिंदर पंधेर रहता था।

नोएडा के गांव निठारी की इसी कोठी में मोनिंदर पंधेर रहता था।

4. सीबीआई ने सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार करने वाले यूपी पुलिस के जिन दो पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया, उनके बयानों में ही तालमेल नहीं था।

5. गिरफ्तारी के अतिरिक्त सुरेंद्र कोली से पूछताछ और उसके इकबालिया बयान दर्ज करने के दौरान भी जांच एजेंसी ने कोई भी सार्वजनिक गवाह नहीं बनाया, जिससे कि यह साबित हो कि इकबालिया बयान खुद दिया था या फिर दबाव में अपराध कबूलने को मजबूर किया गया।

6. यूपी पुलिस ने कोई इन्क्वेस्ट रिपोर्ट या किसी भी मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट कोर्ट में पेश ही नहीं की। जब यह मुद्दा उठा तो सीबीआई ने सभी मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक हलफनामे के साथ दायर की।

7. जिस लापता लड़की की खोपड़ी सबसे पहले बरामद हुई थी, डीएनए जांच में साबित ही नहीं हुआ कि वह उसी लड़की की है जो लापता थी। इसलिए युवती के अपहरण, दुष्कर्म व हत्या के मामले में यह अहम सबूत स्वीकार्य नहीं हो पाया।

8. निठारी में जो अन्य 15 मानव खोपड़ियां मिली थीं, उनके बारे में आरोपी सुरेंद्र कोली का कोई इकबालिया बयान ही नहीं था। इसलिए इन सभी खोपड़ियों को सुरेंद्र कोली व मोनिंदर पंढेर के खिलाफ केस में एविडेंस एक्ट के तहत सबूत के रूप में शामिल नहीं किया गया।

नोएडा के गांव निठारी की इसी कोठी में मोनिंदर पंधेर रहता था।

नोएडा के गांव निठारी की इसी कोठी में मोनिंदर पंधेर रहता था।

9. जांच एजेंसी ने सुरेंद्र कोली की निशानदेही पर पंढेर के घर के किचन से चाकू बरामद किया। घरों के किचन में चाकू होना आम बात है। इस चाकू पर कोई खून के धब्बे नहीं थे। चाकू की कोई फोरेंसिक जांच तक नहीं कराई गई।

10. नोएडा पुलिस और सीबीआई का कहना है कि उन्हें ग्राउंड की जांच के दौरान एक कुल्हाड़ी भी मिली थी। उस कुल्हाड़ी पर खून या त्वचा का हिस्सा या कोई हड्‌डी थी या नही, यह साबित करने के लिए न तो कोई पंचनामा है और न ही कोई गवाह। कुल्हाड़ी की भी फोरेंसिक जांच नहीं कराई गई।

11. सीबीआई का सारा केस सुरेंद्र कोली के इकबालिया बयान पर आधारित है, जबकि वह सबूत के रूप में स्वीकार्य ही नहीं है। इकबालिया बयान को तब तक स्वीकार नहीं किया जा सकता, जब तक वह मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में न दिया गया हो।

12. सीबीआई ने नाले से बरामद 19 कंकालों के संदर्भ में 19 अलग-अलग केस दर्ज किए। मगर इन सभी केसों में सारे सबूत कॉमन थे। सीबीआई ने केस-टु-केस जांच नहीं की। सीबीआई ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया कि केस-टु-केस सबूत अलग हो सकते हैं।

सुनीता आज भी निठारी गांव में D-5 कोठी के सामने कपड़ों पर प्रेस करती हैं। इन्होंने निठारी कांड में अपनी बेटी को खोया है।

सुनीता आज भी निठारी गांव में D-5 कोठी के सामने कपड़ों पर प्रेस करती हैं। इन्होंने निठारी कांड में अपनी बेटी को खोया है।

13. पूरे मामले में अभियोजन का रुख मामले के घटनाक्रम को लेकर समय-समय पर बदलता रहा। जांच एजेंसी ने प्रारंभिक मामला सुरेंद्र कोली और पंढेर के खिलाफ बनाया था। उनके खिलाफ रिमांड की अर्जियां इस बात को दर्शाती हैं। हालांकि समय के साथ जांच एजेंसी ने पूरा आरोप पंढेर से सुरेंद्र कोली पर शिफ्ट कर दिया।

14. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी तो सीबीआई के सबूत भी बदलते रहे। सभी सबूत कोली को दोषी साबित करने पर केंद्रित होते गए। सीबीआई ने सभी संभावित उपायों को दरकिनार करते हुए सभी स्पष्टीकरण आरोपी सुरेंद्र कोली के कबूलनामे के अनुसार पेश किए।

15. सीबीआई ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर पंढेर के खिलाफ जो सबूत जुटाए थे, वे परिस्थितिजन्य थे ठोस नहीं।

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17 साल, 38 गवाह और 439 दिन की सुनवाई। हाईकोर्ट ने निठारी कांड में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा, ‘CBI ने इन्वेस्टिगेशन के बेसिक रूल्स का बेशर्मी से उल्लंघन किया, जन आस्था से धोखा किया। एक गरीब नौकर को राक्षस बनाकर फंसाने की साजिश रची।’

हालांकि जिनके बच्चों की हत्या हुई, वे कह रहे हैं- ‘हमें इंसाफ नहीं मिला।’ पीड़ित पक्ष के वकील दावा कर रहे हैं कि CBI ने सारे सबूत कोर्ट में नहीं रखे, जिससे कोली और पंढेर छूट गए। कोली ने जिस आरी से बच्चों को काटा था, वह भी गायब हो गई। CBI ने चार्जशीट में उसका जिक्र तक नहीं किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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नोएडा के निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर की अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने उन्हें पहले फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। निठारी मामले में टोटल 14 केस में हाईकोर्ट ने दोषियों को बरी किया है। इसमें कोली को 12 और पंधेर को 2 मामलों में राहत मिली है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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