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दिल्ली एलजी के प्रमुख कंसल्टेंट को बाहर से हटाया गया:कहा

नई दिल्ली37 मिनट पहले

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एलजी बोले- इस मामले में पहले से ही जांच हो रही है। तो इस रिपोर्ट पर सहमति जताना जांच को प्रभावित किया जाएगा। - दैनिक भास्कर

एलजी बोले- इस मामले में पहले से ही जांच हो रही है। तो इस रिपोर्ट पर सहमति जताना जांच को प्रभावित किया जाएगा।

द्वारका एक्सप्रेस-वे में कथित तौर पर कथित तौर पर कथित तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पद से हटाया गया था। इस पर एलजी विनय सक्सेना कुमार ने रविवार को विचार करने से इनकार कर दिया।

15 नवंबर को एलजी ने विनय कुमार सक्सेना पर चिट्टी राइटर कुमार पर 897 करोड़ रुपये का आरोप लगाया था। 19 नवंबर को एलजी सक्सेना ने इस रिपोर्ट में पुरानी धारणाओं और अनुमानों पर आधारित विद्वानों पर विचार करने से मना कर दिया।

दिल्ली में बने द्वारका एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण में छात्रों की याचिका पर दिल्ली के विजलेंस मंत्री आतिशी ने जांच की थी। आतिशी ने बताया कि नरेश कुमार ने अपने बेटे से जुड़ी कंपनी पर 897 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया है।

रिपोर्ट का मकसद सच्चाई जानना नहीं, राजनीति करना: एलजी
एलजी विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि सीएम की ओर से विजीलेंस मिनिस्टर रिपोर्ट की बंद लाइफफे में मिली थी, लेकिन ये तो पहले से ही पब्लिक डोमेन में मौजूद है और इसकी डिजिटल कॉपियां सभी के पास हैं। मीडिया ने इस पर कई खबरें दी हैं।

सक्सेना ने कहा- प्रारंभिक तौर पर ऐसा लगता है कि इस जांच का मुख्य उद्देश्य सच्चाई जानना नहीं है, बल्कि मीडिया निष्कर्ष निकालना है, लोगों के बीच धारणा बनाना और अदालतों को अनाड़ी बनाना है। साथ ही इस मामले पर राजनीति करना भी है।

स्ट्रॉबेरी एलजी की रिपोर्ट में तीन मरीज़ हैं
सीएम ने बुधवार को एलजी सक्सेना को लेटर राइटर नरेश कुमार को पद से हटाने की बात कही थी। सर्जिन ने कहा कि नरेश कुमार ने उनके खिलाफ मुआवज़ा की याचिका दायर की थी। 11 नवंबर को मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। विजीलेंस मिनिस्टर आतिशी ने 3 दिन की जांच करवाकर 14 नवंबर को रिपोर्ट शॉर्क को दी।

उन्होंने एलजी को भी पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट सौंपी थी। सर्जन ने अपने विजिलेंस मंत्री आतिशी को निर्देश दिया था कि वो जांच रिपोर्ट सीबीआई और ईडी को भी भेजें।

दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने के लिए द्वारका एक्सप्रेस-वे बनाया गया है।

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आतिशी की रिपोर्ट क्या है
आतिशी ने जांच में पाया कि द्वारका एक्सप्रेस-वे के लिए बामनौली गांव की जमीन का अधिग्रहण हो रहा था। 5 साल में इस जमीन का तय स्टॉकिस्ट 9 गुना तक बढ़ गया। इस जमीन के प्लांट से जिस व्यक्ति को फायदा हो रहा था, उसकी सहायक कंपनी में मुख्य कार्यकारी अधिकारी का बेटा चौहान काम करता है।

साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी के बेटों से जुड़े कई सहयोगियों की सरकारी झलक और अब भी जांच होगी। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले में 897 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया गया है।

आतिशी ने मंगलवार 14 नवंबर को इस मामले में 650 पेज की जांच रिपोर्ट में सीएम केजरीवाल को बताया। आतिशी ने बामनौली भूमि अधिग्रहण में शामिल दस्तावेजों की जांच के लिए ईडी और सीबीआई से जांच की मांग की है।

5 साल में मस्जिद 41 करोड़ से 353 करोड़ हो गई
द्वारका एक्सप्रेस-वे के लिए दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम में स्थित बामनोली गांव की 19 नक्कर भूमि का अधिग्रहण किया गया। 40 दिन बाद नरेश के प्रमुख अजित कुमार साउथ-वेस्ट जिले के डीएम बने। 2018 में इस जमीन के लिए 41 करोड़ 50 लाख रुपये तय किये गये। 2023 में डीएम माइकल कुमार ने 353 करोड़ रुपये कर दिये।

प्लांट की ब्याज वृद्धि के पीछे बिल्डर ने तर्क दिया- इस जमीन को पहले कृषि भूमि बताया गया था, जबकि यह रेसायशी भूमि है। जमीन की कीमत भी उसी हिसाब से मिलनी चाहिए। जब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इसे बैचलर प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया तो पता चला कि 1 किलोमीटर रोड बनाने में 251 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। जबकि 1 किमी के निर्माण पर 18 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे.

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