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दत्ता सामंत के एक इशारे पर मुंबई में साल भर बंद रहा था कपड़ा उद्योग, जानिए डॉक्टर के ट्रेड यूनियन नेता बनने की कहानी

एक विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार (28 जुलाई) को 1997 में ट्रेड यूनियन नेता और पूर्व सांसद दत्ता सामंत की हत्या से संबंधित एक मामले में गैंगस्टर छोटा राजन को बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि उसने हत्या की साजिश रची थी।

विशेष न्यायाधीश एएम पाटिल ने कहा, “डॉ. दत्ता सामंत की हत्या की साजिश के संबंध में आरोपियों के खिलाफ कोई भी साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आया है।”

क्या है पूरा मामला?

पवई में रहने वाले सामंत 16 जनवरी, 1997 को घाटकोपर स्थित कार्यालय जा रहे थे। तभी सुबह लगभग 9.30 बजे उनके वाहन को रोका गया और चार हमलावरों ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। उन्हें 17 गोलियां लगीं। अस्पताल पहुंचाने पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस हमले में सामंत के ड्राइवर भी घायल हो गए थे। ड्राइवर ने अपनी गवाही में बताया था कि उसे अपनी टाटा सूमो गाड़ी रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा जब एक व्यक्ति ने उसके सामने गैस सिलेंडर फेंक दिया। इसके बाद चार बंदूकधारी – दोनों तरफ से दो-दो आए और गोलीबारी शुरू कर दी। यह घटना पवई में सामंत के बंगले से बमुश्किल 200 मीटर की दूरी पर हुई।

पुलिस के अनुसार, हमलावर एक ऑटो रिक्शा में आए और इम्पोर्टेड 9 मिमी पिस्तौल का इस्तेमाल किया। वे उसी रिक्शे से भाग गये, जिससे आए थे। पुलिस ने दावा किया कि यह हत्या प्रीमियम ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड की फैक्ट्री में ट्रेड यूनियनों के बीच दुश्मनी का परिणाम थी।

हालांकि, हत्या के समय कुछ ट्रेड यूनियन सदस्यों और श्रमिकों ने अनुमान लगाया था कि हत्या का कारण मिल भूमि की बिक्री के लिए सामंत का विरोध था। विक्टोरिया मिल्स के एक कर्मचारी ने 1997 में मीडिया को बताया था, “यह सत्तारूढ़ गठबंधन और फैक्ट्री द्वारा निजीकरण को बढ़ाने के लिए की गई एक साजिश है।”

छोटा राजन की कथित संलिप्तता

मामले की पिछली सुनवाई साल 2000 में संपन्न हुई थी। नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो निशानेबाजों सहित तीन को दोषी पाए गए थे। दो दोषी वर्तमान में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं जबकि एक की मृत्यु हो चुकी है।

मुंबई के कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन और भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद इब्राहिम के दोस्त से दुश्मन बने छोटा राजन को भी पुलिस ने इस मामले में आरोपी के रूप में नामित किया था। पुलिस ने दावा किया कि आरोपियों में से एक के रिश्तेदार ने राजन से मुलाकात की थी और गैंगस्टर पर हत्या कराने का आरोप लगाया था। 2005 में राजन गिरोह के एक कथित सदस्य को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में 2009 में उसे बरी कर दिया गया।

खुद राजन, जो इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है, उसने सभी आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि उसे दत्ता सामंत की हत्या सहित कई मामलों में झूठा फंसाया गया है। राजन को 2015 में इंडोनेशिया में गिरफ्तार किया गया था और मुंबई लाया गया था। तब से उसके खिलाफ लंबित सभी मामले सीबीआई को स्थानांतरित कर दिए गए थे। इस हत्या का मुकदमा अगस्त 2021 में शुरू हुआ था।

सीबीआई ने अपनी जांच के बाद कोई नया सबूत पेश नहीं किया। कुल 22 गवाहों से पूछताछ की गई, जिनमें से आठ मुकर गए। अदालत ने कहा कि महत्वपूर्ण गवाह मुकर गए हैं और अन्य गवाहों की गवाही राजन के खिलाफ मामला साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

दत्ता सामंत कौन थे?

दत्ता सामंत (1932-1997) महाराष्ट्र के एक अनुभवी श्रमिक नेता थे, जो औद्योगिक भूमि बिक्री के विरोध के लिए जाने जाते थे। साल 1932 में उनका जन्म कोंकण तट के देवबाग में हुआ था। वह पेशे से एक डॉक्टर थे, जिस वजह से उनके समर्थक सम्मानपूर्वक डॉक्टर साहब कहा करते थे। सामंत 1970 के दशक में उभरे। वह कांग्रेस पार्टी से संबद्ध ट्रेड यूनियन, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के नेता थे।

उन्हें संभवतः 1982 की सूती मिल श्रमिकों की हड़ताल के लिए जाना जाता है, जिसमें 200,000 से अधिक श्रमिकों ने भाग लिया था। इस हड़ताल से मुंबई का कपड़ा उद्योग एक वर्ष से अधिक समय तक बंद रहा था। हड़ताल के कारण अंततः मुंबई में कई कपड़ा मिलें स्थायी रूप से बंद हो जाएंगी और फैक्ट्रियां दूसरे जगहों पर पलायन कर गईं।

दूसरी तरफ श्रमिकों के अधिकारों पर उनके अड़ियल रुख ने उन्हें मुंबई के श्रमिकों के बड़े वर्ग के बीच बहुत लोकप्रिय बना दिया। वह 1984 के लोकसभा चुनाव में मुंबई के दक्षिण मध्य निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुने गए और संसद सदस्य के रूप में एक कार्यकाल पूरा किया। हालांकि, 1990 के दशक तक उनका प्रभाव कम हो गया था। ऐसा कहा जाता है कि शिवसेना में भी उनके शत्रु बन गए थे। 1980 और 1990 के दशक में उनके समर्थकों और शिव सैनिकों के बीच झड़प आम थीं।

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