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चीतों में फर की मोटी परत, नमी ले रही जान:इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, कहा जो खुद को ढाल सकेंगे वही बचेंगे

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चीतों में फर की मोटी परत, नमी ले रही जान:इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, कहा जो खुद को ढाल सकेंगे वही बचेंगे

नई दिल्ली7 घंटे पहले

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MP के कुनो में नामीबिया और साउथ आफ्रीका से लाए गए 6 चीतों की मौत हो चुकी है। - Dainik Bhaskar

MP के कुनो में नामीबिया और साउथ आफ्रीका से लाए गए 6 चीतों की मौत हो चुकी है।

प्रोजेक्ट चीता में शामिल इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफ्रीका ​​​​​​में सर्दियों के लिए चीतों में बालों (फर) की मोटी परत बनती है, भारत की गीली और गर्म कंडीशंस में यही चीतों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

सरकार को सौंपी एक रिपोर्ट में एक्पर्ट्स ने सुझाव दिया है कि घातक इनफेक्शन से निपटने और चीतों की मौतें रोकने के लिए चीतों के शरीर से इस फर को हटा देना चाहिए। अफ्रीका से मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क लाए गए 20 चीतों में से 6 की अब तक मौत हो चुकी है। इनमें से एक मौत बुधवार को ही हुई है।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि मोटी परत, हाई पैरासाइट्स और नमी स्किन इनफेक्शन के लिए परफेक्ट साबित हो रही है। इसके ऊपर मक्खी का हमला इनफेक्शन को बढ़ाता है। इससे स्किन फटने लगती है।

उन्होंने कहा कि जब चीते अपने कूबड़ पर बैठते हैं तो इनफेक्शन फैलता है। इससे निकलने वाला लिक्विड उनकी रीढ़ की हड्डी तक पहुंच जाता है। इससे उनकी मौत हो रही है।

हालांकि प्रोजेक्ट से जुड़े एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सभी चीतों में मोटी परत नहीं विकसित हुई है।

इनमें से कुछ चीते जिनके लंबे बाल नहीं हैं, उन्हें ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है। भारतीय परिस्थितियों में जो खुद को ढाल सकेंगे वही चीते और उनकी संतानें यहां जीवित रहेंगी।

सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में एक्पर्ट्स ने कहा कि हालांकि क्लाइमेट ही चीतों के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर नहीं है। क्योंकि ये दक्षिणी रूस से दक्षिण अफ्रीका तक फैले हुए हैं। यहां का क्लाइमेट ओवरलैप होता है।

रिपोर्ट में एक रिसर्च का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार 2011 और 2022 के बीच 364 मेटापॉपुलेशन ट्रांसफर के डेटा से यह भी संकेत मिलता है कि चीता जिंदा रहने में क्लाइमेट का अधिक महत्व नहीं है।

पहले गले में पहनाए कॉलर को कारण बताया था

इसके पहले दक्षिण अफ्रीकी चीता मेटापॉपुलेशन विशेषज्ञ विंसेंट वान डेर मेरवे ने कहा था कि चीतों की मौत का कारण उनके गले में पहनाए गए रेडियो कॉलर से हुआ इन्फेक्शन है। उनका कहना था कि रेडियो कॉलर के कारण गर्दन के आसपास नमी बनी रही और बैक्टीरिया पैदा हो गए। इस कारण चीतों को सेप्टीसीमिया हो गया जिससे उनकी मौत हो गई।

मेरवे ने कहा कि वह द चीता मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव की ओर से दक्षिण अफ्रीका में चीता मेटापॉपुलेशन प्रोजेक्ट का प्रबंधन करते हैं।

साथ ही दक्षिण अफ्रीका से भारत में चीतों को लाने वालों में वे भी शामिल थे। पढ़ें पूरी खबर…

चीतों की मौत कब-कब हुई

26 मार्च 2023: साशा की किडनी इन्फेक्शन से मौत
नामीबिया से लाई गई 4 साल की मादा चीता साशा की किडनी इन्फेक्शन से मौत हो गई। वन विभाग ने बताया कि 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में साशा का ब्लड टेस्ट किया गया था, जिसमें क्रियेटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा था। इससे ये पुष्टि होती है कि साशा को किडनी की बीमारी भारत में लाने से पहले ही थी। साशा की मौत के बाद चीतों की संख्या घटकर 19 रह गई।

27 मार्च 2023: ज्वाला ने 4 शावकों को जन्म दिया
नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया था। इसके साथ ही कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 23 हो गई।

मादा चीता ज्वाला के 4 शावकों की यह तस्वीर कूनो नेशनल पार्क ने जारी की थी।

मादा चीता ज्वाला के 4 शावकों की यह तस्वीर कूनो नेशनल पार्क ने जारी की थी।

23 अप्रैल 2023: नर चीता उदय की दिल के दौरे से मौत
साउथ अफ्रीका से लाए गए चीते उदय की मौत हो गई। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में बताया गया कि चीता उदय की मौत कार्डियक आर्टरी फेल होने से हुई। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान ने बताया कि हृदय धमनी में रक्त संचार रुकने के कारण चीते की मौत हुई। यह भी एक प्रकार का हार्ट अटैक है। इसके बाद कूनों में शावकों सहित चीतों की संख्या 22 रह गई।

यह वीडियो कूनो नेशनल पार्क का है। नर चीता उदय चलते-चलते गिर जाता है। इसी के बाद इसकी मौत हो जाती है

यह वीडियो कूनो नेशनल पार्क का है। नर चीता उदय चलते-चलते गिर जाता है। इसी के बाद इसकी मौत हो जाती है

9 मई 2023: मादा चीता दक्षा की मेटिंग के दौरान मौत
दक्षा को दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। जेएस चौहान ने बताया कि मेल चीते को दक्षा के बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दोनों में हिंसक इंटरैक्शन हो गया। मेल चीते ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद कूनों में शावकों सहित चीतों की संख्या 21 रह गई।

23 मई 2023: ज्वाला के एक शावक की मौत
मादा चीते ज्वाला के एक शावक की मौत हो गई। जेएस चौहान ने बताया कि ये शावक जंगली परिस्थितियों में रह रहे थे। 23 मई को श्योपुर में भीषण गर्मी थी। तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस था। दिनभर गर्म हवा और लू चलती रही। ऐसे में ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी इसकी मौत की वजह हो सकती है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 20 रह गई।

25 मई 2023: ज्वाला के दो और शावकों की मौत
पहले शावक की मौत के बाद तीन अन्य को चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया था। इनमें से दो और की मौत हो गई। अधिक तापमान होने और लू के चलते इनकी तबीयत खराब होने की बात सामने आई है। एकमात्र बचे शावक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इसके बाद कूनो में एक शावक सहित अब 18 चीते ही बचे हैं।

11 जुलाई 2023: मेल चीता तेजस की मौत
चीते तेजस की मौत हो गई। उसकी गर्दन पर घाव था, जिसे देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि चीतों के आपसी संघर्ष में तेजस की जान गई है।

14 जुलाई 2023: मेल चीता सूरज की मौत

चीते सूरत की गर्दन पर घाव मिला है। अनुमान लगाया जा रहा है कि चीतों के आपसी संघर्ष में तेजस की जान गई है।

2 अगस्त 2023: मादा चीता टिबलिसी की मौत

टिबलिस घने जंगल में मृत मिली।

चीतों के बच्चे बड़ी मुश्किल से बचते हैं। ये इस जानवर के विलुप्त होने की बड़ी वजह है। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान बताते हैं कि चीता शावकों के जंगल में जीवित रहने की संभावना 10-20% ही होती है।

कूनों में चीतों की मौत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

कूनो में एक और चीते की मौत ,मादा चीता टिबलिसी की गई जान; अब तक 9 ने दम तोड़ा

MP के कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता धात्री (टिबलिसी) की मौत हो गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव ने कहा- धात्री सुबह मृत पाई गई। मौत की वजह पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। 26 मार्च से अब तक 9 चीतों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन शावक भी शामिल हैं, जिनका जन्म कूनो में हुआ था।पढ़ें पूरी खबर…

कूनो में एक और चीते की मौत: मेटिंग के दौरान मेल चीते ने पंजा मारकर घायल किया था
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में फीमेल चीते दक्षा की मौत हो गई है। मेल चीते को दक्षा के बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दोनों में हिंसक इंटरैक्शन हो गया। मेल चीते ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। पढे़ं पूरी खबर

साउथ अफ्रीका से लाए चीता उदय की मौत

कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई है। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीता उदय ने बीमार पड़ने के बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पढ़ें पूरी खबर

कूनो में चीता साशा की मौत, किडनी इंफेक्शन था

कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों में से 4 साल की मादा चीता साशा की मौत हो गई है। वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थी। पढ़ें पूरी खबर

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