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गलवान झड़प के बाद चीन को मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार था भारत, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

सोमवार यानी 14 अगस्त को भारत और चीन की सेनाओं के बीच कोर कमांडर लेवल की 19वीं दौर की बातचीत होनी है। वहीं इससे पहले एक बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। उसके बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में सेना की तैनाती बढ़ाई थी। गलवान में हुई झड़प के बाद भारत चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार था। भारत का स्पष्ट मत था कि यदि चीन की ओर से कोई भी नापाक गतिविधि की जाती है, तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

68 हजार सैनिकों को किया गया एयरलिफ्ट

गलवान में इस झड़प के बाद भारतीय वायुसेना ने 68 हजार से अधिक भारतीय सैनिकों को देश के अन्य हिस्सों से एयरलिफ्ट कर पूर्वी लद्दाख में पहुंचाया था। इसके अलावा 90 टैंक और अन्य हथियारों को भी पूर्वी लद्दाख में पहुंचाया गया था। गलवान झड़प के बाद से ही चीन पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए SU – 30 MKI और जगुआर लड़ाकू विमान को भी तैनात किया गया है।

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा कि हवाई गश्त के लिए पूर्वी लद्दाख में राफेल मिग-29 सहित बड़ी संख्या में लड़ाकू विमानों को तैनात किया गया। वहीं वायु सेना के विभिन्न विमानों के माध्यम से गोला बारूद और अन्य हथियार पहुंचाया गया। SU- 30 MKI और जगुआर लड़ाकू विमानों की निगरानी की सीमा 50 किलोमीटर है और इसी से यह सुनिश्चित किया गया कि चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए।

एयरफोर्स को रखा गया था अलर्ट पर

झड़प के बाद भारतीय वायुसेना ने लड़ाकू विमानों के कई स्क्वाड्रन को तैयार रखा था। एक तरीके से यह पूरी प्रक्रिया वायु सेना की बढ़ती रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमताओं का प्रदर्शन करना भी था। वायुसेना ने बेहद ही कठिन परिस्थितियों में अपना काम किया और अपने लक्ष्य को पूरा किया। इस ऑपरेशन का भारतीय वायुसेना की बढ़ती एयरलिफ्ट क्षमता को प्रदर्शित करना भी मकसद था।

गलवान में हुई झड़प के बाद सरकार भी एकदम एक्टिव हो गई और पूर्वी लद्दाख में 3500 किलोमीटर लंबे एलएसी पर बुनियादी ढांचे पर जोर देना शुरू हो गया। इसके बाद एयर फोर्स ने अपनी लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के साथ लगते पर्वतीय क्षेत्र में आसानी से समान ले जाने के लिए M- 777 अल्ट्रा लाइट तोपें भी तैनात की गई है।

गलवान में झड़प के बाद भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में भी घातक हथियारों को तैनात किया है। दुर्गम क्षेत्र में संचालित होने वाले अमेरिकी निर्मित वाहन संचालित हो रहे हैं। वहीं इसराइल से 7.62 एमएम लाइट मशीनगन और कई अन्य घातक हथियारों से भी सेना को लैस किया गया है।

भारत और चीन के संबंध ख़राब

गलवान में हुई झड़प के बाद से ही भारत और चीन के संबंध काफी खराब हो गए। एलएसी पर करीब 60 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती है। गलवान में हुई झड़प के बाद भारत और चीन कई दौर की वार्ता भी कर चुके हैं। हालांकि तनाव अभी भी बना हुआ है।

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