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खालिस्तान के नक्शे में राजस्थान के 11 जिले:30 साल पहले आतंकियों का सामना कर चुके 2 अफसरों ने बताया

जयपुर7 मिनट पहलेलेखक: उपेंद्र शर्मा

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खालिस्तान का एक नक्शा इन दिनों चर्चा में है। हैरान और परेशान करने वाली बात ये है कि इस नक्शे में राजस्थान के भी 11 जिलों को शामिल किया गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या खालिस्तान को लेकर चल रही गतिविधियों से राजस्थान को भी सतर्क होने की जरूरत है। क्या कनाडा और खालिस्तानी गतिविधियों के तार राजस्थान से भी जुड़े हैं? क्या 28 साल पहले की तरह एक बार फिर खालिस्तानी आतंकियों की बुरी नजर राजस्थान पर तो नहीं?

स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब…

कनाड़ा में खालिस्तान की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

कनाड़ा में खालिस्तान की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

नक्शे में राजस्थान के कौनसे जिले?

इस नक्शे में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उत्तरप्रदेश और राजस्थान के हिस्सों को दिखाया गया है।

राजस्थान की बात करें तो नक्शे में पंजाब से सटे श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, फलोदी, जोधपुर, अलवर, खैरथल, भरतपुर, डीग, बूंदी और कोटा को दिखाया गया है।

हालांकि हाल ही में बने अनूपगढ़, फलोदी, खैरथल और डीग जिले को अलग से मेंशन नहीं किया गया है।

खास बात ये है कि 2 साल पहले भी ये नक्शा सामने आया था। अब कनाडा में खालिस्तान मूवमेंट बढ़ने के बाद एक बार फिर ये नक्शा चर्चा में है।

कभी खालिस्तानी आतंक से निपटने के लिए राजस्थान ने बनाई थी एटीएस

राजस्थान में पुलिस महानिदेशक रहे बी. एल. सोनी ने भास्कर को बताया कि 1990-92 के बीच पंजाब में खालिस्तानी आतंक चरम पर था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने 15 फरवरी 1992 को एसपी एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशन राजस्थान (कैम्प श्रीगंगानगर) पोस्ट बनाई थी। इसका ऑफिस श्रीगंगानगर में था और इसका पहला एसपी मुझे ही लगाया गया था।

जयपुर से वाहन, संसाधन, फोर्स, हथियार आदि श्रीगंगानगर भेजे गए। बाद में पंजाब में खालिस्तानी आतंक के खात्मे के साथ ही यह पोस्ट और यह कैम्प ऑफिस मर्ज हो गए। इसके बाद राजस्थान में एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाएड) बनाई गई।

तब भी नक्शे में दिखाते थे सरहदी जिले

सोनी का कहना है कि खालिस्तानी आतंकी उस दौर में भी राजस्थान के सरहदी जिलों को अपने नक्शे में दिखाते थे। लेकिन अब तो बूंदी, कोटा, जोधपुर, अलवर व भरतपुर जैसे जिलों को खालिस्तान के नक्शे में दिखाया जा रहा है। इन जिलों को उस दौर के खालिस्तानी नक्शे में नहीं दिखाया गया था।

28 साल पहले केंद्रीय मंत्री के बेटे का अपहरण

पंजाब का पड़ोसी राज्य होने से राजस्थान में खालिस्तानी आतंक का खतरा पहले भी बना रहा है। वर्ष 1995 में राजस्थान में खालिस्तानी आतंकियों को जयपुर में पकड़ा भी गया था।

उस समय इंदिरा गांधी के करीबी रह चुके केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के दिग्गज नेता रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेंद्र मिर्धा को खालिस्तानी आतंकियों ने फरवरी, 1995 में किडनैप कर लिया था।

उन्होंने राजेंद्र मिर्धा को छोड़ने के बदले जनवरी, 1995 में पकड़े गए खालिस्तान समर्थक भुल्लर को छोड़ने की मांग की थी।

तत्कालीन सीएम शेखावत ने गठित की थी टीमें

राजेन्द्र मिर्धा के अपहरण के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत व केंद्र सरकार ने बहुत सी टीमें इस केस के लिए गठित कीं।

उनमें से एक इंटेलीजेंस टीम में शामिल रहे अफसर हुकुम सिंह ने भास्कर को बताया कि मिर्धा का अपहरण खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) और अन्य 27-28 संगठनों से जुड़े लोगों ने किया था।

जयपुर में हुए पुलिस एनकाउंटर में एक खालिस्तान समर्थक नवनीत सिंह कादिया मारा गया और राजेंद्र मिर्धा को सुरक्षित बचा लिया गया। एनकाउंटर में तीन खालिस्तानी समर्थक दया सिंह लाहौरिया, हरनेक सिंह भप और सुमन सूद भागने में कामयाब हो गए।

मैंने और मेरे एक साथी ने छह महीने तक उन तीनों की तलाश की। यहां-वहां जासूसी की, तब जाकर जयपुर-दिल्ली हाईवे पर एक ढाबे से हमारे हाथ कुछ सूत्र लगे।

उस ढाबे को चलाने वाला मालिक सरदार बछत्तर सिंह उन तीनों खालिस्तान समर्थक संपर्क में था। उस की जासूसी करने के दौरान एक दिन बड़ी लीड मिली, जब पता चला कि तीनों खालिस्तान समर्थक स्विट्जरलैंड में छिपे हैं।

हमने जरूरी कागजात, फोन रिकॉर्ड्स आदि जुटाए। हमारी सूचना के बाद राजस्थान सहित केंद्रीय जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और जिनेवा से इंटरपोल के माध्यम से उन तीनों को भारत लाया गया।

क्यों बताया है राजस्थान के 11 जिलों को खालिस्तान के नक्शे में

हुकुम सिंह का दावा है कि जो जिले नक्शे में दिखाए गए हैं, उनमें खालिस्तान मूवमेंट से सहानुभूति रखने वाले कुछ लोग हैं।

यह इलाके राजस्थान के वे जिले हैं, जो खेती-किसानी के लिए जाने जाते हैं। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से सटे हुए हैं।

खालिस्तानी नक्शे में पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र नहीं

खालिस्तान का जो नक्शा दिखाया गया है, उसमें भारतीय पंजाब से सटे हुए पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र तक नहीं है। ये हैरान करने वाला इसलिए है कि क्योंकि पाकिस्तानी पंजाब भारतीय पंजाब से भी करीब 30 प्रतिशत बड़ा है।

राजस्थान के श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, फलोदी, बीकानेर व जोधपुर सरहदी इलाके हैं। इनकी सरहद उत्तर में पंजाब और पश्चिम में पाकिस्तान से सटी हुई है।

पाकिस्तान से सटी बाॅर्डर पर अक्सर ड्रग्स व हथियारों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार बीएसएफ ने वहां ड्रोन, प्रशिक्षित कबूतर और बाज जैसे पक्षियों को पकड़ा है जो पाकिस्तान से भारत की तरफ आते हैं।

इस साजिश के पीछे गुरपतवंत सिंह पन्नु

भारत सरकार द्वारा घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नु सिक्ख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नामक संगठन कनाडा में चलाता है। पन्नु कनाडा में चल रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों में कई बार शामिल हो चुका है।

वो कई बार सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर भारतीयों और भारत सरकार को धमकियां देता है। दो दिन पहले ही पन्नु ने कनाडा में बसे हिन्दुओं को कनाडा छोड़ जाने की धमकी दी है।

पन्नु ने ही खालिस्तान नामक देश भारत से अलग करने की मुहिम चलाई हुई है, जिसमें कनाडा में हजारों लोग जुड़े हुए हैं। भारत सरकार कई बार कनाडा सरकार को अपनी आपत्ति पन्नु को वहां शरण देने के संबंध में दर्ज करवा चुकी है।

भारत सरकार द्वारा घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नु सिक्ख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नामक संगठन कनाडा में चलाता है।

भारत सरकार द्वारा घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नु सिक्ख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नामक संगठन कनाडा में चलाता है।

क्यों रोक दिए कनाडा के नागरिकों के वीजा

कनाडा में करीब छह महीने पहले एक खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हो गई थी। कनाडा के प्रधानमत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया है।

इसी बीच बुधवार को एक ओर खालिस्तानी आतंकी सुख्खा दुनेके उर्फ सुखदूल की गोली मार कर हत्या कर दी गई। सुक्खा वर्ष 2017 में भारत से भाग कर कनाडा गया था।

भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कनाडा के नागरिकों के लिए भारत का वीजा लेने पर रोक लगा दी है।

मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को इस कनाडा के दिल्ली स्थित दूतावास को अपना स्टाफ घटाने का आदेश भी दिया है।

बागची ने मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया है कि भारत में मोस्ट वांटेड 25 आतंकियों की लिस्टी कनाडा को दी गई थी, ताकि उन्हें भारत लाया जा सके। कनाडा ने उस लिस्ट पर कोई ध्यान नहीं दिया है। बागची ने साफ-साफ कहा है कि कनाडा भारत विरोधी आतंकियों की पनाहगाह बन गया है।

राष्ट्रीय फोरम फॉर अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्योरिटी सौंपेगी मांग पत्र

राष्ट्रीय फोरम फॉर अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्योरिटी एक ऐसा संगठन है, जिसके राष्ट्रीय महासचिव हैं सरदार जसबीर सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेफ्टिनेंट जनरल आर. एन. सिंह।

यह संगठन जयपुर में कई बार नेशनल सिक्योरिटी पर सेमिनार करवा चुका है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल भी ओटीएस में इस संस्था द्वारा करवाई गई एक सेमिनार में मुख्य वक्ता रहे हैं।

फोरम के राष्ट्रीय महासचिव जसबीर सिंह को राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन (2003-08) बनाया गया था।

सिंह ने भास्कर को बताया कि सिक्ख समुदाय भारत में देशभक्ति के लिए जाना जाता है। यहां सिक्ख समुदाय के लोग राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सेनाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर कार्यरत रहे हैं।

कनाडा में खालिस्तान के नाम पर भारत विरोधी जो भी गतिविधियां हो रही हैं, वे बेहद दुखद हैं। खालिस्तान के नक्शे में राजस्थान के जिलों को शामिल करने का हम विरोध करते हैं।

खालिस्तान समर्थक गतिविधियां तुरंत रोकी जानी चाहिए और उनसे सहानुभूति रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

एसपी बोले-जिला पूरी तरह सुरक्षित

  • श्रीगंगानगर के एसपी विकास शर्मा का कहना है कि खालिस्तान के विषय में लोग नक्शे का दावा कर रहे हैं, उनके दावे से क्या होता है। उन्हें तवज्जो देने की कोई जरूरत नहीं। उनके कहने से कुछ नहीं होने वाला। हमारा जिला पूरी तरह से सुरक्षित है। फिर भी कोई इनपुट आगे आएगा तो सख्त कार्रवाई करेंगे।
  • भरतपुर एसपी मृदुल कच्छावा का कहना है कि खालिस्तान के नक्शे के संबंध में फिलहाल मुझे कोई जानकारी नहीं है। आप मुझे वो नक्शा भेज दीजिए। मैं फिर कुछ कह सकूंगा। ( इसके बाद भास्कर ने उन्हें वॉट्सऐप पर नक्शा भेज दिया।)

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