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एक अफवाह… निक्कमी पुलिस और बदले की भावना, मणिपुर के वायरल वीडियो की असल सच्चाई सामने आई, पीड़िता के बयान ने भी खोले कई राज

मणिपुर में इस समय जो हो रहा है, जो हो चुका है, वो देख देश स्तब्ध है, सड़कों पर लोगों का प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट तक आक्रोशित चल रहा है। विवाद की जड़ बुधवार देर रात सामने आया वो वायरल वीडियो है जिसने महिलाओं की अस्मिता को ठेस पहुंचाई है, इंसानियत को शर्मसार किया है और राज्य की प्रशासन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन जिस वजह से ये हैवानियत की गई, जिस वजह से उन महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया, उसकी नींव एक अफवाह पर आधारित थी।

एक अफवाह और बदला लेने की भावना

बताया जा रहा है कि चार मई वाली घटना से पहले एक अफवाह फैली जिसमें कहा गया कि मैतेई समुदाय की महिला के साथ रेप किया गया। ये जान पहले से चल रहा संघर्ष और ज्यादा उग्र हो गया और मैतेई समुदाय के लोगों ने बदला लेने की ठान ली। उसके बाद मैतेई समुदाय की ही एक भीड़ कोंगपो जिले के एक गांव में जा घुसी। वहां पर बड़े स्तर पर लूटपाट को अंजाम दिया गया, कई घरों को आग के हवाले भी किया गया।

चार मई को हुआ क्या था, पता चल गया

अब जिस समय ये लूटपाट चल रही थी, एक परिवार अपनी जान बचाकर जंगल की ओर भाग गया और फिर वहां से मणिपुर पुलिस ने उनका रेस्क्यू कर लिया। यहां तक स्थिति काबू में रही, लेकिन फिर उस मैतेई समुदाय की उग्र भीड़ ने उस परिवार को भी अपने कब्जे में ले लिया। ये सबकुछ पुलिस के सामने हुआ, लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाया। वहीं दूसरी तरफ उन आरोपियों ने उस परिवार के दो जनों को तो मौत के घाट उतार दिया, वहीं जो तीन महिलाएं थीं, उन्हें निर्वस्त्र किया, सड़क पर घुमाया और कथित तौर पर उनका रेप भी किया।

पुलिस के रवैये पर सवाल, आरोप भी लगे

इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार कर लिया है। इसमें भी मुख्य आरोपी का नाम हुईरेम हीरोदास मैतेई है जिसे सुबह पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अभी के लिए इस मामले पर सीएम एन बीरेन सिंह ने जोर देकर कहा है कि कोशिश होगी कि सभी आरोपियों को फांसी की सजा दिलवाई जाए। अब फांसी मिलती है या नहीं, ये तो कानून का फैसला रहने वाला है, लेकिन जो सच्चाई अब सामने आ रही है कि वो आरोपियों के साथ-साथ उस पुलिस को भी सवालों के घेरे में ला रही है जो लोगों को बचाने का दावा कर रही है।

पीड़िता ने खुद खोली पुलिस की पोल

असल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक पीड़िता से बात की तो पता चला कि पुलिस द्वारा उनकी कोई मदद नहीं की गई, इसके उलट भीड़ की मदद भी उस पुलिस ने ही की। जारी बयान में उस पीड़िता ने कहा-

जो भीड़ गांव में हमला कर रही थी, उसके साथ वहां पर पुलिस भी मौजूद थी। पुलिस ने हमे हमारे घर के पास से पिक अप किया था, वहीं हमें कुछ दूर लेकर गए और फिर रोड पर उस भीड़ के लिए छोड़ दिया गया। हमे पुलिस ने ही उस भीड़ के हवाले किया था।

मणिपुर हिंसा की पीड़िता

सियासत में उबाल, पीएम मोदी भी नाराज

पीड़िता ने इस बात की भी जानकारी दी कि कुछ इस वायरल वीडियो के बारे में कुछ नहीं पता। असल में इस समय मणिपुर में क्योंकि इंटरनेट सेवाएं बाधित चल रही हैं, ऐसे में पीड़िता को इस बात की भी जानकारी नहीं है कि पूरा देश इस समय उनके साथ खड़ा है और उन हैवानों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गुस्सा जाहिर किया और संसद सत्र के शुरू होने से पहले आरोपियों को कड़ी सजा की बात भी कही। उनकी तरफ से बोला गया-

मणिपुर की जो घटना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली है। गुनाह करने वाले कितने और कौन हैं, वो अपनी जगह पर हैं लेकिन बेइज्जती पूरे देश की हो रही है। 140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ रहा है। मैं सभी मुख्यमंत्रियों से आग्रह करता हूं कि वो अपने राज्यों में कानून व्यवस्थाओं को और मजबूत करें। खासतौर पर हमारी मातओं-बहनों की रक्षा के लिए कठोर से कठोर कदम उठाएं।

नरेंद्र मोदी, पीएम

मणिपुर क्यों जल रहा है, क्या है पूरा विवाद?

वैसे इस पूरे मामले की जड़ भी मणिपुर का वो विवाद है जो वैसे तो कई सालों से चला आ रहा है, पिछले कुछ महीनों ने इसने अपना रौद्र रूप दिखा दिया है। असल में मणिपुर में तीन समुदाय सक्रिय हैं- इसमें दो पहाड़ों पर बसे हैं तो एक घाटी में रहता है। मैतेई हिंदू समुदाय है और 53 फीसदी के करीब है जो घाटी में रहता है। वहीं दो और समुदाय हैं- नागा और कुकी, ये दोनों ही आदिवासी समाज से आते हैं और पहाड़ों में बसे हुए हैं। अब मणिपुर का एक कानून है, जो कहता है कि मैतेई समुदाय सिर्फ घाटी में रह सकते हैं और उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में जमीन खरीदने का कोई अधिकार नहीं होगा। ये समुदाय चाहता जरूर है कि इसे अनुसूचित जाति का दर्जा मिले, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है।

हाल ही में हाई कोर्ट ने एक टिप्पणी में कहा था कि राज्य सरकार को मैतेई समुदाय की इस मांग पर विचार करना चाहिए। उसके बाद से राज्य की सियासत में तनाव है और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। ऐसे ही एक आदिवासी मार्च के दौरान बवाल हो गया और देखते ही देखते हिंसा भड़क गई।

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