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अमृतपाल के हीरो से विलेन बनने की कहानी:थोड़े समय में यूथ में पॉपुलर हुआ; कुछ घटनाओं ने पंजाब के लोगों में अलग-अलग कल्पनाएँ रखीं

अमृतपाल के हीरो से विलेन बनने की कहानी:थोड़ी देर में यूथ पॉपुलर हुआ; कुछ घटनाओं ने पंजाब के लोगों में अलग-अलग कल्पनाएँ रखीं

अमृतसर22 मिनट पहले

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वारिस पंजाब के प्रमुख अमृतपाल शुरुआत में अपने बयानों से यूथ में लोकप्रिय हुए।  बाद में कुछ घटनाओं ने उनकी छवि बदल दी।  - दैनिक भास्कर

वारिस पंजाब के प्रमुख अमृतपाल शुरुआत में अपने बयानों से यूथ में लोकप्रिय हुए। बाद में कुछ घटनाओं ने उनकी छवि बदल दी।

पंजाब के अमृतसर में 23 फरवरी 2023 को ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल की अगुआई में लाखों ने जमकर बवाल किया। खुलेआम तलवारें-बंदूकें मार्गईं और बैरिकेड्स तोड़ना। 8 पुलिस अधिकारियों और 3 पीपीएस अधिकारियों के सिर फोड़ दिए गए।

अजनाला पुलिस थाने पर कब्जा कर लिया। इस घटना से खालिस्तान का समर्थन करने वाले सिख युवाओं के बीच अमृतपाल एक ‘हीरो’ के रूप में सामने आया। उसे भिंडरांवाला 2.0 तक यह कहने लगा कि जो सिस्टम की आंख में आंख डालने की जुर्रत रखता है।

अजनाला थाने पर हुए हमले से पंजाब पुलिस की दुनिया में किरकिरी हुई। राज्य सरकार में चल रही आम आदमी पार्टी (आप) पर भी सवाल मंजूर होने जा रहे हैं। मगर, महीने भर से भी कम समय के अंदर सरकार से सीधे टकराने का डैम भरने वाला अमृतपाल गिरफ्तारी से बचने के लिए भगोड़ा बन फिर रहा था। इसके पीछे केंद्र से लेकर पंजाब सरकार के दावे की अलाइन चल काम करना और पंजाब पुलिस की लेट 23 दिन की योजना थी।

35 दिन में पंजाब में चल रहे ऑपरेशन में अमृतपाल के सभी प्रमुख साथियों सहित 400 लोग दबोचे जा चुके थे। 35 दिन अमृतपाल सिंह को भगोड़ा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, पुलिस ने अपनी जांच में ऐसे तथ्यों को सामने रखा, जिसने अमृतपाल सिंह की साख को हीरो से विलेन बना दिया। 36वें दिन अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में ना तो कोई विरोध हुआ और ना ही उन्हें नौकरी से निकालने की मांग रखी गई। इससे ही अमृत सिंह की छवि का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पहले अमृतपाल की कहानी पढ़िए… इसी महीने जब पंजाब के लोगों ने अमृतपाल सिंह का नाम पहली बार सुना। वह दुबई से लौटा हुआ यूथ था। दुबई से वापस आने के तुरंत बाद ही 29 सितंबर 2022 को मोगा जिले के रोडे गांव में अमृतपाल की ‘वारिस पंजाब दे’ संस्था के प्रमुख के तौर पर ताजपोशी कर दी गई। उसके बाद सभी उसे जत्थेदार भाई अमृतपाल सिंह कहने लगे। अमृतपाल ने अपनी बोली और पहनावा संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला की तरह रखा। इसी वजह से उन्हें भिंडरांवाला का दूसरा हिस्सा कहा जाने लगा।

ताजपोशी के बाद में शुरू हो गया पसंद बोल
अमृतपाल ने वारिस पंजाब दे की ‘जत्थेदारी’ हासिल करने के बाद राज्य में 1995 के बाद धुंधले आंखों के नीचे खालिस्तान को रोकना शुरू कर दिया। वह कभी ईसाइयों तो कभी दूसरे राज्यों के संबंध में आग उगलने लगा। धीरे-धीरे वह ठंडे पड़ गए, स्कीन की आग को खुले तौर पर हवा में घूमने लगे।

नशे में डूबे और बेरोजगारों को मार रहे पंजाब के दिशाहीन यूथ को अमृतपाल के खालिस्तान शब्द ने आकर्षित करना शुरू कर दिया। बहुत कम समय में अमृतपाल नौजवानों के बीच लोकप्रिय होने लगा। यूथ को खुद से जोड़ने के लिए वह स्टेज से व्यूज देने लगा। दवा की समस्या खत्म करने का दम भरने वाला अमृत अपने शब्दों से दूसरे धर्म के लोगों को सीधे निशाने पर लेने लगता है।

जालंधर के मॉडल टाउन को गुरुघर में रखा गया था।

जालंधर के मॉडल टाउन को गुरुघर में रखा गया था।

दिसम्बर-2022 में 2 आकस्मिक, इसलिए अमृतपाल ने खुद को धर्म का रब दिखाया गया
दिसंबर-2022 में पंजाब में 2 ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके जरिए अमृतपाल ने खुद को धर्म के तौर पर पेश करने का प्रयास किया। पहली घटना में अमृतपाल के दादा ने कपूरथला जिले के बिहारीपुर गांव में एक गुरुद्वारे में झटके की ओर से कुर्सियों को बाहर फेंककर आग लगा दी। इस गुरुद्वारा का नाम शहीद बाबा दल सिंह था।

दिसंबर-2022 में दूसरी घटना तब हुई जब अमृतपाल के विधायक जालंधर में मॉडल टाउन के गुरु द्वारा श्री गुरु सिंह सभा पहुंचे और गुरुघर के भीतर कुर्सियों/सोफों को बाहर निकाल कर आग के कारण दिया। अमृतपाल का कहना था कि गुरुघर में कोई कुरसी नहीं लग सकती। अगर कोई शख्स बीमार है तो उसे भी नीचे बैठ कर देखा जा सकता है। जो ऐसा नहीं कर सकता, वह गुरुद्वारा के बाहर बैठे।

अमृतपाल सिंह के साथियों से मिला अवैध हथियार।

अमृतपाल सिंह के साथियों से मिला अवैध हथियार।

धीरे-धीरेधीरे धीरे अपराध से संगति लगा नाम
अमृतसर में 3 दिसंबर 2022 को हिंदू नेता सुधीर सूरी की गोलियों से हत्या कर दी गई। खुद कोपाल से प्रभावित बताते हैं कि कपट व्यवसायी सन्नी ने गोपाल मंदिर के बाहर सरेआम सुधीर सूरी को पिल्स मार दी। सन्नी की कार पर ‘वारिस पंजाब दे’ का स्टिकर और कार के अंदर पंजाब सरकार के वीआईपी लोगों के पास की तस्वीरें मिलीं। सन्नी कीपाल के साथ अमृत के चित्र और वीडियो भी पुलिस को मिले।

सुधीर सूरी के परिवार और उनके जाम काफी जोर से लगाए गए और अमृतपाल का नाम इस मामले में नामजद नहीं किया गया।

अमृतपाल सिंह बन रहा था प्राइवेट फोर्स।  फोर्स के लिए बुलेट जैकेट।

अमृतपाल सिंह बन रहा था प्राइवेट फोर्स। फोर्स के लिए बुलेट जैकेट।

पुलिस शांत हो रही है तो हौसला जा रहा है गया
कपूरथला और जालंधर में बने हमसब पर पुलिस ने नहीं लिया कोई एक्शन। इससे अमृतपाल का हौसला बढ़ा और उसने अपना विशेष विवरण दिया। उसने खालसा समान के नाम पर हर दूसरे गांव में स्टेज तैयार करवाई। युवाओं को अमृत छकाने की बात कहने वाला अमृतपाल स्टेट से हमेशा विभिन्न और दूसरे धर्मों के लिए कड़े शब्दों का प्रयोग करने लगता है। इसके बाद भी जब पुलिस चुप रही तो अमृतपाल ने सीधे पंजाब पुलिस को ही ललकारना शुरू कर दिया।

फरवरी में सक्रिय हुआ पुलिस
दो-तीन महीने तक अमृतपाल की गतिविधियों को इग्नोर करने वाली पंजाब पुलिस ने 16 फरवरी को अमृतपाल, उसके 6 करीबी साथियों और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ अमृतसर जिले के अजनाला थाने में प्राथमिकी दर्ज की। यह प्राथमिकी रोपड़ जिले में चमकौर साहिब के रहने वाले बरिंदर सिंह की शिकायत में दर्ज की गई। बरिंदर सिंह ने अमृतपाल का अपहरण कर उसे मारने के आरोप लगाए।

इस एफआईआर के दो दिन बाद, 18 फरवरी को पुलिस ने अमृतपाल के करीबी लवप्रीत सिंह स्टॉर्म को पकड़ लिया। लव सिंह स्टॉर्म गुरदासपुर जिले का तिबिड़ गांव रहने वाला था। अपने साथी का कब्जा से अमृतपाल तिलमिला गया।

23 फरवरी अजनाला पुलिस स्टेशन पर हमला, पूरे दो महीने बाद 23 अप्रैल अमृतपाल पुलिस की गिरफ्त में।

23 फरवरी अजनाला पुलिस स्टेशन पर हमला, पूरे दो महीने बाद 23 अप्रैल अमृतपाल पुलिस की गिरफ्त में।

केंद्रीय गृहमंत्री और पंजाब पुलिस को सीधा रैकेट
​​​​​अमृतपाल अपने साथी लवप्रीत सिंह तूफान की गिरफ्तारी से बौखला गया और पंजाब पुलिस को सीधे-सीधे धमकाना शुरू कर दिया। वह लुका नहीं रुका और खालिस्तान का विरोध करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पंजाब के भगवंत मान का हश्र पूर्व प्रधान मंत्री गांधी जैसा दावा करने का दावा करते हैं।

अमृतपाल नहीं रुका। 22 फरवरी को उसने अचानक घोषणा कर दी कि उसके साथी लवप्रीत सिंह तूफान को छुड़वाने के लिए वह और उसके समर्थक 23 फरवरी को अजनाला थाने के बाहर इक्ट्ठा होंगे।

पालकी साहिब की आड़ में किया गया थाने पर हमला।

पालकी साहिब की आड़ में किया गया थाने पर हमला।

23 फरवरी को पालकी साहिब की आड़ में थाने पर हमला 23 फरवरी की सुबह 11 बजे अमृतपाल के अजनबी ने अजनाला थाने को घेर लिया। करीब एक बजे अमृत श्री गुरु ग्रंथ से जुड़े पालकी साहिब को आगे दर्ज करें और थाने पर धावा बोल दिया। अमृतपाल के झटके के हमलों में पूर्व अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और वर्तमान में पंजाब पुलिस के एसपी जुगराज सिंह के सिर में 17 टांके आए। 5 अन्य पुलिसवाले भी गंभीर रूप से घायल हो गए। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की किसी तरह की बेअदबी न हो, इसलिए पंजाब पुलिस बैकफुट पर रही।

इससे अमृतपाल का हौसला और बढ़ गया और उसने दबदबा दिखाते हुए अपने साथी के प्रेम तूफान को उठा लिया। अमृतपाल और उसके अत्याचार ने इस घटना से संदेश दिया कि उनके आगे अब पंजाब पुलिस और सरकार समेत पूरा सिस्टम बौना हो गया है।

कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी।

कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी।

अब पढ़िए…किस तरह सरकार-पुलिस कार्रवाई में आई
​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​ कि कि आप को रोकने के लिए अमरपाल के आगे बढ़ने के लिए पंजाब और केंद्र सरकार के दावे संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन अमृतपाल’ को तैयार किए गए हैं। पंजाब पुलिस ने अजनाला थाने पर हुए हमले के दो दिन बाद, 25 फरवरी से इसकी योजना शुरू कर दी। सब कुछ प्लांड कैसे किया गया। इंटेलिजेंस नेपाल ने अमृत के करीबियों की पूरी रिपोर्ट तैयार की। उनके दशकों का रिकॉर्ड खंगाला।

पंजाब के सीएम भगवंत मान खुद दिल्ली गए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले। उसके बाद उसके केंद्र ने सरकार पैरामिलिट्री फोर्स की 18 कंपनियों को पंजाब में भेज दिया। ऑपरेशन की पूर्ण-प्रमाणन योजना के लिए पंजाब पुलिस के शीर्ष उपक्रमों के कई रूप सामने आए। गिरफ्तारी के बाद अमृतपाल और उनके करीबी साथियों को असम की डिब्रूगढ़ जेल में रखने की योजना को पहले ही अंतिम रूप दे दिया गया।

15 से 17 मार्च तक अमृतसर में G20 देशों का सम्मेलन खत्म होने का इंतजार किया गया और 18 मार्च की सुबह ही ऑपरेशन लॉन्च किया गया। दो दिन की कार्रवाई में पुलिस अमृतपाल के 114 करीबियों को दबोच लिया। अमृतपाल की पूरी भविष्यवाणी, गनमैन पकड़े गए थे। पुलिस ने अवैध हथियारों में भारी संख्या में कारतूस, वॉकी-टॉकी, अमृतपाल की प्राइवेट आर्मी जा रही आनंदपुर कोलसा फोर्स (AKF) से आर्या सामान और बुलेट प्रूफ जैकेट को बरकरार रखा है।

कुछ इस तरह का हिस्सा अमृतपाल को दिखाता है।

कुछ इस तरह का हिस्सा अमृतपाल को दिखाता है।

पुलिस की प्लानिंग से हुआ भगोड़ा
17 मार्च तक अमृतपाल की छवि पंजाब में ऐसे दबंग खालिस्तान समर्थक नेता की थी जो सीधी सरकार से टकराकर जुर्राब रखता था। जो केंद्र सरकार तक बारीकियों की चेतावनी देती है। मगर, 18 मार्च से शुरू हुए पंजाब पुलिस के ऑपरेशन के 2 दिन के अंदर अमृतपाल सिंह की छवि भगोड़ा की बन गई।

4 पॉइंट्स ने अमृतपाल को विलेन बना दिया

1. अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी से न डरने की बातें हुईं लेकिन पुलिस से डरकर भगोड़ा हो गया। 36 दिनों में 400 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। सप्ताहभर के अंदर इनमें से करीब 350 लोग छोड़ दिए गए। इनमें से कई लोग खुद कहते हैं कि अमृतपाल को सरेंडर कर देना चाहिए।

2. अमृतपाल का एक ऑडियो सामने आया जिससे लड़कियों के बारे में उनकी सोच का पता चल गया। इस ऑडियो में अमृतपाल एक महिला को उसकी तस्वीर और साथ में खुले में घूमते हुए ब्लैक मेल दिखाता है। ऑडियो में उससे कई लड़कियों के साथ संबंध होने का भी खुलासा हुआ।

3. पुलिस जांच में अमृतपाल के आईएसआई से संबंध उजागर हुए। करोड़ों रुपए की फंडिंग का पता चला, जो संस्था संगठन और पाकिस्तान से अमृत को डॉयरेक्ट-इंडॉयरेक्ट मिल रही थी। इससे उसकी छवि आईएसआई एजेंट बन गई।

4. अमृतपाल ने नेपाल चौका। वह पीलीभीत तक गया, लेकिन सख्ती के कारण नेपाल नहीं जा सका। उनकी यह छवि बन गई कि जो पंजाब को खालिस्तान बनाने की बात करता है, वे खुद पंजाब छोड़ विदेश जाने की फिराक में हैं।

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