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2019 में लाइव 77 लाख जानें:भारत में 6.8 लाख लोगों की मौत, ये 5 बैक्टीरिया जिम्मेदार

2019 में बैक्टीरिया के कारण दुनिया की 13% आबादी ने अपनी जान गंवाई है। - Dainik Bhaskar2019 में बैक्टीरिया के कारण दुनिया की 13% आबादी ने अपनी जान गंवाई है।बैक्टीरिया के कारण साल 2019 में दुनिया भर में 77 लाख लोगों की मौत हुई। वहीं, भारत में यह संख्या 6 लाख 80 हजार रही है। यह आंकड़े लैंसेट जर्नल की एक फ्लैश रिपोर्ट में प्रकाशित हुए हैं। इस अनुसंधान के लिए 204 देशों और क्षेत्रों के लोगों की जानकारी जुटाई गई।

बैक्टीरिया से हर 8वें इंसान की मौतरिसर्च में कहा गया है कि जोखिम के जोखिम के साथ जानबूझ कर बन रहे हैं। ये दुनिया में दिल की बीमारी के बाद मरने की दूसरी सबसे बड़ी वजह बन गए हैं। इनकी वजह से 2019 में दुनिया की 13% आबादी ने अपनी जान पहचान बना ली है। यानी संक्रमण से हर 8 में एक इंसान की मौत हो रही है। इसके लिए 33 बैक्टीरिया और उनके होने वाले 11 संक्रमण जिम्मेदार हैं।भारत में इन 5 बैक्टीरिया से जानें लीं
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 5 बैक्टीरिया सबसे ज्यादा जानें जाते हैं। नाम ई. कोलाई (ई. कोलाई), एस. निमोनिया (एस निमोनिया), के। निमोनिया (के. निमोनिया), एस. ऑरियस (एस। ऑरियस) और ए। बोमेनियन (A. Baumannii) हैं। केवल ई. कोलाई से ही देश में 1 लाख 60 हजार गड़बड़ियां हुई हैं। विश्व में एस. ऑरियस और ई। कोलाई से 8 लाख 64 पीड़ित, जो एचआईवी/एड्स से होने वाली मौतों से कहीं अधिक हैं।

  • इन दायित्वों के लिए जिम्मेदार हैं बैक्टीरिया
  • ई. कोलाई: यह बैक्टीरिया की एक फैमिली है। इनमें से कुछ पेट में कई इन्फेक्शन फैलते हैं। इससे कई बार किडनी खराब हो जाती है और मौत का खतरा बढ़ जाता है।एस. निमोनिया: स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया बैक्टीरिया कान और रक्त में संक्रमण फैलाना है। इससे अक्सर बच्चे प्रभावित होते हैं। इंफेक्शन दिमाग और सांस की नली पर असर डालता है।के. न्यूमोनिया: क्लेबसिएला न्यूमोनिया बैक्टीरिया ब्लड इन्फेक्शन और सर्जरी वाले हिस्से को दिखाता है। साफ-सफाई न रखने पर इससे मौत का खतरा होता है।
    एस. ऑरियस: स्टेफाइलोकोकस ऑरियस बैक्टीरिया से ज्यादातर त्वचा संक्रमण से जुड़े रोग होते हैं। यह सांस की नली को अपना घर बनाता है।
  • ए. बोमेनियन: एसिनेटोबैक्टर बोमेनियन बैक्टीरिया कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को अपनी चपेट में लेता है। यह रक्त, यूरिनरी संपर्क और फेफड़े में संक्रमण की वजह बनता है।
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