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2जी घोटाले पर भिड़े सुधांशु त्रिवेदी और सपा प्रवक्ता, बोले

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि, 2G पर पीएसी(पब्लिक अकाउंट्स कमेटी) की रिपोर्ट जिस दिन आई, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि मैं पीएसी में आने में तैयार हूं। रिपोर्ट दाखिल नहीं करने दी गई।

देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की शुरुआत 10 फरवरी से होगी। इसके नतीजे 10 मार्च को सामने आएंगे। इस बीच टीवी न्यूज चैनलों पर चुनाव से जुड़ी बहस भी खूब देखी जा रही है। जिसमें तमाम राजनीतिक दल आपस में आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। ऐसे में न्यूज 18 के एक कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता के बीच जबरदस्त नोकझोक देखने को मिली।

सपा प्रवक्ता का आरोप: बता दें कि कार्यक्रम में सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने भाजपा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। ऐसे में भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा, अभी कुछ दिन पहले CAG की एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है 2005 से 2017 के बीच नोए़डा में भूमि आवंटन से जुड़ा 52 हजार करोड़ रुपये तक का घपला हुआ है।

जुमला फेंककर लोगों का वोट लेना चाहते हैं: इस पर सपा प्रवक्ता ने कहा कि आखिर पिछले पांच साल से क्या कर रहे थे, चुनाव से पहले रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे थे? भदौरिया ने कहा कि 2G घोटाले में भी दो लाख करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया था। बाद में इन्हीं की सरकार ने घोटाला होने से मना कर दिया। ये वो लोग है जो झूठ और जुमला फेंककर लोगों का वोट लेना चाहते हैं।

इसपर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि, 2G पर पीएसी(पब्लिक अकाउंट्स कमेटी) की रिपोर्ट जिस दिन आई, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि मैं पीएसी में आने में तैयार हूं। रिपोर्ट दाखिल नहीं करने दी गई। इन लोगों ने बवाल करना शुरू कर दिया। बाद में एक हफ्ते के अंदर सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बदलनी शुरू कर दी।

सुधांशु त्रिवेदी को जबाव देते हुए अनुराग भदौरिया ने कहा कि आखिर पिछले सात सालों से आप सत्ता में हैं, आपने कौन सा झंडा उखाड़ा। इतने सालों से आप सरकार में है, आपने क्या किया, क्यों नहीं रिपोर्ट ले आए, वो बताइए।

2जी घोटाला: बता दें कि 2G घोटाला साल 2010 में सामने आया था। भारत के महालेखाकार और नियंत्रक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए थे। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर आरोप लगाए गए थे कि कंपनियों को नीलामी की बजाए पहले आओ और पहले पाओ की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे। आरोप था कि अगर नीलामी के आधार पर लाइसेंस दिए जाते तो ख़जाने को कम से कम एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए और हासिल हो सकते थे।

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