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18 साल में सबसे अधिक काम मौजूदा लोकसभा में : बिरला

सत्रहवीं लोकसभा के पहले आठ सत्रों की उत्पादकता 106 फीसद रही, जो पिछली तीन लोकसभाओं से अधिक है।

सत्रहवीं लोकसभा में कानून के निर्माण और जनहित से जुड़े विषयों पर न सिर्फ चर्चा का समय बढ़ा है, बल्कि संवाद का स्तर पर भी ऊंचा उठा है। लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला ने तीन साल पूरे किए हैं। उन्होंने 19 जून, 2019 को पदभार संभाला था। इस मौके पर उन्होंने जनसत्ता से विशेष बातचीत में ये बातें कहीं।

बिरला ने बताया कि 18 साल में सबसे ज्यादा काम 17वीं लोकसभा के पहले तीन साल में हुआ। 2004 से 2009 के बीच 14वीं लोकसभा की उत्पादकता 86 फीसद, जबकि 2009 से 2014 के बीच 15वीं लोकसभा की उत्पादकता 71 फीसद रही। 2014 से 2019 तक लोकसभा में 95 फीसद कार्य हुआ। 17वीं लोकसभा के पहले तीन साल में ही उत्पादकता ने 106 फीसद का स्तर छुआ। उन्होंने कहा कि इसे एक बड़ी उपलब्धि इसलिए माना जाएगा कि तीन साल में दो साल कोविड से प्रभावित रहे।

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि हमने कोरोना की परिस्थितियों में स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया, जिससे कोरोना के सबसे खराब दौर में 17वीं लोकसभा के चौथे सत्र में 167 फीसद कार्य हुआ जो लोकसभा के 70 साल के इतिहास में सर्वाधिक है। इतना ही नहीं, इस सत्र में सांसदों की उपस्थिति सामान्य परिस्थितियों में आयोजित सत्रों से अधिक रही।

उन्होंने बताया कि17वीं लोकसभा के पहले तीन साल तक सदन चर्चा और संवाद दिखाई दिया। 14वीं लोकसभा के पहले आठ सत्रों में सदन में 929 घंटे, 15वीं लोकसभा में 798 घंटे, 16वीं लोकसभा में 929 घंटे जबकि 17वीं लोकसभा में 995 घंटे तक विषयों पर चर्चा हुई। इन आठ सत्रों के दौरान सदन ने निर्धारित अवधि से 254.46 घंटे अधिक कार्य किया। 17वीं लोकसभा के दौरान ऐसे कई अवसर आए जब सदन की कार्यवाही रात 12 बजे बाद तक चली। इसमें सुखद यह रहा कि सांसदों भी ने देर रात कार्यवाही के संचालन में सक्रिय सहभागिता दिखाई।

बिरला ने कहा कि देश और जनता के हित में कानून के निर्माण की दिशा में भी 17वीं लोकसभा में अधिक सक्रियता और सहभागिता दिखाई दी। 14वीं लोकसभा में 107 विधेयक प्रस्तुत जबकि 120 विधेयक पारित किए गए थे। 15वीं लोकसभा में 114 विधेयक प्रस्तुत और 95 विधेयक पारित, 16वीं लोकसभा में 96 विधेयक प्रस्तुत और 94 विधेयक पारित किए गए।

वहीं, 17वीं लोकसभा के दौरान 139 विधेयक प्रस्तुत और 149 विधेयक पारित हुए। 15वीं और 16वीं लोकसभा की तुलना में डेढ़ गुना अधिक विधेयक तो परित हुए ही हर विधेयक पर चर्चा का समय भी बढ़ा। 14वीं और 15वीं लोकसभा के दौरान जहां हर विधेयक पर औसतन 87 और 85 मिनट ही चर्चा हुई, वहीं 16वीं लोकसभा में प्रत्येक विधेयक पर औसतन 123 तथा 17वीं लोकसभा में 132 मिनट चर्चा की गई।

विधेयकों पर चर्चा करने वाले सदस्यों की संख्या भी 14वीं, 15वीं और 16वीं लोकसभा से लगभग दोगुनी रही।

समय पर पूरा हो जाएगा नए संसद भवन का कार्य

बिरला ने बताया कि यदि नए संसद भवन को हमें 30 अक्तूबर, 2022 तक सौंप दिया जाता है तो हम आवश्यक परीक्षण के बाद इस साल का शीत सत्र नए भवन में आयोजित करने की स्थिति में रहेंगे। उन्होंने बताया कि भवन कार्य लक्ष्य से मात्र पांच से सात दिन पीछे चल रहा है जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। भवन के गुंबद का कार्य प्रगति पर है और इसके 10 से 15 दिन मे पूरा हो जाने की संभावना है। बिरला ने कहा कि यह नया भवन एक ‘हरित भवन’ होगा जिसमें पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण के सभी इंतजाम किए गए हैं।

हर सदस्य की सीट के समक्ष मल्टीमीडिया स्क्रीन होगा, जिसके माध्यम से वे सदन में मतदान, उपस्थिति दर्ज करवाना तथा सदन में अभिव्यक्ति का अवसर देने का अनुराध आदि कार्य कर सकेंगे।

महिला सांसदों की रेकार्ड भागीदारी रही

बिरला ने बताया कि 17वीं लोकसभा के दौरान महिला सांसदों ने रेकार्ड भागेदारी की है। इस दौरान पहली लोकसभाओं के मुकाबले महिला सांसदों ने शून्यकाल, प्रश्नकाल और विभिन्न चर्चाओं में बढ़चढ़ कर भाग लिया है। पिछले साल संसद के शीत सत्र के दौरान नौ दिसंबर को शून्यकाल के दौरान 50 फीसद महिला सांसदों को उनके क्षेत्र के मामलों को उठाने की इजाजत दी थी।

सदन में तख्तियां दिखाना और नारेबाजी सही नहीं

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन एक मर्यादा और कुछ परंपराओं से चलता है। इन मर्यादाओं का सांसदों को ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने सदस्यों को उनके मुद्दों उठाने व उन मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन में भेजा है। लेकिन कुछ सदस्य इस बात को भूल कर सदन में तख्तियां लहराते हैं और नारेबाजी करते हैं, जो ठीक नहीं है। किसी भी समस्या का हल बातचीत से निकल सकता है। इसलिए बातचीत और चर्चा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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