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1 सॉफ्टड्रिंक पीने से 12 मिनट घटती है उम्र:चीन में मिला नया वायरस, 5 हजार साल पहले भी लोगों को नहीं पचता था दूध, हेल्थब्रीफ

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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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नमस्कार,

आप अपनी और अपने परिवार की सेहत का ध्यान बेहतर ढंग से रख सकें, इसके लिए हम ‘वीकली हेल्थ ब्रीफ’ लाए हैं। इसमें आपको मिलेंगे प्रमुख हेल्थ अपडेट्स, महत्वपूर्ण रिसर्च से जुड़े आंकड़े और डॉक्टरों की रेलेवेंट सलाह। इसे मात्र 2 मिनट में पढ़कर आपको सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारियां मिलेंगी और आप परिवार का बेहतर ख्याल रख पाएंगी।

1. मिशिगन यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च; इनको खाने से इस मात्रा में बढ़ेगी-घटेगी उम्र

अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के डाइट विशेषज्ञों ने खाने के उम्र पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच की है। लगभग 6 हजार फूड आइटम्स पर रिसर्च के बाद खाने के इन सामानों के बारे में ये नतीजा सामने आया। इसके मुताबिक पिज्जा खाने से आपकी उम्र 8 मिनट, चीज बर्गर से 9 मिनट, हॉट डॉग से 36 मिनट, कोल्ड ड्रिंक से 12.4 मिनट और प्रोसेस्ड मीट खाने से 25 मिनट कम होती है। जबकि प्रति सर्विंग केला खाने से आपकी उम्र 14 मिनट, टमाटर से 4 मिनट, सैल्मन मछली से 16 मिनट, अवोकाडो से 1.5 मिनट और पीनट बटर-जैम सैंडविच से 33 मिनट तक बढ़ जाती है।

2. वेजिटेरियन महिलाओं को हिप फ्रैक्चर का खतरा 33% तक ज्यादा

दुनिया भर में लोग तेजी से शाकाहार अपना रहे हैं। सेहत और पर्यावरण पर इसके कई फायदे भी हैं। लेकिन ब्रिटेन में हुए एक नए रिसर्च में इससे होने वाले नुकसान की बात सामने आई है। ‘बीएमसी मेडिसिन जर्नल’ में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के इस रिसर्च में पाया गया है कि शाकाहारी महिलाओं में हिप फ्रैक्टर का खतरा मांस खाने वाली महिलाओं के मुकाबले 33% तक ज्यादा होता है। करीब 30 हजार महिलाओं पर 20 साल तक रिसर्च करने के बाद यह पाया गया कि मांस, मछली और अंडे खाने वाली महिलाओं के हिप की हड्डी ज्यादा मजबूत थी।

3. कोविड-19 से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं, पहले कहा गया कि नपुंसक हो रहे

दुनिया भर में कोविड-19 फैलने के बाद से यह माना जाने लगा था कि इससे पुरुषों की प्रजनन क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है। कई डॉक्टर्स भी इस राय से सहमत थे। हालांकि इस बारे में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया जा रहा था। अब ‘एंडोक्रिनोलॉजिकल इन्वेस्टिगेशन जर्नल’ में छपे एक रिसर्च में इस दावे को गलत बताया गया है। कोविड से जूझ चुके 80 पुरुषों पर अध्ययन के बाद रिसर्चर्स इस नतीजे पर पहुंचे कि उनकी प्रजनन क्षमता कभी कोविड से संक्रमित न होने वाले पुरुषों जितनी ही है।

4. कोविड-19 के बाद चीन में एक और खतरनाक वायरस मिला है, इसके बारे में सभी मुख्य बातें-

5. खाने के बाद थोड़ा टहलना बना देगा सेहत, शुगर, बीपी और मोटापा भी होगा कंट्रोल

खाने के बाद अगर आप थोड़ी देर टहलने जाती हैं तो यह आपकी सेहत के लिये काफी फायदेमंद साबित होगा। बड़े-बुजुर्ग लंबे समय से खाने के बाद टहलने की नसीहत देते रहे हैं। लेकिन अब सांइटिफिक रिसर्च में भी इसकी पुष्टि हो गई है। ‘स्पोर्ट्स रिसर्च जर्नल’ में छपे रिसर्च के मुताबिक खाने के बाद थोड़ी देर टहलने से इन्सुलिन लेवल, बीपी और मोटापा कंट्रोल होता है। रिसर्च पेपर में यह भी बताया गया है कि लंबे समय तक बैठे रहने के मुकाबले थोड़ी-थोड़ी देर में खड़ा होना भी सेहत के लिए फायदेमंद है।

6. डिप्रेशन में काफी फायदेमंद है विटामिन D सप्लिमेंट, मेटा-एनालिसिस में सामने आई बात

विटामिन D सप्लिमेंट की नियमित डोज डिप्रेशन के मरीजों को काफी आराम दे सकती है। इस बारे में दुनिया भर में हुए 40 रिसर्चों का मेटा-एनालिसिस किया गया; जिसके बाद रिसर्चर्स इस नतीजे पर पहुंचे कि विटामिन D सप्लिमेंट अवसाद के लक्षण को कम करने में काफी मददगार है। शोध में बताया गया है कि अवसाद के मरीजों को आवश्यकतानुसार 50 से 100 माइक्रोग्राम तक विटामिन D सप्लिमेंट दिया जा सकता है।

7. बच्चों में तेजी से फैल रहा है टाइप-2 डायबिटीज, पहले टाइप 1 का ही खतरा था

हाल के दिनों में हुए कई रिसर्चों में यह बात सामने आई है कि भारतीय बच्चे तेजी से टाइप- 1 के साथ-साथ टाइप-2 डायबिटीज का भी शिकार हो रहे हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के ताजा आंकड़े के मुताबिक फिलहाल देश भर में 2.3 लाख बच्चे टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे हैं। लेकिन अब यह बात सामने आई है कि भारतीय बच्चों को टाइप-2 डायबिटीज का भी खतरा है। यहां दोनों टाइप के डायबिटीज को भी जान जरूरी है-

8. पांच हजार साल पहले भी लैक्टोस इंटॉलरेंट होते थे इंसान, नहीं पचता था दूध

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि अधिक मात्रा में दूध के सेवन से इंसानों में लैक्टोस इंटॉलरेंस की समस्या बढ़ी है। लेकिन एक हालिया रिसर्च में यह बात सामने आई है कि लैक्टोस इंटॉलरेंस होने का दूध के सेवन से कोई संबंध नहीं है। ‘नेचर जर्नल’ में पब्लिश इस रिसर्च के मुताबिक फिलहाल दुनिया भर के केवल एक तिहाई वयस्क ही लैक्टोस को पचा पाते हैं। रिसर्च में यह बात भी सामने आई कि इंसानों में यह समस्या नई नहीं है। आज से लगभग 5 हजार साल पहले भी इंसान लैक्टोस इंटॉलरेंट होते थे।

9. बारिश का पानी भी नहीं रहा शुद्ध, पीने पर होंगी कई बीमारियां

अभी तक बारिश के पानी को सबसे साफ माना जाता था। लेकिन स्वीडन की स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च में पाया कि दुनिया में किसी भी जगह होने वाली बारिश का पानी पीने लायक नहीं बचा है। दुनिया भर से इकट्ठा किए गए डाटा के अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इस पानी में खतरनाक कैमिकल्स की मात्रा तय मानक से कई गुना अधिक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बारिश के पानी को पीने से हेपेटाइटिस, शिगेलोसिस, टायफाइड, डायरिया पेचिश, हैजा जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

10. ट्रेडमिल पर भागने के मुकाबले पार्क में टहलना ज्यादा फायदेमंद

जिम जाकर ट्रेडमिल पर पसीना बहाने के मुकाबले उतनी ही मात्रा में पार्क या किसी खुले मैदान में टहलना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। ‘बीएमसी पब्लिक हेल्थ जर्नल’ के एक रिसर्च के मुताबिक ट्रेडमिल पर भागने वालों की अपेक्षा पार्क में टहलने वालों की शारीरिक और मानसिक सेहत ज्यादा अच्छी पाई गई। रिसर्च में यह भी पाया गया कि घर करे अंदर वर्क-आउट करने के मुकाबले खुली जगह पर ऐसा करना थकान, गुस्सा और कमजोरी को दूर करता है। बाहर वर्क-आउट करने वाले लोग ज्यादा एनर्जिटिक महसूस करते हैं।

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