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हीरा बिजनेस की 9 साल की बेटी बनेंगी संत:5 आकाशगंगा की जानकारियां, सूरत में 35 हजार लोगों की मौजूदगी में दीक्षा शुरू

सूरत19 मिनट पहले

पिछले साल अक्टूबर में देवांशी की मुमुक्षु शोभायात्रा निकाली गई थी।

सूरत के हीरा व्यापारी संघवी मोहन भाई की पोती और धनेश-अमी बेन की 9 साल की बेटी देवांशी दीक्षा ले रहे हैं। देवांशी दीक्षा महोत्सव वेसू में 14 जनवरी को शुरू हुआ था। आज यानी बुधवार को सुबह 6 बजे से उनकी दीक्षा शुरू हो चुकी है। देवांशी 35 हजार से ज्यादा लोगों की मौजूदगी में जैनाचार्य कीर्तियशसूरीश्वर महाराज से दीक्षा ले रहे हैं।

देवांशी के परिवार के ही स्व. ताराचंद का भी धर्म के क्षेत्र में एक विशेष स्थान था। उन्होंने श्री सम्मेदशिखर का भव्य संघ आवंटन और अबू के पहाड़ों के नीचे संघवी भेरूतारक तीर्थ का निर्माण किया था।

संगीत, भरतनाट्यम और स्केटिंग में विशेषज्ञ देवांशी हैं
सूरत में ही देवांशी की साल यात्रा निकाली गई थी। इसमें 4 हाथी, 20 घोड़े, 11 ऊंट थे। इससे पहले मुंबई और एंटवर्प में भी देवांशी की सालीदान यात्रा निकली थी। देवांशी 5 आकाशगंगा की जानकारी। वह संगीत, स्केटिंग, मेंटल मैथ्स और भरतनाट्यम में जानकार है। देवांशी को वैराग्य शताब्दी और तत्वशास्त्र के अध्याय जैसे महाग्रंथ कंठस्थ हैं।

पिता धनेश और मां अमी बेन के साथ देवांशी।  सूरत में देवांशी की साल यात्रा निकाली गई थी।

पिता धनेश और मां अमी बेन के साथ देवांशी। सूरत में देवांशी की साल यात्रा निकाली गई थी।

आज दीक्षा के बाद देवांशी संयम जीवन ग्रहण करता है।

आज दीक्षा के बाद देवांशी संयम जीवन ग्रहण करता है।

कभी नहीं देखा टीवी, 8 साल तक 357 दीक्षा दर्शन, 500 किमी। पैदल यात्रा की
देवांशी ने 8 साल की उम्र तक 357 दीक्षा दर्शन, 500 किमी पैदल पैदल, तीर्थों की यात्रा व कई जैन ग्रन्थों का वाचन कर तत्व ज्ञान को समझा। देवांशी के माता-पिता अमी बेन धनेश भाई संघवी ने बताया कि उनकी बेटी ने कभी टीवी नहीं देखा, जैन धर्म में प्रतिबंधित चीजों का कभी इस्तेमाल नहीं किया। न ही कभी भी अक्षर लिखे हुए कपड़े पहने। देवांशी ने न केवल धार्मिक शिक्षा में, बल्कि क्विज में स्वर्ण पदक भी जलाया। भरतनाट्यम, योग में भी वह प्रवीण है।

4 महीने की उम्र में त्याग दिया था रात का खाना
देवांशी जब 25 दिन की थी तब से नवकारसी का पच्चखान लेना शुरू किया। 4 महीने की थी तब से रात के खाने का त्याग कर दिया था। 8 महीने की थी तो रोज त्रिकाल पूजन की शुरुआत की। 1 साल की तब से हर दिन नवकार मंत्र का जाप किया गया। 2 साल 1 महीने से गुरुओं से धार्मिक शिक्षा लेना शुरू की और 4 साल 3 महीने की उम्र से गुरुओं के साथ रहना शुरू कर दिया था।

चुनिंदा तस्वीरों में देखिए देवांशी के दीक्षा फेस्टिवल के पल…

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