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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त पर दी थी जमानत; कोर्ट ने लगाई रोक

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नई दिल्ली16 दिन पहले

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जस्टिस एएम खानविल्कर और रविंद्र भट्‌ट की बेंच ने जजों और वकीलों के लिए जेंडर सेंसटाइजेशन के संबंध में कई दिशा-निर्देश जारी किए। - Dainik Bhaskar

जस्टिस एएम खानविल्कर और रविंद्र भट्‌ट की बेंच ने जजों और वकीलों के लिए जेंडर सेंसटाइजेशन के संबंध में कई दिशा-निर्देश जारी किए।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसके तहत यौन उत्पीड़न के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त पर जमानत दी गई थी। इसके साथ ही जस्टिस एएम खानविल्कर और रविंद्र भट्‌ट की बेंच ने जजों और वकीलों के लिए जेंडर सेंसटाइजेशन के संबंध में कई दिशा-निर्देश जारी किए।

सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट अपर्णा भट्‌ट और आठ अन्य वकीलों ने 30 जुलाई 2020 के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट अपर्णा भट्‌ट और आठ अन्य वकीलों ने 30 जुलाई 2020 के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका लगाई थी। महिला वकीलों ने कहा कि ऐसे आदेश महिलाओं को एक वस्तु की तरह दिखाते हैं।

अदालतें संवेदनशीलता के साथ फैसले करें : पिटिशनर

पिछली सुनवाई के दौरान यचिकाकर्ता वकीलों की ओर से संजय पारिख ने कहा था कि इस तरह की शर्त के साथ फैसले देने के मामले में सिर्फ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ही नहीं बल्कि ज्यादातर हाईकोर्ट और निचली अदालतों के लिए भी निर्देश चाहते हैं। इन मामलों में अदालतें संवेदनशीलता के साथ फैसले करें। महिलाओं को वस्तुओं की तरह पेश ना करें।

क्या है मामला

20 अप्रैल 2020 को पड़ोस में रहने वाली महिला के घर में घुसकर छेड़छाड़ के आरोप में जेल में बंद विक्रम बागरी ने इंदौर में जमानत याचिका दायर की थी। 30 जुलाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने छेड़छाड़ के एक आरोपी को सशर्त जमानत दी थी। इसमें एक शर्त यह थी कि आरोपी रक्षाबंधन पर पीड़ित के घर जाकर उससे राखी बंधवाएगा और रक्षा का वचन देगा।

आरोपी विक्रम को पुलिस ने 2 जून 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके बाद से वह जेल में ही बंद था। सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद जस्टिस रोहित आर्या की सिंगल बेंच ने आरोपी को 50 हजार के मुचलके के साथ जमानत दी थी। इसके साथ ही पीड़िता से राखी बंधवाने का फैसला सुनाया था। हालांकि, आरोपी विक्रम बागरी उज्जैन जेल में बंद है।

तस्वीरें कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने को कहा था

हाईकोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह 3 अगस्त 2020 को रक्षाबंधन के दिन 11 बजे अपनी पत्नी को साथ लेकर पीड़ित के घर राखी और मिठाई लेकर जाएगा और पीड़िता से आग्रह करेगा कि वह उसे भाई की तरह राखी बांधे। इसी के साथ आरोपी पीड़िता की रक्षा का वचन देकर भाई के रूप में परंपरा के मुताबिक, उसे 11 हजार रुपए देगा और पीड़िता के बेटे को भी 5 हजार रुपए कपड़े और मिठाई के लिए देगा। कोर्ट ने इन सबकी तस्वीरें रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश भी दिए थे।

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