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सीआरपीएफ के अफसर नलिन प्रभात पर मेहरबानी: दतेवाड़ा के ताड़मेटला में 76 जवानों की शहादत के जब डीआईजी नलिन थे, बीजापुर एनकाउंटर के समय के आईजी नक्सल ऑपरेशन

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रायपुर ११ घंटे पहले ) लेखक: विश्वेश ठाकरे

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    छत्तीसगढ़ में CRPF के IG नक्सल ऑपरेशन नलिन प्रभात। इनके पास ही बीजापुर ऑपरेशन की कमान थी। - Dainik Bhaskar

    छत्तीसगढ़ में CRPF के IG नक्सल ऑपरेशन नलिन प्रभात उनके पास ही बीजापुर ऑपरेशन की कमान थी।

    • ताड़मेटला हमले में नलिन के खिलाफ इंक्वायरी हुई, इसके बावजूद प्रमोशन और बड़ी जिम्मेदारी
    • बीजापुर हमले के पीछे प्लानिंग से लेकर एग्ग्यूशन तक बड़ी लापरवाही, इंटेलीजेंस पर भी सवाल

    छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में लगभग 11 साल पहले CRPF के 76 जवान नक्सली हमले में शहीद हो गए। थे। उस समय सीआरपीएफ के डीआईजी नलिन प्रभात थे। अब शनिवार (3 अप्रैल) को ठीक ऐसे ही एनकाउंटर में 23 युवा शहीद हुए हैं, तो नलिन प्रभात आईजी नक्सल ऑपरेशन बन चुके हैं। उस समय नलिन प्रभात को ताड़मेटला कांड में जिम्मेदार मानकर इन्क्वायरी भी चली गई थी। अब सवाल यह है कि पिछली नाकामी के बावजूद नलिन प्रभात को यहां बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई? गलत ऑपरेशन, सर्चिंग पर फोर्स को प्रेषक की जिम्मेदारी किसकी है?

    सवाल यह भी है कि सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षाबलों का इंटेलिजेंस क्या है कमजोर है कि 250 से ज्यादा नक्सलियों की बड़ी तैयारी की सूचना 20 दिन में भी उनके पास नहीं पहुंच पाएगी। ये सिर्फ दो मामले नहीं हैं। बस्तर की धरती रोज जवानों के खून से लाल हो रही है और इसका एक ही कारण दिख रहा है, फोर्स के बड़े अफसरों की प्लानिंग, एग्जीक्वशन, ग्राउंड कनेक्ट और इंटेलिजेंस में बड़ी लापरवाही।

    पहले कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में दोषी पाए गए थे नलिन

  • अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों को ऐसे ही घेर लिया था। चिंतलनार कैंप के 150 जवानों को DIG नलिन प्रभात ने ही आदेश देकर 72 घंटे के क्षेत्र सैनिटाइजेशन के लिए कहा था। जब तीसरे दिन यह टुकड़ी वापस लौट रही थी, तो रास्ते में एंबुश लगाकर बैठे नक्सलियों ने पहले विस्फोट से एक पुलिया उड़ाई और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग कर 76 जवानों को मौत के घाट उतार दिया।

    इस मामले की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के साथ गृह मंत्रालय की राममोहन कमेटी ने भी जांच की। जांच में सीआरपीएफ के तत्कालीन आईजी रमेश चंद्रा, डीआईजी नलिन प्रभात, 62 बटालियन केंदरर एके बिष्ट और इंस्पेक्टर संजीव रोडड़े दोषी पाए गए। इन पर पर्याप्त सुरक्षा के बिना फोर्स को क्षेत्र सैनिटाइजेशन के लिए प्रेषक, क्षेत्र के जानकारमंद और डिप्टीेंडरेंट को साथ नहीं भेजना जैसे आरोप लगे। इन चारों अधिकारियों का तबादला कर दिया गया।

    तब CRPF का मेमोरी सेट था, अब सुनियोजित जानकारी ताड़मेटला कांड की जांच कमेटी की रिपोर्ट में पता चला था कि नक्सलियों के पास CRPF का मेमोरी सेट था। इससे वे फोर्स के मूवमेंट की पूरी जानकारी रख रहे थे। इसी के माध्यम से उनके लिए फोर्स के चिंतलनार कैंप वापस लौटने की तारीख, रास्ता, समय पता चल रहा था। ऐसे ही शनिवार को बीजापुर के जोनागुड़ा में नक्सलियों ने सुनियोजित जानकारी देकर फोर्स को फांसाया। नक्सलियों ने अपनी लोकेशन समाचारों के हाथ अधिकारियों तक पहुंचाई ।इसके बाद अधिकारियों ने जवानों को जोनागुड़ा पहुंचने के निर्देश दे दिए।

    पहले IG को जानकारी देने की बात कहकर बच निकले थे प्रभात
    ताड़मेटला कांड के बाद नलिन प्रभात ने कहा था, कि उन्होंने आई.जी. भेजा जानकारी देकर जवानों को भेजा गया था। यह भी कहा गया था कि जो डिप्टीेंडरेंट फोर्स के साथ गया था, वह लगभग 6 महीने तक बटालियन में रहकर आया था। उसे लोकल रूट और स्थानीय नक्शे की जानकारी थी, लेकिन वह अपना काम नहीं कर सका। आज नलिन खुद आईजी नक्सल ऑपरेशन हैं। इंटेलिजेंस सहित पूरी जिम्मेदारी उन पर ही है। कोई भी महत्वपूर्ण ऑपरेशन उनकी इजाजत के बिना नहीं हो सकता है। ऐसे में अब उन्हें सफाई देने में भी मुश्किल होगी।

    एक्सपर्ट्स बोले- जांच के बिना नहीं बता सकते कि डिफ़ॉल्ट कहां हुआ नक्सल ऑपरेशन सहित कई जिम्मेदारियों ने एक रिटायर्ड डीजी का कहना है कि किसी भी मुठभेड़ में कहां चूक हुई, इसकी विस्तृत जांच के बिना नहीं बताया जा सकता है। कई बार डिफ़ॉल्ट इंटेलिजेंस की भी होती है और कई बार ग्राउंड की परिस्थितियाँ इसके लिए जिम्मेदार होती हैं। जब मुठभेड़ हो रही थी, तो कहां से एंबुश तोड़ा जाना था, क्या पोजीशन था, ये सभी बातें बहुत मायने रखती हैं। हमारे युवा विपरीत परिस्थितियों में लड़ाई लड़ रहे हैं। वे पूरे साहस के साथ छिपे हुए नक्सलियों से निपट रहे हैं। उनकी शहादत को सलाम किया जाना चाहिए।

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