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संसद के हंगामे पर सुषमा स्वराज को याद करने लगे लोग, कहा – शायद कभी ऐसे नेता भी होते थे

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कांग्रेस युवा कमेटी के अध्यक्ष श्रीनिवास ने सुषमा स्वराज द्वारा सदन में दिए गए एक भाषण का वीडियो अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा किएक थी संसद,एक था लोकतंत्र,एक थी संसदीय मर्यादाएं एक था।

संसद के हंगामे पर सुषमा स्वराज को याद करने लगे लोग, कहा – शायद कभी ऐसे नेता भी होते थे (फाइल फोटो – पीटीआई)

संसद का मानसून सत्र हंगामे के बीच बुधवार को समाप्त हो गया। राज्यसभा में विपक्षी दलों ने वेल में आकर प्रदर्शन किया था। जिसके बाद सांसदों और मार्शल के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। संसद में हुए हंगामे को लेकर सरकार विपक्ष पर आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष भी सरकार पर लगातार हमलावर है। संसद में हुए इस हंगामे पर लोग सोशल मीडिया पर बीजेपी की नेता सुषमा स्वराज को याद कर रहे हैं। विपक्ष में रहते हुए सुषमा स्वराज जिस तरह से अपनी बातों को रखती थी। उसकी प्रशंसा विरोधी दल के नेता भी करते थे।

सुषमा को याद करते हुए लोग वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। कांग्रेस युवा कमेटी के अध्यक्ष श्रीनिवास ने सुषमा स्वराज द्वारा सदन में दिए गए एक भाषण का वीडियो अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा किएक थी संसद,एक था लोकतंत्र,एक थी संसदीय मर्यादाएं एक था। पक्ष-विपक्ष का रिश्ता अब तो विपक्ष के साथ निजी शत्रुता और तानाशाही के ‘अवशेष’ ही शेष है। दरअसल यह वीडियो तब का है जब 2014 के लोकसभा चुनाव होने वाले थे।

जिसमें सुषमा स्वराज मैं सदन में अपने भाषण देते हुए कहा था कि यह इसलिए हुआ क्योंकि भारतीय लोकतंत्र के मूल में एक भाव है…. और वो भाव क्या है? वह भाव क्या है कि हम एक दूसरे के विरोधी हैं मगर शत्रु नहीं। और हम विरोध करते हैं विचारधारा के आधार पर। विरोध करते हैं नीतियों के आधार पर….हम विरोध करते हैं कार्यक्रमों के आधार पर… अलग-अलग है.. विचारधारा है।

सुषमा स्वराज ने अपने भाषण में कहा था कि अलग-अलग नीतियां सरकार बनाती है अलग-अलग कार्यक्रम बनाती है। उस पर हम आलोचना करते हैं। वो आलोचना प्रखर भी होती है। लेकिन प्रकार के प्रखर आलोचना भी भारतीय लोकतंत्र में एक दूसरे के व्यक्तिगत संबंधों में आड़े नहीं आती। उन्होंने हंसते हुए कहा था कि मेरे भाई कमल नाथ अपनी शरारत से इस सदन को उलझा देते थे… और आदरणीय शिंदे जी अपनी शराफत से उसे सुलझा देते थे। और इस शरारत और शराफत के बीच बैठी हुई सोनिया जी की मध्यस्थता, आदरणीय प्रधानमंत्री जी की सौम्यता, आपकी सहनशीलता और आडवाणी जी न्यायप्रियता के कारण यह सदन चल सका।

एक थी संसद,


एक था लोकतंत्र,


एक थी संसदीय मर्यादाएं


एक था पक्ष-विपक्ष का रिश्ता

अब तो विपक्ष के साथ निजी शत्रुता


और तानाशाही के ‘अवशेष’ ही शेष है !! pic.twitter.com/fWhxg7FAWT

— Rahul Gandhi (@srinivasiyc) August 12, 2021

ऐसे काबिल नेता की कमी देश में हर रोज़ खलती है @SushmaSwaraj @BansuriSwaraj

pic.twitter.com/KLMAOhGB98

— Anurag Dixit (@anuragdixit2005) August 12, 2021

उनके इस वीडियो पर लोग अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। एक टि्वटर यूजर ने लिखा कि शायद कभी ऐसे नेता भी होते थे। @sunilsharma9055 टि्वटर अकाउंट से यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया कि सुनिए सत्ता में बैठे मठाधीश संसद ऐसे चलती है न की जासूसी करने से। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि कार मोदी शाह और भाजपा अपनी दिवंगत नेता सुषमा स्वराज जी को ही सुन लें। वहीं टि्वटर हैंडल से सुषमा स्वराज का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया कि ऐसे काबिल नेता की कमी देश में हर रोज खलती है।

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