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श्रद्धा मर्डर मामलों में मणिकर्ण पहुंची दिल्ली पुलिस: आफताब की पीपल कांटेक्ट हिस्ट्री खंगाली, जिस गेस्ट हाउस में रुकी, वहां का रिकॉर्ड ले गई टीम

कुल्लू4 घंटे पहले

कॉपी लिंककुल्लू में मणिकर्ण के व्हाइट लोट्स में आफताब और श्रद्धा रूके थे। दिल्ली के बहुचर्चित श्रद्धा मर्डर मामले की जांच के संबंध में दिल्ली पुलिस की टीम हिमाचल प्रदेश के मणिकर्ण पहुंचती है। टीम ने यहां श्रद्धा और उसकी मौत का अंदेशा आफताब की पीपल कांटेक्ट हिस्ट्री खंगाली। तीन सदस्यीय पुलिस टीम उस गेस्ट हाउस में भी पहुंची जहां श्रद्धा और आफताब रुके थे। दिल्ली पुलिस की एक टीम में दो सब इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल शामिल थे।

आफताब और श्रद्धा इसी साल 6 अप्रैल हिमाचल में घूमने आए थे। दोनों तीन दिन तक कुल्लू जिले की मणिकर्ण घाटी में लोडे। दोनों 6 और 8 अप्रैल को मणिकर्ण के व्हाइट लोट्स गेस्ट हाउस और रेस्तरां में रुके थे, जबकि 7 अप्रैल की रात दोनों बगल के कुटला जंगल में एक टेंट में रहते थे। 8 अप्रैल को दोनों मणिकर्ण घाटी से वापस लौटे।

गेस्ट हाउस से दस्तावेज़ ज़ब् मनीकर्ण पहुंचें दिल्ली पुलिस की टीम यहां आफताब के व्यवहार वगैरह के बारे में जानकारी जानकारी रही है। यहां से दोनों कहां-कहां गए? यह भी लगाया जा रहा है। पुलिस ने व्हाइट हाउस और रेस्टोरेंट से दोनों के राज्य से संबंधित दस्तावेज अपने व्यवसाय के लिए ले लिए हैं। पुलिस इन्हें अपने साथ ले गई।

कुलु में मणिकर्ण के सफेद लोट्स में आफताब और श्रद्धा रुके थे।

घाटी के अन्य लोगों से भी सवाल-जवाब

व्हाइट लोट्स गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट के संचालक नरेंद्र कुमार ने बताया कि दिल्ली से आए पुलिस अधिकारियों ने आफताब और श्रद्धा के यहां टेंटों और अन्य गतिविधियों को लेकर कई सवाल पूछे। उन्होंने अपनी तरफ से पूरी जानकारी दी। नरेंद्र ने बताया कि दिल्ली पुलिस की टीम ने मणिकर्ण में कई अन्य लोगों से भी आफताब के बारे में सवाल-जवाब किए।

Booking.com के जरिए रूम बुक किया

आफताब और श्रद्धा ने व्हाइट लोट्स गेस्ट हाउस एंड रेस्टोरेंट में बुकिंग ऑनलाइन वेबसाइट बुकिंग.कॉम के जरिए करवाई थी। दोनों ने ऑनलाइन अपना अधिकार भी किया है। गेस्ट हाउस के मालिक नरेंद्र ने बताया कि दोनों दो दिन गेस्ट हाउस में रुके रहे जबकि एक रात दोनों जंगल में टेंट में रहे। तम्बू की बुकिंग दोनों ने अपने स्तरों पर की थी।

लोकल पुलिस को सूचना नहीं
दिल्ली पुलिस ने इस बहाने के बारे में हिमाचल पुलिस को न तो कोई सूचना दी और न ही स्थानीय पुलिस से किसी तरह की कोई मदद ली। दो दिन चलने के बाद टीम दिल्ली लौट आई। कुल्लू के एसएसपी गुरदेव शर्मा ने बताया कि उन्हें दिल्ली पुलिस के आने की कोई जानकारी नहीं है। वैसे इस तरह के मामलों में स्थानीय पुलिस को सूचना देना जरूरी भी नहीं होता।

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