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शहादत को निराशा मिली: एक साल प्रशासन के चक्कर काटे, मदद नहीं मिली तो परिवार ने घर में खुद लगाई शहीद की बेटमा

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    • एक साल प्रशासन के इर्द-गिर्द घूमता रहा, मदद नहीं मिली, फिर परिवार ने शहीद बेटे की प्रतिमा को घर में रखा
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    कुल्लू 13 मिनट पहले लेखक: गौरीशंकर

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    कुल्लू | शहीद अनुच्छेदांडो बाल कृष्ण की प्रतिमा लगाई।

    • जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में पिछले साल शहीद हुए थे बालकृष्ण

    कुल्लू जिले की खराहल घाटी के पूईद गांव के शहीद पैरा-बालो बालकृष्ण 24 साल की उम्र में जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में पिछले साल 4 अप्रैल को आतंकवादियों के साथ। हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। परिवार के साथ गांव के लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि उनके नाम से महाविद्यालय, अस्पताल, बस स्टैंड या चौक का नामकरण किया जाए। इस पर आश्वासन तो मिले, पर कुछ नहीं हुआ।

    एक साल का इंतजार खत्म शहीद के परिवार ने खुद ही प्रशासन को आइना दिखाने की ठानी और अपने घर में ही लाखों रुपए खर्च कर बेटे की आदमकद प्रतिमा लगा दी। बालकृष्ण के पिता महेंद्र सिंह का कहना है कि हमल कुल्लू, कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर और अन्य नेताओं से मुलाकात की गई लेकिन मांग पूरी नहीं की गई। बिलासपुर में भी शहीद संजीव कुमार के नाम पर कॉलेज का नाम रखा गया है, लेकिन कुल्लू में ऐसा नहीं हुआ है। आखिरकार हमें ही ये फैसला लेना पड़ा।

    प्रमुख का आरोप- तो ने वादा तो किया पर खेलया नहीं # याद दिलाते हुए कहा कि शहीद के नाम पर ऐतिहासिक स्थलों का नामकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोच कुल्लू ऋचा वर्मा ने आश्वासन दिया था शहीद के नाम पर कुछ न कुछ जगह का नामकरण किया जाएगा लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया। किया जा रहा है, जिस जिले से शहीद हुए जवानों की याद में यह स्मारक बनाया जाएगा। जिसमें शहीद हुए बाल कृष्ण सहित उन तमाम शहीद सैनिकों को स्थान मिलेगा जिन्होंने देश की खातिर शहादत दी है।
    – डाॅ। ऋचा वर्मा, .ओ कुल्लू ) अनावरण में कई गांवों के प्रमुख पहुंचे शहीद बालकृष्ण की प्रतिमा का अनावरण स्टेशन स्टेशनर पलचान कर्नल नरेश बरमोला ने किया। इसमें सेवा लेफ्टिनेंट पैराशूट राजिमेंट कर्नल एसएमपीडी 4 पैराशूट राजिमेंट, एडीएमैंडेंट अरुण दिनेश, कर्नल दिनेश तनवर, कैप्टन मंगल चंद ठाकुर, डीएस प्रियांक गुप्ता व कई गांवों के प्रमुख भी पहुंचे।

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