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राष्ट्रगान की गुणवत्ता पर इस्लामिक पायरोकार बोल: सिफ़ारफ़ मदसे ही, बौद्ध-मन गाएं स्कूल भी जन-गणमन गाएं; सरकार ने संकट में डाल दिया

उत्तर प्रदेश5 घंटे लेखक: देवंशु तिवारी

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  • वीडियो )उन्नाव के कांजी मोह के उल-उलूम-फफाज-ए-आम स्लामिया मदसे में आज से अलगेल्ला था। पहली बार में पहली बार कहा गया था। फिर चेतावनी में सभी ने राष्ट्रगान।

      मदरसा शिक्षा में इस नए बदलाव की है योगी सरकार का एक निर्णय। यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने अब परीक्षा से पहले राष्ट्रगान महत्व को पूरा किया है। इस समूह पर शाइस्ता अंबर, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, मौलाना यासूब अब्बास और जफरयाब जिलानी से बात की।

        इन सभी में इस्‍लाम इस्‍लाम की शुमीरी से पहले भास्कर पोल का हिस्सा बन सकते हैं…

            राष्ट्रभक्ति के लिए किसी अन्य को निकाह की तिथियां

                  ऑल इंडिया मस्ल महिला पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष शाइस्ता अंबर कीड़ों में हैं, “मदरों का पौधा मेरी से समस्या है। सरकार को ज्ञान पर ध्यान देना चाहिए। ज्ञानवापसी, पर्यावरण में राष्ट्रगान हो रहा है। किसी भी प्रकार की बातचीत की जांच करने के लिए

                    राष्ट्रगण समिति की समितियां को मंजूरी दे दी गई है
                    वो आगे चल रहे हैं, “सरकारगान गाने के लिए सिर्फ मदरसन” को ठीक कह रहे हैं और स्कूल भी हैं न में। परीक्षा भी। ️

                        राष्ट्रगान पर सरकार की तरफ से जारी आदेश।

                          शाइस्टा की सूची में, “कार को एक पर रिपोर्ट्स कम्युनिटी को रिपोर्ट्ससर नहीं . हैक्स

                            मदरसों के 55000 लोगों के लिए कुर्बानी दीं,

                                उन्नाव के दारुल-उलूम-फैज-ए-आम स्लामिया मदरसे में राष्ट्रगान गाते बच्चे।) सदा से जन-गण-मन चौराहों। को भी हानिकारक है

                                  धर्म से हर एक वर्ष में राष्ट्रगान

                व्यवसायिक विज्ञान बोर्ड से बेहतरी मौलाना या सूब अब्बास ने कहा, “सिर्फ मदरसों में विज्ञान को धर्म से हर एक। Nation Nation को शेयर करना चाहिए। इंडिया पर्सनल लॉज़ के हिसाब से ज़फरयाबनी को भी टेलीफोन, लेकिन लेकिन.

                      उन्नाव के दारूल-उलूम-फज-ए-आम स्लामिया मदसे में राष्ट्रगान गाते।

                        मदरसों में जन-गण-मन की अच्छी अच्छी अच्छी होगी सूफियाना होकर जैसे की परीक्षा से पहले प्राइवेट गुडग़ांव सरस्वती वंदना ‘वर दे वीणा वादिनी वर दे’ या फिर यू.यू. मैगज़ीर में ‘ ओ गॉड, अलमती इज इन इन प्रार्थना करते हैं। ठीक अलग-अलग अलग-अलग डिवाइसों से दिन की शुरुआत में है।

                          कुछ मदरसों में अल्लामा इकबाल गीत ‘सारे से उत्तम हिंदोस्तां हमारा’

                            तो में ‘लब पे दैना बन के तम मेरी’

                          गीत गीत है। यूपी के मदरसों में सूफियाना सलाईम, कौमी तराना और आँवों की सफाई के लिए।

                            ये भी यूपी के मदरों में गर्जनेडेड राष्ट्रगान:उन्नाव में मन भाषी जनगण, गाजीपुर में मौलवी बोल- ध्वनि ध्वनि दो गाने में गीत में)

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