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राजस्थान के पंख का पंखा:600 करोड़ तक की कमाई; पहली बार पूरा होने के लिए, कामना पूरी होने के बाद

अलवर 2 पहली लेखक: धर्मेंद्र यादव

अफगान भारत पर कीट के रूप में प्याज़ के बाजार में दिखने वाली दृश्यावली है। बार-बार भारत आना मुश्किल है। इस तरह के उत्पादों का उत्पादन बढ़ रहा है। प्याज की फसल में प्याज की फसल में 260 करोड़ डालियां डालनी होंगी। इस एक ही जिले में करीब 40 हजार बीघा में प्याज लगा दिया है। दूषित होने के कारण 600 करोड़ हो सकते हैं।

) देश में संक्रमण, प्रसार देश, महाराष्ट्र में सबसे अधिक प्याज़ होता है। इन गुणों में बदलाव की स्थिति में है। खराब खराब होने के कारण खराब हो गया है। इस बार अगर आप अनुमान लगा सकते हैं तो आप क्या कर सकते हैं। अन्य बातों पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है। अतिप्रकरण के चांस कम हैं।

2019 में प्याज़ वर्ष 2019 को भारत में प्याज के भाव 100 से अधिक हो गए थे। . 50 से 55 ये लगे हुए हैं। राज्य सरकार ने यह कदम उठाया था। अब सरकार के नियंत्रण में नियंत्रण की जांच की जाएगी। जरूरत के समय का समय भारत में कीटाणु के प्याज का ट्रांसप्लांट किया गया है। इस बारे में जानकारी प्राप्त करें। संसाधित होने पर संसाधित होने पर संसाधित होने के बाद उसे संसाधित किया जाता है। 2020 में प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट में।

चाहे प्याज़ फूटने की स्थिति के बाद में दर्ज किया गया। यह इस तरह के खतरनाक रोग के बारे में निश्चित है। कोरोना में भाजी घाटा
कोरोना फसल में वृद्धि हुई थी। अब भरपाई के लिए बहाल किया गया है। इस बार की तुलना में 25 प्रतिशत वृद्धि हुई है। प्याज की खेती में प्याज़ की खेती करें। इस बार कई जगहों पर पहले से 10 से 20 गुना अधिक प्याज की खेती की गई है। अलवर का प्याज़ मौसम तक.

किसानों को उम्मीद है कि प्याज का भाव अच्छा होने तक 1.50 लाख तक प्याज हो सकता है।

65 हजार तक खर्च
1 बीघा एकड़ में फींग और होने तक 65 से 70 हजार खर्च पूरा। उम्मीद है कि प्याज का भाव अच्छा रहेगा। प्याज का भाव कम हो रहा है। यह एक प्रकार का जुआ है। बची-खुची एक बीघा के एकड़ में खर्च हो सकता है 70 से 80 हजारा रोग से अर्जित करें। ) हाल ही में प्याज के बीज पर खर्च होने वाला है। 1 बीघा एकड़ में 42 लाख बीज पर खर्च कर रहे हैं। जीन्स का बीज 4 हजार बाद में काम करने वाला, खाने का खर्च खर्च करने का खर्च अलग। सब मिलाकर एक बीघा में 65 से 70 हजार रुपए का खर्च आता है। 40 हजार बीघा के मूल्य निर्धारण से अलवर के उत्पादन का 250 करोड़ से अधिक प्याज की खेती पर खर्च पूरा होता है। एक बीघा में 125 कट्टे तक

प्याज़ को एक बीघा में रखा जाता है। एक कट्टे में 50 चालू है। एक बीघा में 80 कट प्याज़। रोगजनक की भविष्यवाणी की जा सकती है। अधिक खर्च भी अधिक है। यह भी भरपाई है।

2 साल पहले 3 लाख तक
दो नए अंदाज़ में सबसे अधिक हो गए थे बीजा के खेत में तीन लाख तक एक अनंत है। इस बार भी ऐसी ही उम्मीद है। इस समय भी बुआई जारी है।

रामगढ़ के किसान इसराइल खां ने प्याज के भावों पर अवलोकन करता है। मेव में कहावत है कि प्याज को प्याज ही भरै। मतलब प्याज का मौसम ही भरता है। कामयाबी को भी विकसित किया जा सकता है। इस लवल में किसान हर साल जुआ खेलने वाले हैं। प्याज की खेती की क्षमता से बाहर है। वास्तव में प्रभाव भी मो. यह है।

जारी है

कृषि उपायुक्त पी.सी. मीणा ने हमेशा इस बार प्याज की बुआई में वृद्धि की। खेती करने वाले लोग हैं। पहले के बीच में एले अलवर में सैकड़ों हेक्टेयर में।

18 प्रतिशत बुआई
प्याज के प्रमुख पप्पू प्रधान का कहना है कि इस बार 18 प्रतिशत प्याज की बुआई है। प्याज के स्वाद को बेहतर बनाने के बाद, यह खराब हो गया था। पुराना प्याज का स्टॉक भी है, इसलिए बहुत अच्छे भाव मिलने को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता। यह एक ही प्रकार का जुआ है।किसानों को उम्मीद है कि प्याज का भाव अच्छा रहा तो 1 बीघा में 1.50 लाख रुपए तक की प्याज हो सकती है।

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