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ये हैं भाजपा के पांच द‍िग्‍गज ज‍िन पर है पार्टी को चुनाव ज‍िताने का जिम्मा

गुजरात चुनाव में मोदी-शाह के अलावा भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष सी आर पाटील, गुजरात भाजपा के सबसे चर्चित युवा चेहरा हर्ष संघवी, गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघाणी और केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है।

भारतीय जनता पार्टी गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में इतिहास बनाने की कोशिश में है। पार्टी को लगातार सत्ता में रहते हुए 25 साल पूरा होने को है। अगर इस बार ढाई दशक की एंटी इनकम्बेंसी को पार कर भाजपा जीत हासिल कर लेती है, तो लगातार तीन दशक तक सत्ता में रहने का रिकॉर्ड बन जाएगा।

भाजपा नेता अमित शाह का दावा है कि पार्टी उनके गृह राज्य में दो-तिहाई बहुमत से जीत हासिल करेगी। सबसे लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने वाले नरेंद्र मोदी भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं।

भाजपा के लिए पिछला चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले 8 सालों में भाजपा ने गुजरात में तीन मुख्यमंत्री बनाए हैं। सीटों की संख्या 115 से घटकर 99 हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तटवर्ती किले को बचाने की जिम्मेदारी मोदी और शाह के अलावा पांच इन नेताओं पर भी है। इन नेताओं में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष सी आर पाटील, गुजरात भाजपा के सबसे चर्चित युवा चेहरा हर्ष संघवी, गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघाणी और केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला का नाम शामिल है।

आदिवासी वोट लाने की तैयारी में नड्डा 

गुजरात में आदिवासी समुदाय के वोटों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस को जाता रहा है। गुजरात के कुल मतदाताओं में आदिवासियों का हिस्सा 15 प्रतिशत है। राज्य की कुल 182 विधानसभा सीटों में से 27 पर आदिवासियों का असर है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जेपी नड्डा ने बहुचराजी से आशापुरा कच्छ और द्वारका से पोरबंदर की गुजरात विकास यात्रा की शुरुआत करवायी। यह यात्रा ज्यादातर आदिवासी बहुल क्षेत्रों को होकर गुजरेगी।

गुजरात की राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं सी आर पाटील

गुजरात भाजपा इकाई के अध्यक्ष सी आर पाटील को राज्य की राजनीति का बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। जुलाई 2020 में पार्टी की कमान संभालने के कुछ माह बाद ही पाटील ने अपना मॉडल पेश किया। उसी वर्ष नवंबर में राज्य के भीतर आठ सीटों पर उपचुनाव हुए थे। पाटील ने पार्टी को सभी आठों सीट पर जीत दिलाई। अगले वर्ष जुलाई यानी 2021 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।

हालांकि, आगामी राज्य विधानसभा चुनाव को सम्मानजनक जनादेश के साथ जीताना पाटिल के संगठनात्मक कौशल के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। पिछले कई दशकों के चुनाव की तरह इस बार गुजरात में भाजपा मुकाबला सिर्फ कांग्रेस से नहीं है। राज्य में आम आदमी पार्टी की सक्रियता ने लड़ाई त्रिकोणीय होने की संभावना है। ऐसे में पाटिल की कंधों पर जिम्मेदारी का बोझ बढ़ गया है।

मोदी और शाह के करीबी पाटील ने सूरत आईटीआई से पढ़ाई की है। तकनीक के इस्तेमाल और सोशल मीडिया से जनसंपर्क में उन्हें माहिर माना जाता है। अपने पिता की तरह ही पुलिस कांस्टेबल रहे पाटील दक्षिण गुजरात के नवसारी ने तीन बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 1989 में भाजपा ज्वाइन किया था।

जीतू वघानी: राज्य में पार्टी का मजबूत चेहरा

गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघाणी को राज्य में भारतीय जनता पार्टी का मजबूत चेहरा माना जाता है। इनका पूरा नाम जीतेंद्रभाई सवजीभाई वघाणी है। लेउवा पाटीदार समुदाय पर इनकी मजबूत पकड़ बतायी जाती है। वघाणी खुद भी इसी समुदाय से आते हैं। 2012 में पहली बार विधायक बनने वाले वघाणी ने अपने राजनितिक करियर की शुरुआत एबीवीपी से की थी।

भाजपा के युवा तुर्क हर्ष संघवी

गुजरात सरकार में जो पद कभी अमित शाह के पास हुआ करता था, वह अब हर्ष संघवी के पास है। हर्ष संघवी वर्तमान में गुजरात के गृह मंत्री है। संघवी 2012 में मात्र 27 साल की उम्र में विधायक बने थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनकी संगठनात्मक क्षमताओं से पीएम मोदी भी प्रभावित हैं। साल 2017 में संघवी ने ही सीआर पाटिल के मार्गदर्शन में सूरत में नरेंद्री मोदी के रोड शो का आयोजन किया था। पाटीदार आन्दोलन के कारण पिछले चुनाव में सूरत के भीतर भाजपा के सबसे बड़े नेता की रैली चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन संघवी ने अपनी संगठनात्मक कौशल से रैली का सफल आयोजन किया था। कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान भी राज्य में संघवी के प्रयासों की सरहान हुई थी।

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मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकते हैं पुरुषोत्तम रूपाला

गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री की कम लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा पुरुषोत्तम रूपाला को मुख्यमंत्री का चेहरा बना सकती है। भाजपा में प्रभावशाली नेता की तौर पर अपनी जगह बना चुके रूपाला केंद्र सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मंत्री हैं। गुजरात की राजनीति में पाटीदार समुदाय के महत्व को समझते हुए भी पार्टी रूपाला का नाम आगे कर सकती हैं। 1980 के दशक में भाजपा से जुड़ने वाले रूपाला गुजरात के कदवा पाटीदार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

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