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यूपी पंचायत के लिए समर्थन मांगने हरियाणा पहुंचे टिकैत, बोले-खट्टर सरकार कर रही झूठे मामले दर्ज

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किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा की खट्टर सरकार आंदोलनकारी किसानों को गिरफ्तार करके और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कर अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने की कोशिश कर रही है।

जनसत्ता ऑनलाइन
Edited By रुंजय कुमार

चंडीगढ़ | August 12, 2021 10:47 PM

किसान नेता राकेश टिकैत ने हरियाणा खट्टर सरकार को किसान आंदोलन में हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दी। (फोटो – पीटीआई)

बीते 8 महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों में किसान पंचायत करने के बाद अब किसान नेताओं ने यूपी में भी 5 सितंबर को पंचायत करने का ऐलान किया है। यूपी पंचायत के लिए समर्थन मांगने हरियाणा पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा की खट्टर सरकार किसानों के ऊपर झूठे मामले दर्ज कर रही है।

पांच सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में होने वाली किसान महापंचायत को लेकर समर्थन मांगने हरियाणा के कुरुक्षेत्र पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हरियाणा में सत्तारूढ़ सरकार आंदोलनकारी किसानों को गिरफ्तार करके और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कर अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने की कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को किसान आंदोलन में हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दी।

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार उन्हें विरोध प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकती है। इन कानूनों के खिलाफ उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि कानून रद्द नहीं हो जाते। साथ ही उन्होंने कहा कि किसान एकजुट हैं और केंद्र सरकार के साथ एक लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। केंद्र सरकार किसी की भी नहीं सुनती है और जो कोई भी उनके खिलाफ बोलने की कोशिश करता है उसे देशद्रोही का तमगा दे दिया जाता है।

राकेश टिकैत ने इस दौरान पंजाब और उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि किसान काफी परिपक्व हैं और सब कुछ जानते हैं। उन्होंने कहा कि किसान एकजुट हैं और केंद्र सरकार के साथ एक लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। किसान अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं और हम केंद्र को तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर करेंगे।   

गौरतलब है कि किसान आंदोलन को 8 महीने से भी अधिक का समय हो चुका है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। जनवरी महीने के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने आखिरी मीटिंग में तीनों कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे नामंजूर कर दिया था। प्रदर्शनकारी किसान तीनों कानूनों की वापसी को लेकर अड़े हुए हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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