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मेरी बात ध्यान रखना…कानून वापसी के बाद राहुल गांधी ने पोस्ट किया पुराना वीडियो, बीमार उद्धव ने दी ये नसीहत

उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र को ऐसे कानूनों पर विपक्षी दलों और किसानों के साथ चर्चा करनी चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो उन्हें आज जिस शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, उसका सामना नहीं करना पड़ता।

तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की सरकार की घोषणा के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक पुराना वीडियो शेयर किया है। जो अब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में राहुल तब किसान आंदोलन के समर्थन पर बोल रहे थे।

तब राहुल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा था- मेरी बात का ध्यान रखिएगा, सरकार को किसान विरोधी कानून वापस लेने पड़ेंगे। इसी वीडियो को राहुल ने आज दोबारा से शेयर करते हुए लिखा- देश के अन्नदाता ने सत्याग्रह से अहंकार का सर झुका दिया। अन्याय के खिलाफ ये जीत मुबारक हो! जय हिंद, जय हिंद का किसान!

वहीं अपने पुराने वीडियो में राहुल कह रहे हैं- “किसान जो कर रहे हैं, उस पर मुझे बहुत गर्व है। मैं किसानों का पूरा समर्थन करता हूं और मैं उनके साथ खड़ा रहूंगा। मैंने पंजाब में एक यात्रा में उनका मुद्दा उठाया और हम जारी रखेंगे करो। मेरी बात को ध्यान रखिएगा। सरकार कानून को वापस लेने के लिए मजबूर हो जाएगी। मैंने जो कहा वह याद रखें।”

वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक बयान में कहा कि तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की केंद्र की घोषणा इस बात का उदाहरण है कि आम आदमी की ताकत क्या हासिल कर सकती है। ठाकरे इन दिनों सर्वाइकल स्पाइन सर्जरी के बाद अस्पताल हैं। वहीं से उन्होंने ये बयान जारी किया है।

उन्होंने कहा- “राष्ट्र ने आम आदमी की शक्ति को देखा है। कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा इस बात का उदाहरण है कि आम आदमी क्या कर सकता है और उनके पास क्या शक्ति है।” पीएम मोदी द्वारा की गई घोषणा का स्वागत करते हुए ठाकरे ने कहा कि सरकार स्थिति को समझ गई है”।

ठाकरे ने कहा कि केंद्र को ऐसे कानूनों पर विपक्षी दलों और किसानों के साथ चर्चा करनी चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो उन्हें आज जिस शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, उसका सामना नहीं करना पड़ता। सीएम ने आगे कहा कि देश भर में कृषि कानूनों के खिलाफ नाराजगी का माहौल है। शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा की महा विकास अघाड़ी ने लगातार नए कृषि कानूनों का विरोध किया था। उन्हें उम्मीद है कि संसदीय प्रक्रिया जल्द से जल्द कानून को निरस्त कर देगी।

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