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मामला गुजरात का:प्रतिबंधित डाक्यूमेंट्री की जेनयू में दाखिले, अब बयानों का बवंडर

भास्कर ओपीनियनमामला गुजरात का:प्रतिबंधित डाक्यूमेंट्री की जेएनयू में दाखिले, अब बयानों का बवंडर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में बीबीसी की एक डाक्यूमेंट्री है जो देश में प्रतिबंधित है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां ज्यादा प्रतिबंधित काम झंडे से होते रहते हैं। चाहे पाकिस्तान समर्थक नारेबाज़ी हो, चाहे भारत विरोधी नारे हों, सभी दृष्टिकोणों को देखते हैं। केंद्र सरकार इस जेनयू का कुछ कर भी नहीं पाती है।

हम और हमारी सरकार के पास रूढ़ि पीटने के अलावा कोई काम नहीं है। आख़िर ये जेनू नो अमेरिका का वेट हाउस तो नहीं है। फिर छोटी घटनाओं की तरह मोटी घटनाओं से चंदा गिफ़्टारियों से आगे की बात क्यों नहीं मिलती है?

मंगलवार की रात जेएनयू छात्र संघ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्ट्रीमिंग कर रहा था।  प्रशासन ने इसे रोकने के लिए लाइट काट दी, जिसके बाद जेएनयू में पत्थरबाजी शुरू हो गई।

मंगलवार की रात जेएनयू छात्र संघ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्ट्रीमिंग कर रहा था। प्रशासन ने इसे रोकने के लिए लाइट काट दी, जिसके बाद जेएनयू में पत्थरबाजी शुरू हो गई।

दरअसल, बात द्वेष से संबंधित है। कहा जाता है कि बीबीसी की इस डाक्यूमेंट्री में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कुछ आक्षेप लगाए गए हैं, जबकि एसआईटी इस मामले में मोदी को क्लीन चिट दे चुका है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने उनका आकार बहुत कम कर दिया है। फिर जेएनयू और जामिया मिलिया में इस डाक्यूमेंट्री का क्या मतलब है? जबकि यह डाक्यूमेंट्री देश में पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस नेताओं को इस डाक्यूमेट्री को दिखाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं दिखाई देती है। बल्कि वे तो इस डाक्यूमेंट्री पर रोक को ही सवालों के कटघरे में रखते हैं। शशि थरूर का कहना है कि इस डाक्यूमेंट्री को दिखाए जाने से कौन सी देश की संप्रभुता ख़तरे में पड़ती है जो केंद्र सरकार इस पर प्रतिबंध लगा रही है। दूसरी तरफ़ राहुल गांधी कह रहे हैं कि सचाई एक न एक दिन सामने ही डाली जाती है। डाक्यूमेंट्री के पोस्टर भी आए तो इसमें क्या बुराई है? उल्लेखनीय है कि जेएनयू से पहले हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भी छात्रों को एक समूह के बीच इस डाक्यूमेंट्री की रिपोर्टिंग की गई थी।

ये दस्तावेज़ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री से लिया गया है।  पहले एपिसोड में गुजरात में रहने के दौरान नरेंद्र मोदी के कुछ इंटरव्यू दिखाए गए हैं।

ये दस्तावेज़ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री से लिया गया है। पहले एपिसोड में गुजरात में रहने के दौरान नरेंद्र मोदी के कुछ इंटरव्यू दिखाए गए हैं।

उद्र ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस डाक्यूमेंट्री में मोदी को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, वे इससे सहमत नहीं हैं। जब अन्य देश के राजनेता इस डाक्यूमेंट्री का समर्थन नहीं कर रहे हैं तो भारतीय नेताओं को इसका समर्थन से आख़िर क्या मिल रहा है? क्या कांग्रेस की सरकार होती है और उसके द्वारा प्रतिबंधित की गई किसी ऐसी ही डाक्यूमेंट्री या फिल्म को देश में दिखाया जाता है, तब भी उनके सवाल यही होते हैं?

यहां तक ​​कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी इस डाक्यूमेंट्री पर किसी तरह की बयान देने से इनकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि बीबीसी ने 17 जनवरी को इस डाक्यूमेंट्री का पहला एपिसोड प्रसारित किया था। दूसरा एपिसोड 24 जनवरी को आने वाला था। इसके पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

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