POLITICS

भोजन की बर्बादी

भारतीय संस्कृति पूरे विश्व के लिए मिसाल है। यहां सदियों से अन्न को ब्रह्म माना जाता रहा है।

भारतीय संस्कृति पूरे विश्व के लिए मिसाल है। यहां सदियों से अन्न को ब्रह्म माना जाता रहा है। मगर आज आधुनिकता के दौर में लोग इतने अंधे होते जा हैं कि अन्न को पूजने के बजाय थाली में भोजन छोड़ना एक फैशन मानने लगे हैं। शायद इन लोगों को भोजन के अभाव में भूखे मरने वालों की जानकारी नहीं है। भोजन की बर्बादी से न केवल सरकार, बल्कि सामाजिक संगठन भी चिंतित हैं। दुनिया भर में हर वर्ष जितना भोजन तैयार होता है, उसका एक तिहाई यानी लगभग एक अरब तीस करोड़ टन बर्बाद चला जाता है। बर्बाद जाने वाला भोजन इतना होता है कि उससे दो अरब लोगों के खाने की जरूरत पूरी हो सकती है।

विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व का हर सातवां व्यक्ति हर दिन भूखा सोता है। भारत में यह आंकड़ा हर पांचवें व्यक्ति पर स्थिर है। अगर इस अन्न बर्बादी को रोका जा सके तो बहुत सारे लोगों का पेट भरा जा सकता है। समाज के साथ साथ सरकार को ‘भोजन बचाओ भूखों को खिलाओ’ जैसे जागरूकता अभियान के तहत भोजन के प्रति लोगों को जागरूक करते रहने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय में देश को किसी बड़े भुखमरी जैसे आपदा का सामना न करना पड़े।

’श्याम मिश्रा, दिल्ली विश्वविद्यालय

पाकिस्तान प्रेम

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू का पाकिस्तान प्रेम फिर उमड़ पड़ा। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को बड़ा भाई कहा। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकवादियों की पनाहगाह है। भारत पाकिस्तान के संबंध अच्छे नहीं हैं। हजारो निर्दोष कश्मीरियों को मौत के घाट उतारने में पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादियों का हाथ रहा है। इसके बावजूद सिद्धू ने इमरान को बड़ा भाई कह कर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। उनको संयम से काम लेना चाहिए।

भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थामने वाले सिद्धू ने कांग्रेस को विभाजन के किनारे लाकर खड़ा कर दिया। कांग्रेस का जनाधार पहले से कमजोर है। देश में गिनती के राज्य कांग्रेस के पास हैं। उसमें नेताओं की मनमानी कांग्रेस की फिर से लुटिया डुबोएगी। पंजाब कांग्रेस में मनमुटाव की राजनीति करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू की आगामी विधानसभा चुनाव में राह आसान नहीं है। जिनके बूते कांग्रेस को पंजाब में जीवनदान मिला था, उनको ही निष्कासित कर दिया। वहां वोट खींचने वाले नेता नहीं हैं। प्रदेश की जनता स्थानीय नेताओं का भरोसा करती है, उतना राहुल और प्रियंका का नहीं करती है, क्योंकि उन्हें हमेशा उनके ही साथ रहना है।

पंजाब में कैप्टन ने कांग्रेस की लाज बचाई थी। नवजोत सिंह सिद्धू राजनीतिक मंच से ही ठोको ताली का आदेश करते हैं। जबकि उनको यह तो पता ही था कि यह कपिल शर्मा का शो नहीं है। सिद्धू के विधानसभा में नोकझोंक के बाद कांग्रेस के समीकरण बदल गए। अब देखना यह है कि पंजाब में चन्नी सरकार को फिर से सता दिलाने के प्रयास में कितनी सफलता मिलती है।

’कांतिलाल मांडोत, सूरत

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